Lucknow : ऊर्जा संशोधन बिल और बिजली निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल
यह आंदोलन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में चल रहा है। प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने भी समर्थन दिया। सभी जिलों, उत्पादन इकाइयों और परियोजनाओं
लखनऊ में ऊर्जा संशोधन बिल और बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने देशव्यापी हड़ताल के तहत शक्ति भवन मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कर्मचारी जमा हुए और मुख्य गेट बंद कर धरना शुरू किया। पूरे परिसर में आंदोलनकारी कर्मचारियों का कब्जा दिखा।
प्रदर्शन के दौरान "निजीकरण नहीं चलेगा", "जनसेवा है निजीकरण नहीं" और "महंगी बिजली नहीं सहेंगे" जैसे नारे लगाए गए। कर्मचारियों ने कहा कि देशभर में करीब 27 लाख बिजली कर्मचारी और अभियंता इस आंदोलन में एकजुट हैं। केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। उनका कहना है कि निजीकरण से बिजली महंगी होगी और उपभोक्ताओं व कर्मचारियों दोनों को नुकसान होगा।
यह आंदोलन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में चल रहा है। प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने भी समर्थन दिया। सभी जिलों, उत्पादन इकाइयों और परियोजनाओं पर कर्मचारियों ने काम बंद कर विरोध किया। कर्मचारियों ने कहा कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन जारी रहेगा और अगर सरकार नहीं मानी तो इसे और बड़ा बनाया जाएगा।
मुख्य मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, संविदा कर्मचारियों की छंटनी रोकना, निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेना और कर्मचारियों पर हो रही कार्रवाई बंद करना शामिल है। प्रदर्शनकारी पोस्टर और बैनर लेकर सड़कों पर उतरे, जिन पर "निजीकरण से महंगी बिजली", "बिजली जनसेवा है व्यापार नहीं" जैसे संदेश लिखे थे। कई जगहों पर सरकार को चेतावनी देते हुए आंदोलन तेज करने की बात कही गई।
शक्ति भवन के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। हड़ताल से प्रदेश में बिजली सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि जरूरी सेवाएं न्यूनतम स्तर पर चालू रखी गई हैं लेकिन स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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