RSS कार्यालयों की रेकी कर दहलाने की थी साजिश, पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर रची गई खौफनाक योजना।

उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए देश विरोधी बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया

May 15, 2026 - 12:17
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RSS कार्यालयों की रेकी कर दहलाने की थी साजिश, पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर रची गई खौफनाक योजना।
RSS कार्यालयों की रेकी कर दहलाने की थी साजिश, पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर रची गई खौफनाक योजना।
  • आतंकी पूछताछ में बाराबंकी और कुशीनगर कनेक्शन का पर्दाफाश, सुरक्षा एजेंसियों ने तेज की स्लीपर सेल की तलाश
  • लखनऊ से दिल्ली तक आतंकी नेटवर्क का जाल, अत्याधुनिक हथियारों और हैंड ग्रेनेड से हमले की तैयारी में थे हमलावर

उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए देश विरोधी बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। पकड़े गए आतंकियों ने पूछताछ में जो खुलासे किए हैं, वे सुरक्षा तंत्र के लिए गहरी चिंता का विषय बन गए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक इकाई ने हाल ही में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिन्होंने पूछताछ के दौरान बेहद चौंकाने वाली जानकारियां साझा की हैं। इन पकड़े गए व्यक्तियों ने स्वीकार किया है कि उनके निशाने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख कार्यालय और महत्वपूर्ण पदाधिकारी थे। साजिश के तहत न केवल लखनऊ स्थित प्रांतीय कार्यालय, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली स्थित संघ के महत्वपूर्ण ठिकानों की भी विस्तृत रेकी की गई थी। पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है कि ये आतंकी अपने विदेशी आकाओं के सीधे संपर्क में थे और उन्हें इन संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें और वीडियो फुटेज उपलब्ध करा रहे थे।

पकड़े गए आतंकियों की पहचान दानियाल अशरफ, कृष्णा मिश्रा, तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्ला और समीर खान के रूप में हुई है। इन आरोपियों ने सुरक्षा एजेंसियों को बताया कि उन्हें पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंटों द्वारा संचालित किया जा रहा था। उन्हें निर्देश दिए गए थे कि वे उन स्थानों का चयन करें जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं और सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाई जा सकती है। आरोपियों ने लखनऊ और दिल्ली के कई इलाकों में घूम-घूम कर संघ के कार्यालयों के आसपास के रास्तों, निकास द्वारों और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों की गतिविधियों की पूरी जानकारी जुटाई थी, ताकि सही समय पर घातक हमले को अंजाम दिया जा सके। जांच प्रक्रिया के दौरान आरोपियों ने बाराबंकी और कुशीनगर के कई स्थानीय युवकों के नामों का उल्लेख किया है, जो इस नेटवर्क के साथ किसी न किसी रूप में जुड़े हुए थे। कुशीनगर से पकड़े गए संदिग्ध रिजवान अहमद और अन्य सहयोगियों के माध्यम से यह पता चला है कि कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय स्तर पर युवाओं को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा था। इन युवकों को सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों जैसे टेलीग्राम, सिग्नल और इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से जोड़ा गया था। यह नेटवर्क बाराबंकी और कुशीनगर जैसे जिलों में अपनी जड़ें जमा रहा था, ताकि स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक सहायता और स्लीपर सेल तैयार किए जा सकें। सुरक्षा एजेंसियों को इन आतंकियों के पास से बम बनाने की ऑनलाइन ट्रेनिंग सामग्री, जिहादी साहित्य और संवेदनशील इलाकों के डिजिटल मैप बरामद हुए हैं। आरोपियों ने पुलिसकर्मियों और थानों पर हैंड ग्रेनेड से हमला करने की विशेष ट्रेनिंग भी प्राप्त की थी।

आतंकियों की इस योजना में अत्याधुनिक हथियारों का उपयोग करने की तैयारी थी। पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि उन्हें पाकिस्तान से एके-47 राइफलें और हैंड ग्रेनेड उपलब्ध कराए जाने का आश्वासन दिया गया था। हमले का मुख्य उद्देश्य वीआईपी हस्तियों को निशाना बनाना और सरकारी प्रतिष्ठानों में दहशत फैलाना था। आरोपियों ने यह भी कबूल किया कि वे वर्दीधारी सुरक्षाकर्मियों की हत्या करके समाज में भय का माहौल पैदा करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने बाकायदा "वर्दीधारियों पर प्रहार" नामक एक रणनीति तैयार की थी, जिसके तहत पुलिस थानों और सुरक्षा चौकियों पर ग्रेनेड हमले करने की योजना थी। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में फैले इस नेटवर्क की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आतंकी पिछले कई महीनों से चुपचाप अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। बाराबंकी और कुशीनगर के जिन युवकों के नाम सामने आए हैं, उनमें से कुछ तकनीकी रूप से काफी सक्षम हैं और वे इंक्रिप्टेड कम्युनिकेशन के जरिए विदेशी संपर्कों को बनाए रखने में मदद कर रहे थे। सुरक्षा एजेंसियां अब इन जिलों में छापेमारी कर रही हैं ताकि उन सभी कड़ियों को जोड़ा जा सके जो सीधे तौर पर इन आतंकियों को आर्थिक सहायता या छिपने के ठिकाने उपलब्ध करा रही थीं। इस पूरे ऑपरेशन में कई ऐसे मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस मिले हैं जो सीधे तौर पर पड़ोसी देश की सीमा के पार से संचालित हो रहे थे।

पकड़े गए आतंकियों ने यह भी स्वीकार किया है कि उन्हें बड़े शहरों में आतंकी फैक्ट्री चलाने और मुनीर ब्रिगेड जैसे आतंकी गुटों के लिए काम करने का लालच दिया गया था। उन्हें भारी मात्रा में धन का प्रलोभन देकर इस रास्ते पर लाया गया था। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों की योजना नहीं थी, बल्कि एक सुव्यवस्थित नेटवर्क था जो भारत की आंतरिक सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए डिजाइन किया गया था। इन आतंकियों के डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से पता चला है कि वे कई ऐसे समूहों का हिस्सा थे जहां विस्फोटक बनाने और उन्हें छुपाने के तरीके सिखाए जाते थे। सुरक्षा तंत्र ने इस खुलासे के बाद लखनऊ, दिल्ली, बाराबंकी और कुशीनगर सहित राज्य के तमाम संवेदनशील इलाकों में चौकसी बढ़ा दी है। विशेष रूप से संघ के कार्यालयों और महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों की सुरक्षा घेराबंदी को और अधिक सख्त कर दिया गया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से बरामद इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कॉल रिकॉर्ड्स के आधार पर आगे की धरपकड़ की जा रही है। जांच एजेंसियां इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं कि सीमा पार से आ रहे निर्देशों को स्थानीय स्तर पर जमीन पर उतारने वाले मुख्य सूत्रधार कौन हैं। अब तक की जांच में यह साफ हो चुका है कि इस साजिश के तार बहुत गहरे हैं और इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर जनहानि पहुंचाना था।

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