संवेदनहीनता की हद: मासूम छात्रा ने की उल्टी तो मां से साफ करवाया फर्श, बच्ची को घंटों धूप में खड़ा रखा।

उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ में शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं

May 15, 2026 - 12:14
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संवेदनहीनता की हद: मासूम छात्रा ने की उल्टी तो मां से साफ करवाया फर्श, बच्ची को घंटों धूप में खड़ा रखा।
संवेदनहीनता की हद: मासूम छात्रा ने की उल्टी तो मां से साफ करवाया फर्श, बच्ची को घंटों धूप में खड़ा रखा।
  • दो घंटे तक चिलचिलाती धूप में मासूम बच्ची को दी गई सजा, हापुड़ के निजी स्कूल की शिक्षिका पर गंभीर आरोप
  • अभिभावकों का फूटा गुस्सा, शिक्षा विभाग ने जांच के बाद स्कूल प्रबंधन के खिलाफ की कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी

उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ में शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। एक निजी स्कूल में मासूम छात्रा के साथ हुए अमानवीय व्यवहार ने न केवल अभिभावकों के गुस्से को भड़का दिया है, बल्कि प्रशासन को भी सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा है। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित एक निजी स्कूल से मानवता को शर्मसार करने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहाँ नर्सरी कक्षा में पढ़ने वाली एक चार वर्षीय मासूम बच्ची की तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसके कारण उसने क्लास के भीतर ही उल्टी कर दी। एक छोटे बच्चे की शारीरिक अस्वस्थता पर सहानुभूति दिखाने और उसे प्राथमिक उपचार देने के बजाय, स्कूल की शिक्षिका ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं। शिक्षिका ने तुरंत बच्ची की माँ को फोन करके स्कूल बुलाया। जब पीड़ित माँ स्कूल पहुंची, तो उसे उम्मीद थी कि उसे अपनी बीमार बच्ची की देखभाल करने को कहा जाएगा, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उनके हाथ में पोछा और बाल्टी थमा दी।

इस हृदयविदारक घटना में शिक्षिका ने छात्रा की माँ पर दबाव बनाया कि वे खुद अपनी बेटी द्वारा की गई गंदगी को साफ करें। डरी-सहमी और अपनी बच्ची के भविष्य को लेकर चिंतित माँ ने मजबूरी में स्कूल के फर्श को साफ किया। कक्षा के अन्य बच्चों और कर्मचारियों के सामने एक माँ को इस तरह अपमानित करना यह दर्शाता है कि निजी शिक्षण संस्थानों में किस कदर मानवीय मूल्यों का ह्रास हो रहा है। घटना के दौरान स्कूल प्रबंधन का रवैया पूरी तरह से असहयोगात्मक और कठोर बना रहा। अपमान का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका, बल्कि स्कूल ने उस मासूम बच्ची को भी नहीं बख्शा जिसकी तबीयत खराब थी। फर्श साफ करवाने के बाद, सजा के तौर पर उस चार साल की बच्ची को क्लास से बाहर निकाल दिया गया। बताया जा रहा है कि लगभग दो घंटे तक उस मासूम को तपती धूप में स्कूल परिसर के भीतर खड़ा रखा गया। गर्मी और बीमारी के कारण बच्ची की हालत और अधिक बिगड़ गई, लेकिन स्कूल के किसी भी स्टाफ सदस्य का दिल नहीं पसीजा। एक तरफ सरकार बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रेमपूर्ण वातावरण की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की घटनाएं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा आघात पहुंचा रही हैं।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नियमों के अनुसार, किसी भी बच्चे को शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना देना कानूनन अपराध है। स्कूल परिसर में अभिभावकों के साथ दुर्व्यवहार और बच्चों को धूप में खड़ा करना 'राइट टू एजुकेशन' और 'जुवेनाइल जस्टिस एक्ट' की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर दंड का प्रावधान रखता है। जब यह मामला स्थानीय लोगों और अन्य अभिभावकों के संज्ञान में आया, तो स्कूल के बाहर भारी हंगामा शुरू हो गया। लोग स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और आरोपी शिक्षिका को तत्काल बर्खास्त करने की मांग करने लगे। पीड़ित परिवार ने इस संबंध में शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि स्कूल के प्रधानाचार्य और शिक्षिका ने जानबूझकर उन्हें नीचा दिखाने के लिए यह कृत्य किया। पुलिस ने प्राथमिक जांच शुरू कर दी है और स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की बात कही है ताकि घटना की सच्चाई की पुष्टि की जा सके।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच समिति का गठन किया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शिक्षण संस्थान को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी बच्चे या उसके अभिभावक के साथ इस तरह का अमर्यादित व्यवहार करे। स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और पूछा गया है कि उनकी मान्यता रद्द क्यों न कर दी जाए। प्रारंभिक रिपोर्ट में स्कूल की घोर लापरवाही सामने आई है। यह भी पता चला है कि स्कूल में बच्चों की सेहत के लिए कोई बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं या आया की व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण सफाई का काम सीधे अभिभावक पर डाल दिया गया। समाज के विभिन्न वर्गों में इस घटना को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। लोगों का मानना है कि यदि स्कूलों में ही बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो वे समाज से किस तरह की संवेदनशीलता की उम्मीद करेंगे। बीमार बच्चे को धूप में खड़ा करना जानलेवा साबित हो सकता था। इस घटना ने एक बार फिर निजी स्कूलों की मनमानी और उन पर नियंत्रण की कमी के मुद्दे को गरमा दिया है। लोगों की मांग है कि न केवल शिक्षिका, बल्कि स्कूल के मालिक पर भी मुकदमा दर्ज होना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी संस्थान इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके।

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