पश्चिम बंगाल के आसनसोल में लाउडस्पीकर के विवाद को लेकर भारी बवाल, हिंसक भीड़ ने पुलिस चौकी को बनाया निशाना

पश्चिम बंगाल के औद्योगिक और कोयलांचल क्षेत्र के रूप में विख्यात अंडीपार आसनसोल से एक बेहद चिंताजनक और

By INA News Desk
May 16, 2026 - 13:37
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पश्चिम बंगाल के आसनसोल में लाउडस्पीकर के विवाद को लेकर भारी बवाल, हिंसक भीड़ ने पुलिस चौकी को बनाया निशाना
पश्चिम बंगाल के आसनसोल में लाउडस्पीकर के विवाद को लेकर भारी बवाल, हिंसक भीड़ ने पुलिस चौकी को बनाया निशाना
  • धार्मिक स्थल पर लाउडस्पीकर बजाने पर टोकना पुलिस को पड़ा भारी, आक्रोशित उपद्रवियों ने किया पथराव और तोड़फोड़
  • इलाके में तनाव के बाद भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स तैनात, उपद्रवियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी तेज

पश्चिम बंगाल के औद्योगिक और कोयलांचल क्षेत्र के रूप में विख्यात अंडीपार आसनसोल से एक बेहद चिंताजनक और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के एक स्थानीय इलाके में स्थित पुलिस चौकी पर अचानक एक हिंसक और अनियंत्रित भीड़ ने धावा बोल दिया और जमकर हंगामा किया। इस पूरे उपद्रव की शुरुआत एक बेहद मामूली बात यानी लाउडस्पीकर बजाने के विवाद से शुरू हुई थी, जिसने देखते ही देखते एक बड़े प्रशासनिक संकट का रूप ले लिया। स्थिति उस समय नियंत्रण से बाहर हो गई जब कानून का पालन कराने गई पुलिस टीम को ही उपद्रवियों ने अपना मुख्य निशाना बना लिया। इस अप्रत्याशित हमले में पुलिस चौकी के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और सरकारी संपत्ति की बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की गई है। इस घटना के बाद से पूरे आसनसोल और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षात्मक माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है।

इस पूरे घटनाक्रम के विस्तृत विवरण और पुलिस से प्राप्त प्राथमिक जानकारियों के अनुसार, विवाद की शुरुआत एक धार्मिक स्थल या सार्वजनिक स्थान पर तेज आवाज में बज रहे लाउडस्पीकर को लेकर हुई थी। स्थानीय प्रशासन और न्यायालय द्वारा ध्वनि प्रदूषण को लेकर जारी किए गए कड़े दिशा-निर्देशों के तहत, पुलिस की एक नियमित गश्त टीम ने देर रात तक तेज आवाज में बज रहे लाउडस्पीकर को बंद करने या उसकी आवाज धीमी करने का निर्देश दिया था। पुलिस की इस न्यायसंगत और वैधानिक कार्रवाई को कुछ स्थानीय असामाजिक तत्वों ने अपनी धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आघात मान लिया। इसके बाद उन तत्वों ने भड़काऊ बातें फैलाकर देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में लोगों को सड़कों पर इकट्ठा कर लिया। यह उत्तेजित भीड़ सीधे स्थानीय पुलिस चौकी की तरफ बढ़ी और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ तीखी बहस और धक्का-मुक्की शुरू कर दी। पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान लाउडस्पीकर की आवाज और उनके उपयोग के समय को लेकर अक्सर स्थानीय स्तर पर टकराव की स्थितियां बनती रही हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन कराना स्थानीय पुलिस प्रशासन के लिए हमेशा से एक बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील कार्य रहा है, जहां एक छोटी सी प्रशासनिक कड़ाई भी बड़े सामुदायिक असंतोष में बदल जाती है।

पुलिस चौकी के बाहर जमा हुई यह भीड़ देखते ही देखते हिंसक हो उठी और उसने कानून को पूरी तरह से अपने हाथ में ले लिया। उपद्रवियों ने पुलिस चौकी के परिसर पर चारों तरफ से पथराव करना शुरू कर दिया, जिससे खिड़कियों के शीशे टूट गए और वहां खड़े पुलिस के वाहनों को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। जब भीतर मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्थिति को संभालने और भीड़ को खदेड़ने का प्रयास किया, तो उन पर लाठियों और बोतलों से भी हमला किया गया। इस अचानक हुए चौतरफा हमले के कारण पुलिस चौकी में तैनात सुरक्षाकर्मियों को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। उपद्रवियों का दुस्साहस इतना बढ़ गया था कि उन्होंने सरकारी दस्तावेजों को नुकसान पहुंचाने और बैरिकेड्स को उखाड़कर फेंकने का प्रयास किया, जिससे पूरा इलाका कुछ समय के लिए पूरी तरह से प्रशासनिक नियंत्रण से बाहर नजर आने लगा था।

आसनसोल के इस संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस चौकी पर हमले और भारी उपद्रव की सूचना जैसे ही जिला पुलिस मुख्यालय और वरिष्ठ अधिकारियों को मिली, वैसे ही पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के आला अधिकारी भारी पुलिस बल, दंगा नियंत्रण वाहनों और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की कई टुकड़ियों के साथ तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे। सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभालते हुए सबसे पहले हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। पुलिस की इस त्वरित और कड़ी जवाबी कार्रवाई के बाद उपद्रवी गलियों में भाग खड़े हुए। पूरे इलाके को तुरंत पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया और स्थिति को दोबारा नियंत्रण में लिया गया, लेकिन बाजार और आसपास की दुकानें डर के मारे पूरी तरह बंद हो गईं।

घटना के बाद स्थानीय जिला प्रशासन और पुलिस कप्तानों ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए उपद्रवियों के खिलाफ एक बड़ा तलाशी अभियान (कॉम्बिंग ऑपरेशन) शुरू कर दिया है। पुलिस चौकी और आसपास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि उन मुख्य चेहरों और दंगाइयों की पहचान की जा सके जिन्होंने भीड़ को उकसाने और पथराव करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस मामले में कई अज्ञात और नामजद लोगों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने, लोक सेवकों पर जानलेवा हमला करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। रात भर चली छापेमारी में पुलिस ने दर्जन भर से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में भी लिया है जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है।

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