अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: सरकारी स्कूल को बनाया हाईटेक इंग्लिश मीडियम, पढ़िए शिक्षा क्षेत्र में इतिहास गढ़ने वाली शिक्षिका मंजू वर्मा की कहानी
मंजू वर्मा (Manju Verma) को यह पुरस्कार ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों व बच्चों की रुचि सरकारी स्कूलों के प्रति बढ़ाने के लिए दिया गया थे। मंजू वर्मा (Manju Verma) जिले के विकासखंड सुरसा स्थित बरहा उ....
Reported By: Vijay Laxmi Singh(Editor-In-Chief)
Edited By: Saurabh Singh
International Women's Day.
भारतीय महिलाएं ऊर्जा से लबरेज, दूरदर्शिता, जीवन्त उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ सभी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं। भारत के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के शब्दों में, हमारे लिए महिलाएं न केवल घर की रोशनी हैं, बल्कि इस रौशनी की लौ भी हैं। अनादि काल से ही महिलाएं मानवता की प्रेरणा का स्रोत रही हैं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से लेकर भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले तक, महिलाओं ने बड़े पैमाने पर समाज में बदलाव के बडे़ उदाहरण स्थापित किए हैं।
महिलाओं में जन्मजात नेतृत्व गुण समाज के लिए संपत्ति हैं। प्रसिद्ध अमेरिकी धार्मिक नेता ब्रिघम यंग ने ठीक ही कहा है कि जब आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं, तो आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं। जब आप एक महिला को शिक्षित करते हैं तो आप एक पीढ़ी को शिक्षित करते हैं। इसलिए, यह इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम ’’एक स्थायी कल के लिए आज लैंगिक समानता‘‘ है।
भारतीय इतिहास महिलाओं की उपलब्धि से भरा पड़ा है। विभिन्न माध्यम से महिलाएं न केवल खुद को सशक्त बना रही हैं बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूती में को भी योगदान दे रही है। सरकार के निरन्तर लगातार आर्थिक सहयोग से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प में उनकी भागीदारी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, टेक्निकल, विज्ञान, सेना सहित लगभग हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपने परचम लहराए हैं। आज हम आपको बताएंगे हरदोई जिले में कार्यरत राज्य मान्यता प्राप्त शिक्षिका व प्रधानाध्यापिका मंजू वर्मा (Manju Verma) के बारे में, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है। राजधानी लखनऊ के लोकभवन में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में जिले की शिक्षिका मंजू वर्मा (Manju Verma) को मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। शिक्षा के प्रति ग्रामीण अभिभावकों और बच्चों का रुझान बढ़ाने वाली मंजू वर्मा (Manju Verma) को 2023 में शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री के हाथों लोकभवन में सम्मानित किया गया था।
इस सम्मान से जिलेवासियों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया। मंजू वर्मा (Manju Verma) को यह पुरस्कार ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों व बच्चों की रुचि सरकारी स्कूलों के प्रति बढ़ाने के लिए दिया गया थे। मंजू वर्मा (Manju Verma) जिले के विकासखंड सुरसा स्थित बरहा उच्च प्राथमिक विद्यालय में बतौर प्रधानाध्यापिका कार्यरत हैं। इन्होंने विद्यालय के सुधार के लिए सरकारी सहायता का मुंह न देखकर स्वयं के पैसे से तमाम कार्य विद्यालय में कराए। विद्यालय में बनाई गई नक्षत्रशाला व प्रयोगशाला को देख सभी ने तारीफ की थी।
मंजू वर्मा (Manju Verma) के उत्कृष्ट कार्य के लिए शिक्षक दिवस पर उन्हें राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें पुरस्कार मिलने से सुरसा विकासखंड के ही नहीं बल्कि जिले के सभी शिक्षक शिक्षिकाएं गौरवान्वित हुए। जिस विद्यालय में बाउंड्री न होने से आवारा जानवरों का झुंड घूमा करता था, उस विद्यालय में नक्षत्रशाला व बच्चों को नियमित योग जैसी सुविधाएं देने में प्रधानाध्यापिका मंजू वर्मा (Manju Verma) ने कोई कसार नहीं छोड़ी। यदि शिक्षक चाहे तो संसाधनों की कमी आड़े नहीं आ सकती।
ग्रामीण क्षेत्र में अभिभावक व बच्चों को विद्यालय में जोड़ना कोई मंजू वर्मा (Manju Verma) से सीखे। जो सुविधा इंग्लिश मीडियम स्कूलों में होती है वह सुविधा मंजू के विद्यालय बरहा में है। सरकार ने उनके इस प्रयास को देखकर इन्हें राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया। ऐसे ही अन्य शिक्षकों को भी इनसे प्रेरणा लेकर विद्यालयों को न सिर्फ सुंदर बनाना चाहिए बल्कि ऐसी शिक्षा के प्रति रुचि पैदा करनी चाहिए। जिससे बच्चे नियमित विद्यालय आकर अध्ययन प्राप्त करें और देश व समाज का नाम ऊपर ले जाएं।
वह इस विद्यालय में जब विज्ञान शिक्षिका के रूप में पहुंची थी। तब विद्यालय के छात्र- छात्राएं मूलभूत सुविधाओं से वंचित थे, लेकिन अब वह नियमित योग कराती हैं। प्रत्येक अभिभावक को अभिभावक बैठक में अवश्य बुलाती हैं। अच्छी उपस्थिति पर बच्चों को पुरस्कृत करती हैं। विद्यालय में सभी बच्चों को रोज गायत्री मंत्र का पाठ कराती हैं। विद्यालय में कबड्डी खो-खो हैंडबॉल जैसे खेलों के लिए उन्होंने मैदान का निर्माण कराया।
अपने निजी खर्चे पर माइक लाउडस्पीकर सहित तमाम संसाधन विद्यालय में उपलब्ध कराए। उनके विद्यालय की तमाम विशेषताओं के चलते कई बार जिलाधिकारी द्वारा पुरस्कृत किया गया। उनका विद्यालय जिले के उत्कृष्ट विद्यालयों में गिना जाता है। मिशन शिक्षा संवाद में उन्हें लखनऊ में उत्कर्ष शिक्षिका का पुरस्कार भी मिल चुका है। हमें महिलाओं के पराक्रम को समझने की जरूरत है, जो हमें महिमा की अधिक ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। महिलाओं के सर्वांगीण सशक्तिकरण के लिए ’अमृत काल’ इन्हें समर्पित हो।
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