Sitapur : संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान पहुंचा अहमदपुर गांव, वैज्ञानिकों ने दी मिट्टी की जांच के आधार पर खेती करने की सलाह

कार्यक्रम की देखरेख और संचालन कृषि विज्ञान केंद्र के मिट्टी वैज्ञानिक सचिन प्रताप तोमर ने किया। उन्होंने किसानों से बातचीत करते हुए कहा कि आज के समय में मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बचाए रखने और लगातार अच्छी पैदावार पाने के लिए संतुलित मात्रा में खादों का इस्तेमाल कर

By INA News Desk
May 16, 2026 - 12:34
22 Views
Sitapur : संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान पहुंचा अहमदपुर गांव, वैज्ञानिकों ने दी मिट्टी की जांच के आधार पर खेती करने की सलाह
Sitapur : संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान पहुंचा अहमदपुर गांव, वैज्ञानिकों ने दी मिट्टी की जांच के आधार पर खेती करने की सलाह

Report : संदीप चौरसिया INA NEWS सीतापुर

भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान के तहत कृषि विज्ञान केंद्र कटिया द्वारा बिसवां विकास खंड के अहमदपुर गांव में एक किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में इकतीस किसानों और महिलाओं ने भाग लिया। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से खेती करने और खादों के सही तालमेल से जुड़ी कई जरूरी जानकारियां सीखीं।

कार्यक्रम की देखरेख और संचालन कृषि विज्ञान केंद्र के मिट्टी वैज्ञानिक सचिन प्रताप तोमर ने किया। उन्होंने किसानों से बातचीत करते हुए कहा कि आज के समय में मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बचाए रखने और लगातार अच्छी पैदावार पाने के लिए संतुलित मात्रा में खादों का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे हमेशा मिट्टी की जांच कराने के बाद ही खेत में खाद डालें। बिना सोचे-समझे ज्यादा रासायनिक खादों का प्रयोग करने से मिट्टी की सेहत खराब हो रही है। उन्होंने जैविक, रासायनिक और नैनो खादों के मिले-जुले इस्तेमाल के बारे में बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खाद डालने पर खेती की लागत कम होती है और पैदावार बढ़ती है। उन्होंने किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड के फायदों के बारे में भी समझाया।

इस मौके पर इफको के प्रतिनिधि विमल वर्मा ने किसानों को नैनो उत्पादों के इस्तेमाल और उनके फायदों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जानकारी दी कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का कम मात्रा में इस्तेमाल भी बहुत असरदार होता है। इससे पारंपरिक रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता। कार्यक्रम में आए किसानों और महिलाओं ने खेती से जुड़ी अपनी कई समस्याएं और सवाल भी सामने रखे, जिनका वैज्ञानिकों ने मौके पर ही जवाब देकर हल निकाला।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow