कजाकिस्तान के अल्माटी के पास भीषण कार हादसे में राजस्थान के MBBS छात्र राहुल यादव की मौत, डिग्री पूरी होने से महज छह महीने पहले चला गया सपना
हादसे के बाद भारतीय दूतावास ने घटना की पुष्टि की और राहुल यादव के जन्म की तारीख 13 मार्च 2001 बताई। दूतावास ने परिवार और संबंधितों के प्रति संवेदना व्यक्त
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नांगल खोड़िया गांव के निवासी 25 वर्षीय राहुल यादव की कजाकिस्तान में एक दुखद सड़क हादसे में मौत हो गई है। राहुल साउथ कजाकिस्तान मेडिकल एकेडमी में MBBS की अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे और उनकी डिग्री जून 2026 में पूरी होने वाली थी। वे 4 सितंबर 2025 को पढ़ाई के लिए कजाकिस्तान गए थे। हादसा 6 जनवरी 2026 को अल्माटी शहर के पास अल्माटी-बिश्केक हाईवे पर हुआ, जब राहुल अपने चार साथियों के साथ शिमकेंट से अल्माटी की ओर जा रहे थे। इस दौरान उनकी कार का एक अन्य वाहन से टकराव हो गया। हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिसमें ड्राइवर भी शामिल था। राहुल यादव और उनके एक साथी मंजीत सिंह सोलंकी गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे आईसीयू में थे। राहुल का इलाज चल रहा था, लेकिन 9 जनवरी 2026 को सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। इस हादसे में कुल पांच भारतीय नागरिक शामिल थे, जिनमें चार छात्र और एक पर्यटक थे। पहले दो छात्रों की मौत मौके पर हुई, जबकि राहुल तीसरे छात्र के रूप में इलाज के दौरान नहीं बचे। अन्य घायल मंजीत सिंह सोलंकी की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।
राहुल यादव माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके पिता दीपचंद हरियाणा के गुरुग्राम में टैक्सी चलाते हैं। परिवार में एक बड़ी बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है। राहुल अविवाहित थे और पढ़ाई में अच्छे थे। परिवार के अनुसार, राहुल डॉक्टर बनने का सपना देखकर कजाकिस्तान गए थे और घर पर आने पर पड़ोसियों से मिलते थे। हादसे की सूचना मिलने पर परिवार में गहरा सदमा है। परिजनों ने बताया कि डिग्री पूरी होने में सिर्फ छह से सात महीने बाकी थे, लेकिन यह हादसा सब कुछ छीन गया।
हादसे के बाद भारतीय दूतावास ने घटना की पुष्टि की और राहुल यादव के जन्म की तारीख 13 मार्च 2001 बताई। दूतावास ने परिवार और संबंधितों के प्रति संवेदना व्यक्त की। कजाकिस्तान की स्थानीय पुलिस और आपातकालीन सेवाओं ने हादसे की जांच शुरू की। हादसा अल्माटी-बिश्केक हाईवे के 86वें किलोमीटर पर हुआ। राहुल के शव को आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद भारत लाया गया। शनिवार 11 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 3:30 बजे उनका शव दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा। वहां से शव को गांव नांगल खोड़िया के लिए रवाना किया गया। गांव पहुंचने पर अंतिम संस्कार होने की उम्मीद है।
यह घटना भारतीय छात्रों के विदेश में पढ़ाई के दौरान होने वाली जोखिमों को उजागर करती है, खासकर सड़क सुरक्षा के मामले में। राहुल यादव जैसे कई छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों में मेडिकल शिक्षा के लिए जाते हैं और ऐसे हादसे परिवारों के लिए बहुत बड़ा झटका होते हैं। हादसे में शामिल अन्य छात्रों और पर्यटक का इलाज चल रहा है। कजाकिस्तान में भारतीय छात्रों की संख्या काफी है और साउथ कजाकिस्तान मेडिकल एकेडमी में कई भारतीय छात्र पढ़ते हैं। इस घटना से संबंधित जांच जारी है ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। परिवार और गांव में शोक की लहर है और राहुल की याद में लोग दुखी हैं। घटना के बाद से राहुल यादव के परिजन और गांव वाले उनके शव के इंतजार में थे। शव के पहुंचने पर पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ। यह हादसा 6 जनवरी को दोपहर के समय हुआ और राहुल तीन दिनों तक आईसीयू में संघर्ष करते रहे। अंततः उनकी मौत ने सबको स्तब्ध कर दिया। परिवार ने बताया कि राहुल का सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना था, लेकिन यह सपना अधूरा रह गया। हादसे में कार तेज रफ्तार में थी और टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
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