Special : सत्ता के गलियारों में 'भगवा रंग की गूंज', क्या बंगाल में भी लागू होने जा रहा है 'योगी मॉडल'

प्रशासनिक स्तर पर सुवेंदु सरकार ने पहले ही दिन से सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने पदभार संभालते ही राज्य की कानून-व्यवस्था की समीक्षा की और भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने का निर्देश दिया। नबन्ना में उनके प्रवेश के समय हुए भव्य स्वागत

May 12, 2026 - 09:25
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Special : सत्ता के गलियारों में 'भगवा रंग की गूंज', क्या बंगाल में भी लागू होने जा रहा है 'योगी मॉडल'
Special : सत्ता के गलियारों में 'भगवा रंग की गूंज', क्या बंगाल में भी लागू होने जा रहा है 'योगी मॉडल'
  • पश्चिम बंगाल में 'परिवर्तन' का नया अध्याय, नबन्ना में सुवेंदु अधिकारी ने संभाली राज्य की कमान
  • सुवेंदु सरकार का मिशन 'सोनार बांग्ला', नबन्ना के प्रशासनिक ढांचे में बड़े फेरबदल और नए संकल्पों का आगाज

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में 9 मई 2026 की तारीख एक बड़े वैचारिक और प्रशासनिक मोड़ के रूप में दर्ज हो गई है। राज्य के प्रशासनिक मुख्यालय 'नबन्ना' में जब नवनियुक्त मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपना कार्यभार संभाला, तो वहां का नजारा पूरी तरह बदला हुआ था। उनके कार्यालय में भगवा रंग के प्रतीक और विशेष रूप से तैयार 'आसन' (कुर्सी) ने न केवल सत्ता के हस्तांतरण को दर्शाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि अब राज्य की नीतियां और कार्यसंस्कृति एक नई दिशा की ओर अग्रसर हैं। नबन्ना, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक प्रभाव का केंद्र था, अब भारतीय जनता पार्टी के 'सबका साथ, सबका विकास' और 'सोनार बांग्ला' के संकल्प का साक्षी बन रहा है। मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के तुरंत बाद सुवेंदु अधिकारी ने नबन्ना में अधिकारियों के साथ अपनी पहली औपचारिक बैठक की। इस बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। सचिवालय के 14वें तल पर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में हुए बदलावों ने यह रेखांकित किया है कि सरकार अब राज्य की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को शासन व्यवस्था के साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है। सुवेंदु अधिकारी द्वारा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने का वह पल न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि थी, बल्कि उन लाखों समर्थकों के लिए एक बड़े राजनीतिक संदेश का वाहक भी था जिन्होंने इस परिवर्तन के लिए लंबा संघर्ष किया।

प्रशासनिक स्तर पर सुवेंदु सरकार ने पहले ही दिन से सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने पदभार संभालते ही राज्य की कानून-व्यवस्था की समीक्षा की और भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने का निर्देश दिया। नबन्ना में उनके प्रवेश के समय हुए भव्य स्वागत और मंत्रोच्चार के बीच जिस तरह से प्रशासनिक कार्यों की शुरुआत हुई, उसने यह संकेत दे दिया कि आने वाले दिनों में बंगाल की नौकरशाही में बड़े स्तर पर 'क्लीनअप ऑपरेशन' देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि अब राज्य में 'सिंडिकेट राज' और 'कट मनी' जैसी कुरीतियों के लिए कोई जगह नहीं होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। सत्ता में आए इस बड़े बदलाव के साथ ही नबन्ना के भीतर की कार्यप्रणाली में भी बदलाव के स्वर सुनाई देने लगे हैं। नए मुख्यमंत्री ने सचिवालय के कार्य घंटों और फाइलों के निपटान की प्रक्रिया को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के निर्देश दिए हैं। दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में न केवल फर्नीचर और साज-सज्जा में बदलाव किया गया है, बल्कि वहां की कार्यशैली में भी एक नया अनुशासन दिखाई दे रहा है। सुवेंदु अधिकारी ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अब किसी दल के नहीं, बल्कि बंगाल की जनता के सेवक हैं। इस संबोधन ने उन अधिकारियों के बीच भी एक स्पष्ट संदेश भेजा है जो पिछली सरकार के समय से महत्वपूर्ण पदों पर काबिज थे।

नबन्ना में नए प्रोटोकॉल का आगाज

मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब सचिवालय में होने वाली बैठकों और सरकारी कार्यक्रमों के दौरान राज्य की पारंपरिक गरिमा और सांस्कृतिक प्रतीकों को विशेष स्थान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने नबन्ना के प्रवेश द्वार पर स्वामी विवेकानंद और ऋषि अरबिंदो के चित्रों को स्थापित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, अब हर सोमवार को राज्य के विकास कार्यों की एक विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय को सौंपी जाएगी, जिससे परियोजनाओं में हो रही देरी को रोका जा सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नबन्ना में सुवेंदु अधिकारी का यह 'भगवा अवतार' केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह बंगाल की राजनीति में आए एक स्थायी बदलाव की ओर इशारा करता है। चुनाव परिणामों के बाद जिस तरह से भाजपा ने राज्य में अपनी जड़ें जमाई हैं, उसके बाद अब शासन के माध्यम से उस जनादेश को सार्थक करने की चुनौती मुख्यमंत्री के सामने है। उन्होंने अपनी कैबिनेट की पहली बैठक में ही उन वादों को प्राथमिकता दी है जो चुनाव घोषणापत्र में 'संकल्प पत्र' के रूप में पेश किए गए थे। विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा और युवाओं के लिए रोजगार सृजन के मुद्दे पर उन्होंने अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्ययोजना मांगी है।

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