मुंबई पुलिस की डिजिटल ट्रैकिंग से उत्तर प्रदेश में छिपे 1650 चोरी और गुम मोबाइल फोन बरामद, कीमत करीब दो करोड़ रुपये
मुंबई में मोबाइल चोरी और गुम होने के मामले आम हैं, खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों पर। ऐसे में सीईआईआर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इ
मुंबई पुलिस ने मोबाइल चोरी और गुम होने के मामलों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस अभियान में डिजिटल ट्रैकिंग और तकनीकी निगरानी के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से 1,650 चोरी हुए और गुम हुए मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। इन फोन की कुल अनुमानित कीमत लगभग दो करोड़ रुपये है। ये सभी मोबाइल फोन मुंबई में चोरी हुए थे या वहां से गुम हो गए थे और बाद में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में पहुंच गए थे।
यह अभियान मुंबई पुलिस द्वारा राज्य स्तर पर शिकायतों की समीक्षा के दौरान शुरू किया गया था। समीक्षा में यह बात सामने आई कि मुंबई में दर्ज कई गुम या चोरी हुए मोबाइल फोन की लोकेशन उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ट्रेस हो रही है। इस जानकारी के आधार पर मुंबई पुलिस कमिश्नर की मंजूरी से एक विशेष रिकवरी अभियान शुरू किया गया। इस अभियान के लिए 13 समर्पित टीमें बनाई गईं, जिनमें प्रत्येक टीम में एक पुलिस जोन से अधिकारी और सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (सीईआईआर) से जुड़े अधिकारी शामिल थे। ये टीमें उत्तर प्रदेश के 19 जिलों में भेजी गईं, जहां ट्रेस किए गए डिवाइस मौजूद थे। स्थानीय पुलिस के सहयोग से इन टीमों ने सत्यापन और समन्वय के बाद सभी 1,650 मोबाइल फोन सफलतापूर्वक बरामद कर लिए। बरामदगी की यह कार्रवाई सुचारू रूप से पूरी हुई और इसमें सीईआईआर सिस्टम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सीईआईआर एक सरकारी समर्थित प्रणाली है, जो मोबाइल फोन के यूनिक आईएमईआई नंबर के आधार पर चोरी या गुम हुए डिवाइस को ट्रैक करने में मदद करती है। इस सिस्टम के जरिए फोन की लोकेशन का पता लगाया जाता है और जब नया सिम कार्ड इस्तेमाल होता है तो संबंधित जानकारी पुलिस को मिलती है।
बरामद किए गए फोन मुंबई के निवासियों के हैं, जो या तो चोरी के शिकार हुए थे या अनजाने में गुम हो गए थे। इन फोन को सत्यापन के बाद उनके असली मालिकों को वापस लौटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह अभियान मोबाइल चोरी के खिलाफ मुंबई पुलिस की निरंतर कोशिशों का हिस्सा है, जिसमें तकनीकी संसाधनों और अंतरराज्यीय समन्वय का उपयोग किया जा रहा है। इस तरह के अभियानों से चोरी के नेटवर्क पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है, क्योंकि कई बार चोरी के फोन अंतरराज्यीय स्तर पर बेचे जाते हैं। इस विशेष अभियान के अलावा मुंबई पुलिस ने अब तक कुल 33,514 मोबाइल फोन ट्रेस करके उनके असली मालिकों को वापस लौटाए हैं। यह आंकड़ा पूरे अभियान की सफलता को दर्शाता है, जिसमें विभिन्न जोन और यूनिट्स ने मिलकर काम किया है। अभियान में डिजिटल ट्रैकिंग के अलावा स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय और आईएमईआई आधारित डेटा एनालिसिस पर जोर दिया गया है। इस प्रक्रिया से पुलिस को उन फोन तक पहुंचने में आसानी हुई जो अन्य राज्यों में सक्रिय हो रहे थे।
मुंबई में मोबाइल चोरी और गुम होने के मामले आम हैं, खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों पर। ऐसे में सीईआईआर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इससे फोन ब्लॉक किया जा सकता है और ट्रैकिंग आसान हो जाती है। इस अभियान में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में छापेमारी और तलाशी के दौरान फोन बरामद हुए, जो मुंबई से चोरी होकर वहां पहुंचे थे। पुलिस ने इन फोन को जब्त करने के बाद आगे की जांच भी शुरू की है ताकि चोरी के स्रोत और नेटवर्क का पता लगाया जा सके। यह बरामदगी मोबाइल चोरी के मामलों में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे न केवल मालिकों को उनका सामान वापस मिलता है बल्कि चोरों के लिए बाजार मुश्किल होता है। अभियान में शामिल टीमों ने तकनीकी विश्लेषण, लोकेशन ट्रैकिंग और स्थानीय सहयोग से यह उपलब्धि हासिल की। मुंबई पुलिस ने इस तरह के अभियान को जारी रखने की योजना बनाई है ताकि अधिक से अधिक चोरी या गुम हुए फोन ट्रेस किए जा सकें। इस सफलता से अन्य राज्यों में भी समान अभियान चलाने की संभावना बढ़ गई है। यह अभियान डिजिटल ट्रैकिंग की ताकत को दिखाता है, जिससे दूर-दराज के इलाकों में छिपे फोन भी बरामद हो सके हैं। कुल मिलाकर, 1,650 फोन की यह बरामदगी अभियान की एक बड़ी मिसाल है और कुल 33,514 फोन लौटाने की दिशा में एक और कदम है।
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