Lucknow : गांव-गांव तक पहुंचेगा कौशल विकास अभियान, महिलाओं,  दिव्यांगों और जीरो पॉवर्टी युवाओं पर विशेष फोकस

बैठक में महिलाओं, दिव्यांगजनों और जीरो पॉवर्टी श्रेणी के युवाओं के प्रशिक्षण के लिए इनरोलमेंट को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। मिशन निदेशक ने कहा कि ऐसे युवाओं तक पहुंच बनाना केवल PIA की नहीं, बल्कि जिला प्रशासन और मिशन टीम की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने BDO और ग्राम

May 8, 2026 - 23:42
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Lucknow : गांव-गांव तक पहुंचेगा कौशल विकास अभियान, महिलाओं,  दिव्यांगों और जीरो पॉवर्टी युवाओं पर विशेष फोकस
Lucknow : गांव-गांव तक पहुंचेगा कौशल विकास अभियान, महिलाओं,  दिव्यांगों और जीरो पॉवर्टी युवाओं पर विशेष फोकस

  • मिशन निदेशक पुलकित खरे ने आगरा में परखी कौशल विकास की रफ्तार, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी 
  • आगरा, मथुरा, मैनपुरी और फिरोजाबाद के जिला समन्वयकों (DCs) और MIS प्रबंधकों के साथ की समीक्षा बैठक 
  • DDU-GKY, SSDF और प्रोजेक्ट प्रवीण की समीक्षा, मिशन निदेशक ने दिए पारदर्शिता और गुणवत्ता के कड़े निर्देश 
  •  युवाओं की क्वालिटी ट्रेनिंग पर फोकस, फर्जी ट्रेनिंग पार्टनर्स पर मिशन निदेशक का सख्त एक्शन

आगरा / लखनऊ : उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा संचालित ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’, SSDF, DDU-GKY और ‘जीरो पॉवर्टी’ अभियान के प्रभावी संचालन को लेकर शुक्रवार को मिशन निदेशक पुलकित खरे ने आगरा मंडल के जनपदों (आगरा, मथुरा, मैनपुरी और फिरोजाबाद) के जिला समन्वयकों (DCs) और MIS प्रबंधकों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रशिक्षण की गुणवत्ता, निरीक्षण व्यवस्था, नामांकन, प्लेसमेंट और पारदर्शिता जैसे प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। मिशन निदेशक ने स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ना है।

मिशन निदेशक ने बताया कि  ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के बजट को 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपए कर दिया गया है।  नई शिक्षा नीति में कक्षा 6 से व्यावसायिक शिक्षा का प्रावधान होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में इसे प्रभावी रूप से कक्षा 9 और 11 में लागू किया गया है, ताकि एकेडमिक सत्र के भीतर प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से पूरा किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी ट्रेड - जैसे मेकअप, आईटी या डेयरी फार्मिंग  का चयन ट्रेनिंग पार्टनर्स (TPs) के दबाव में नहीं, बल्कि छात्रों की रुचि और स्थानीय सर्वे के आधार पर किया जाए।

पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से निदेशक ने ‘कौशल दृष्टि’ पोर्टल के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिए कि 1 अप्रैल से केवल वही निरीक्षण मान्य होंगे, जिन्हें पोर्टल पर फोटो और जियो-टैगिंग के साथ अपलोड किया जाएगा। उन्होंने जिला समन्वयकों (DCs) को सप्ताह में कम से कम एक औचक निरीक्षण अनिवार्य रूप से करने तथा उसकी रिपोर्ट ‘कौशल दृष्टि’ पोर्टल के माध्यम से भेजने के निर्देश दिए। साथ ही, निरीक्षण कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने की चेतावनी भी दी गई।

निदेशक ने समयबद्धता और पारदर्शिता पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि SSDF (राज्य कौशल विकास निधि) योजना के अंतर्गत 11 मई तक सभी प्रशिक्षण केंद्रों पर बैच प्रारंभ कर दिए जाएं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अप्रूवल प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि जनपदवार समीक्षा के माध्यम से यह देखा जाएगा कि कितने दिव्यांगजन, महिलाएं और जीरो पॉवर्टी श्रेणी के युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले टॉप 10 जिलों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि DDU-GKY के अंतर्गत आने वाले समय में मंत्रालय से जल्द धनराशि मिलने की संभावना है, जिसके बाद फिजिकल वेरिफिकेशन और भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फिजिकल वेरिफिकेशन समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से किया जाए। यदि फोन कॉल के माध्यम से सत्यापन संतोषजनक न हो, तो संबंधित अभ्यर्थी के घर जाकर जांच की जाए कि वह वास्तव में कार्यरत है या नहीं। उन्होंने कहा कि कई जिलों में महीनों तक पेंडेंसी रहने से भुगतान प्रक्रिया प्रभावित होती है और मंत्रालय स्तर से दबाव बनता है। इसलिए सभी DCs और DPMs यह सुनिश्चित करें कि तीन दिन के भीतर वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी हो।

मिशन निदेशक ने यह भी कहा कि कई मामलों में बिना सही सत्यापन के फाइलें ‘ओके’ कर भेज दी जाती हैं, जिससे बाद में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोबारा जांच में कोई अभ्यर्थी गलत पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्यापन केवल DPM का कार्य नहीं है, बल्कि DC के नेतृत्व में पूरी टीम - DPM, BPM और MIS -की संयुक्त जिम्मेदारी है।

बैठक में महिलाओं, दिव्यांगजनों और जीरो पॉवर्टी श्रेणी के युवाओं के प्रशिक्षण के लिए इनरोलमेंट को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। मिशन निदेशक ने कहा कि ऐसे युवाओं तक पहुंच बनाना केवल PIA की नहीं, बल्कि जिला प्रशासन और मिशन टीम की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने BDO और ग्राम प्रधानों के माध्यम से गांव स्तर तक संपर्क स्थापित करने और जरूरतमंद युवाओं को प्रशिक्षण केंद्रों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में जीरो पॉवर्टी श्रेणी का नामांकन मात्र 0.1 प्रतिशत था, जिसे अब बढ़ाकर 1.8 प्रतिशत किया गया है। लक्ष्य इसे 3 से 5 प्रतिशत तक पहुंचाने का है।

इसके लिए जीरो पॉवर्टी सूची और दिव्यांगजनों के डेटा का उपयोग करते हुए नजदीकी गांवों के युवाओं को प्रशिक्षण केंद्रों से जोड़ने के निर्देश दिए गए। बैठक में ‘कौशल पंजी’ पोर्टल का भी उल्लेख किया गया, जहां युवा स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। NIC से प्राप्त डेटा जिला स्तर पर साझा किया जाएगा ताकि ऐसे युवाओं को उनके नजदीकी प्रशिक्षण केंद्रों से जोड़ा जा सके।

मिशन निदेशक ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में करीब 400 फर्जी और निष्क्रिय ट्रेनिंग पार्टनर्स को डी-एम्पैनल कर सिस्टम से बाहर किया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसी भी ट्रेनिंग पार्टनर के दबाव में न आएं और यदि कोई TP केवल आर्थिक लाभ के उद्देश्य से गलत तरीके से बैच संचालित कर रहा है या उसकी लैब निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, तो उसे तत्काल हटाने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जिन बैचों का प्रशिक्षण पूरा होने वाला है, उनके लिए अभी से प्लेसमेंट प्लान तैयार किया जाए। साथ ही, वोकेशनल कक्षाएं स्कूल समय के बाद संचालित करने पर जोर दिया ताकि विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो।

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