Gorakhpur : संत कबीर के विचारों और लोक परंपराओं को सहेजने के लिए गोरखपुर में मंथन

अकादमी के निदेशक अतुल द्विवेदी ने बताया कि प्रो. मनोज कुमार तिवारी ने विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को कबीर दर्शन से जोड़ने और सेमिनार आयोजित करने का सुझाव दिया। वहीं डॉ. देवेन्द्र पाल ने कबीर की वाणी और नाथ पंथ जैसे विषयों पर विशेष चर्चा सत्र आयोजित करने की बात क

May 8, 2026 - 23:40
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Gorakhpur : संत कबीर के विचारों और लोक परंपराओं को सहेजने के लिए गोरखपुर में मंथन
Gorakhpur : संत कबीर के विचारों और लोक परंपराओं को सहेजने के लिए गोरखपुर में मंथन

गोरखपुर में संत कबीर अकादमी ने “पंचतत्व योजना” के तहत महान संत कबीर के जीवन दर्शन, विचारों और लोक परंपराओं को सुरक्षित रखने और आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में कबीर के दर्शन पर शोध, नई पुस्तकों के प्रकाशन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर कई प्रस्ताव रखे गए।

अकादमी के निदेशक अतुल द्विवेदी ने बताया कि प्रो. मनोज कुमार तिवारी ने विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को कबीर दर्शन से जोड़ने और सेमिनार आयोजित करने का सुझाव दिया। वहीं डॉ. देवेन्द्र पाल ने कबीर की वाणी और नाथ पंथ जैसे विषयों पर विशेष चर्चा सत्र आयोजित करने की बात कही। प्रो. उषा सिंह ने कला और संस्कृति से जुड़ी कार्यशालाओं पर जोर दिया, जबकि प्रो. अनुराग द्विवेदी ने अकादमी की पत्रिका का नाम “कबीर पंचामृत” रखने और इसे हर छह महीने में प्रकाशित करने का विचार दिया।

बैठक के दौरान दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने दीक्षांत समारोह में शेखर सेन के सांस्कृतिक कार्यक्रम और आमी नदी पर शोध कराने का सुझाव दिया। निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय के सहयोग से कबीर से जुड़े विभिन्न विषयों पर गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य कराया जाएगा। अकादमी ने साल भर चित्रकला प्रतियोगिताओं, कार्यशालाओं और करीब 20 पुस्तकों के प्रकाशन की योजना पर भी सहमति जताई। सभी वक्ताओं ने कबीर की शिक्षाओं और मानवीय मूल्यों को समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचाने का संकल्प लिया।

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