तीन बेगुनाहों की जान लेने वाले सीरियल किलर का खूनी खेल खत्म, पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ पूर्व फौजी गुरुप्रीत सिंह

पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने इस एनकाउंटर की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी गुरुप्रीत सिंह मूल रूप से पंजाब के अमृतसर का निवासी था और वह पूर्व में भारतीय सेना में सेवा दे चुका था। गिरफ्तारी के बाद हुई प्रारंभिक पूछताछ

May 12, 2026 - 09:29
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तीन बेगुनाहों की जान लेने वाले सीरियल किलर का खूनी खेल खत्म, पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ पूर्व फौजी गुरुप्रीत सिंह
तीन बेगुनाहों की जान लेने वाले सीरियल किलर का खूनी खेल खत्म, पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ पूर्व फौजी गुरुप्रीत सिंह

  • 24 घंटे में तीन बेगुनाहों की जान लेने वाला हत्यारा मुठभेड़ में मारा गया, सीन रिक्रिएशन के दौरान पिस्टल छीनकर हुआ था फरार
  • अमृतसर के रहने वाले सनकी किलर ने ट्रेन और अस्पताल में मचाया था कोहराम, मुठभेड़ में दारोगा और हेड कांस्टेबल भी घायल

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में पिछले 48 घंटों से दहशत का पर्याय बना सीरियल किलर गुरुप्रीत सिंह आखिरकार पुलिस मुठभेड़ में मारा गया है। सोमवार की देर रात जब चंदौली पुलिस और राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) की संयुक्त टीम उसे साक्ष्य संकलन और घटनास्थल का निरीक्षण कराने के लिए सकलडीहा रेलवे लाइन के पास ले गई थी, तब उसने भागने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, मौका पाकर बदमाश ने एक पुलिसकर्मी की सरकारी पिस्टल छीन ली और अंधाधुंध फायरिंग करते हुए झाड़ियों की तरफ भागने लगा। आत्मरक्षार्थ पुलिस की ओर से की गई जवाबी फायरिंग में गुरुप्रीत गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मुठभेड़ में जीआरपी के हेड कांस्टेबल मनोज यादव और अलीनगर थाने के उपनिरीक्षक सतीश सिंह भी गोली लगने से घायल हुए हैं, जिनका उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने इस एनकाउंटर की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी गुरुप्रीत सिंह मूल रूप से पंजाब के अमृतसर का निवासी था और वह पूर्व में भारतीय सेना में सेवा दे चुका था। गिरफ्तारी के बाद हुई प्रारंभिक पूछताछ में उसने स्वीकार किया था कि चंदौली और रेलवे क्षेत्र में हुई तीनों हत्याओं को उसी ने अंजाम दिया था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि तीनों अपराध स्थलों पर उसके मोबाइल फोन की लोकेशन सक्रिय मिली थी, जो उसके खिलाफ सबसे बड़ा तकनीकी सबूत था। एनकाउंटर के बाद पुलिस ने उसके कब्जे से एक रिवाल्वर, एक डबल बैरल बंदूक और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए हैं। पूर्व फौजी होने के कारण वह हथियारों को चलाने में बेहद माहिर था, जिसकी वजह से उसने बेहद कम समय में तीन अलग-अलग स्थानों पर वारदातों को अंजाम दिया।

इस खूनी तांडव की शुरुआत रविवार सुबह हुई, जब गुरुप्रीत ने डीडीयू-ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन को अपना निशाना बनाया। उसने ट्रेन के भीतर गाजीपुर के रहने वाले श्रमिक मंगरू चौधरी के पास पहुंचकर बिना किसी विवाद के उनकी कनपटी पर सटाकर गोली मार दी। गोली लगने से मंगरू की मौके पर ही मौत हो गई, जिसके बाद बेरहम हत्यारे ने शव को चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद जैसे ही ट्रेन की रफ्तार थोड़ी कम हुई, वह कूदकर फरार हो गया। इस पहली घटना ने जीआरपी और स्थानीय पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए थे, लेकिन पुलिस जब तक उसे ट्रेस कर पाती, उसने दूसरी बड़ी वारदात की योजना तैयार कर ली थी। रविवार की ही रात गुरुप्रीत ने कोलकाता-जम्मूतवी एक्सप्रेस (13151) में मौत का तांडव मचाया। ट्रेन जब रात करीब 1.35 बजे डीडीयू जंक्शन से आगे बढ़ी, तभी एस-2 बोगी में सफर कर रहे गया निवासी विनेश साव अपनी सीट से उठकर बाथरूम की ओर जा रहे थे। ब्लॉक हट-बी के पास पहुंचते ही गुरुप्रीत ने विनेश के सिर में बिल्कुल नजदीक से गोली मार दी। विनेश अपनी बहन, दो मासूम बच्चों और बुजुर्ग सास के साथ धार्मिक यात्रा पर जा रहे थे। इस अचानक हुई हत्या से ट्रेन के भीतर चीख-पुकार मच गई, जिसका फायदा उठाकर आरोपी अंधेरे में ट्रेन से उतरकर भाग निकला। दो लगातार हत्याओं के बाद पूरे रेल मंडल में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था, लेकिन सनकी किलर का जुनून अभी शांत नहीं हुआ था।

हत्यारे का आपराधिक प्रोफाइल और बरामदगी

पुलिस के अनुसार गुरुप्रीत सिंह अमृतसर का रहने वाला था और वह 29 अप्रैल को बिहार के आरा जिले में एक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के लिए आया था। उसने 9 मई को अपनी नौकरी छोड़ दी थी और तब से वह डीडीयू जंक्शन के आसपास संदिग्ध रूप से घूम रहा था। मुठभेड़ स्थल से पुलिस को उसकी पुरानी सर्विस हिस्ट्री से जुड़े कुछ दस्तावेज और भारी मात्रा में गोला-बारूद मिला है, जिससे अंदेशा होता है कि वह किसी और बड़ी घटना की फिराक में था।

सोमवार सुबह करीब साढ़े छह बजे इस सीरियल किलर ने अलीनगर के कमलापुर स्थित जीवक अस्पताल में घुसकर तीसरी हत्या की। उसने अस्पताल में वीरेंद्र कुमार के नाम से ब्लड प्रेशर चेक कराने की पर्ची बनवाई ताकि वह अंदर तक प्रवेश कर सके। वार्ड में पहुंचकर उसने वहां भर्ती भभुआ की रहने वाली लक्ष्मीना देवी को निशाना बनाया और उनके सिर में गोली मार दी। हालांकि, इस बार उसकी किस्मत ने साथ नहीं दिया। अस्पताल के वार्ड ब्वाय किशन ने अदम्य साहस दिखाते हुए उसका पीछा किया और शोर मचाया। शोर सुनकर हथेरवा गांव के पास ग्रामीणों ने उसे घेर लिया और जमकर पिटाई करने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया। ग्रामीणों की मुस्तैदी से वह पकड़ा तो गया, लेकिन पुलिस रिमांड के दौरान भागने की कोशिश उसकी मौत का कारण बनी। प्रशासनिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि गुरुप्रीत का व्यवहार बेहद आक्रामक और असामान्य था। पूर्व सैनिक होने के नाते उसे भौगोलिक परिस्थितियों और तकनीकी बारीकियों की जानकारी थी, जिसका इस्तेमाल उसने अपराध के बाद छिपने के लिए किया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि वह लगातार अपनी पहचान बदल रहा था और अलग-अलग नामों से पर्चियां बनवा रहा था। उसके पास से बरामद डबल बैरल बंदूक और कारतूसों के स्रोत की जांच अभी की जा रही है। अलीनगर पुलिस और जीआरपी ने इस मामले में हत्या, सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस पर हमला करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।

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