Delhi Blast : फरीदाबाद में किराए पर लिया था कमरा, बड़ी मात्रा में मिला बम बनाने का सामान, एडवांस रेंट दिया लेकिन वापस नहीं लौटा डॉक्टर मुज़म्मिल
जांच में सामने आया है कि यह कमरा डॉ. मुज़म्मिल ने पिछले कुछ समय से किराए पर लिया था। पुलिस ने कहा है कि उस कमरे का मालिक एक स्थानीय मौलवी (मस्जिद का इ
हरियाणा के फरीदाबाद जिले के धौज-फतेहपुर तगा इलाके में उस कमरे का खुलासा हुआ है जिसे डॉ. मुज़म्मिल शकील (जिसे कुछ स्रोत मुज़म्मिल गनाई या मुज़म्मिल गनाई कह रहे हैं) ने किराए पर लिया था और वहां बड़ी मात्रा में बम बनाने की सामग्री पाई गई है। इस कमरे में एडवांस रेंट दिए जाने के बाद भी डॉ. मुज़म्मिल ने समय पर रेंट वापस नहीं किया था और कमरा किराएदार की नजर में संदिग्ध बन गया था।
पुलिस द्वारा की गई छानबीन में यह जानकारी सामने आई है कि उस रूम में अमोनियम नाइट्रेट जैसे विस्फोटक बनाने वाले रसायन, टाइमर्स, वायरिंग व अन्य बम बनाने के उपकरण रखे हुए थे। इस सामग्री की मात्रा इतनी बड़ी थी कि इसे सिर्फ स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल किए जाने वाला उपकरण नहीं माना जा सकता, बल्कि राजधानी दिल्ली के पास हुए धमाके से इसे जोड़ा जा रहा है।
जांच में सामने आया है कि यह कमरा डॉ. मुज़म्मिल ने पिछले कुछ समय से किराए पर लिया था। पुलिस ने कहा है कि उस कमरे का मालिक एक स्थानीय मौलवी (मस्जिद का इमाम) था जिसने कमरे को किराए पर दिया था। कमरे का स्थान फतेहपुर तगा गाँव में था, जो धौज इलाके के पास है और यह Al‑Falah University के समीप है जहाँ डॉ. मुज़म्मिल कार्यरत थे।
पुलिस ने विवरण देते हुए कहा है कि इस कमरे की रेंट एडवांस में दी गई थी जिसने किराएदारों को पहले ही शक में डाल दिया था। उसके बाद रेंट समय पर वापस नहीं हुआ, जिससे संबंध निर्माण और उपयोग की गुत्थी पकड़ी गई। इस तरह का व्यवहार किराएदार के नजरिए से वैसा था कि साधारण किराएदार नहीं बल्कि किसी विशेष उद्देश्य से कमरा लिया गया हो।
बताया जा रहा है कि इस कमरे में पाए गए रसायन और उपकरण लगभग 2,563 किलो तक थे, जिनमें विशेष रूप से अमोनियम नाइट्रेट की मात्रा उल्लेखनीय थी। इसके साथ ही हथियार, टाइमर्स, सूट-केस, रिमोट कंट्रोल, वायरिंग जैसे बम बनाने के उपकरण भी बरामद हुए।
हालाँकि अभी तक पुलिस ने इस कमरे से सीधे यह नहीं बताया है कि धमाका कहाँ करना था या किस उद्देश्य से यह सामग्री जमा की गई थी, लेकिन शुरुआती जांच में इस बात की संभावना जताई जा रही है कि यह सामग्री लाल किला के पास हुए कार धमाके से जुड़ी हो सकती है।
डॉ. मुज़म्मिल पर यह भी आरोप है कि उन्होंने इस तरह की सामग्री छुपे-छुपे जमा की क्योंकि वे यह जानते थे कि डॉक्टर होने के नाते उन पर शक कम होगा। जांच में यह जानकारी भी आई है कि वे पेशे से डॉक्टर थे और Al-Falah यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे।
इस पूरे प्रकरण ने यह बात उभारी है कि कैसे एक सामान्य-प्रोफेशनल छवि वाला व्यक्ति बेहद खतरनाक कृत्य के पीछे हो सकता है। कमरे के एडवांस रेंट एवं इस्तेमाल की गुत्थी ने सुरक्षा एजेंसियों को यह संकेत दिया कि सरल समीकरण से परे कुछ बहुत बड़े प्रयास चल रहे थे।
फरीदाबाद पुलिस एवं जम्मू-कश्मीर पुलिस इस प्रकरण को एक बड़े आतंकी नेटवर्क का हिस्सा मान रही हैं, जिसमें राज्य-पार, पेशेवर नेटवर्क, उच्च शैक्षणिक संस्थान, और मेडिकल प्रोफेशनल्स शामिल हैं।
अभी आगे की दिशा में क्या-क्या हो रहा है:
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पुलिस इस कमरे और उसमें पाए गए उपकरणों के आगे चलने में प्रयुक्त होने वाले रूट, वित्तीय लेन-देन, सामग्री की आपूर्ति तथा ठिकानों की सूची तैयार कर रही है।
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विश्वविद्यालय परिसर में डॉ. मुज़म्मिल के सहकर्मियों और छात्र-संबंधों की भी जाँच हो रही है ताकि पता चल सके कि किस-किस ने सहायता की थी या जानकारी दी थी।
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इस केस में अन्य डॉक्टरों, पेशेवरों और रेंट-किराएदारों के संबंधों की पड़ताल जारी है।
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विस्फोटक और उपकरण की फोरेंसिक और तकनीकी जाँच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि इन्हें कहां-कैसे इस्तेमाल किया जाना था और उनका मूल स्रोत कौन था।
समय-सापेक्ष यह कहा जा सकता है कि फरीदाबाद में मिले बम निर्माण के कमरे ने एक भयावह साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। एडवांस रेंट और फिर रेंट वापस न करना यह संकेत है कि यह कमरा साधारण उपयोग के लिए नहीं बल्कि विशेष उद्देश्य से लिया गया था। भारत की राजधानी के निकट ऐसा होना सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है।
इस मामले से यह भी बात स्पष्ट हो रही है कि आतंक-साजिश अब बाहरी इलाकों तक सीमित नहीं है बल्कि शहरों-विश्वविद्यालयों-मेडिकल संस्थानों तक फैली हुई है। रेंट-कमरे-रसायन-पेशेवर-नेटवर्क-सब एक संगठित रूप ले चुके हैं। इसलिए सुरक्षा-एजेंसियों को उस दिशा में सतर्क रहना होगा जहां से कम-संदिग्ध प्रोफेशनल भी खतरा बन सकते हैं।
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