ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी फर्नीचर मार्केट में देर रात भीषण अग्निकांड, आसमान छूती लपटों ने मचाई भारी तबाही।

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख थाना क्षेत्र से एक बेहद डरावनी और बड़ी

By INA News Desk
May 16, 2026 - 13:59
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ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी फर्नीचर मार्केट में देर रात भीषण अग्निकांड, आसमान छूती लपटों ने मचाई भारी तबाही।
ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी फर्नीचर मार्केट में देर रात भीषण अग्निकांड, आसमान छूती लपटों ने मचाई भारी तबाही।
  • आग की चपेट में आईं आठ बड़ी दुकानें, करोड़ों रुपये का कीमती सामान और लकड़ी के तैयार फर्नीचर जलकर हुए खाक
  • दमकल विभाग की 32 गाड़ियों ने एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू, संकरी गलियों के कारण रेस्क्यू में आई भारी दिक्कतें

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख थाना क्षेत्र से एक बेहद डरावनी और बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ स्थित शाहबेरी की प्रसिद्ध और बेहद व्यस्त फर्नीचर मार्केट में शुक्रवार की रात अचानक एक भीषण और विनाशकारी आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी मार्केट में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। इस भयावह अग्निकांड की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन और दमकल विभाग में हड़कंप मच गया। गनीमत यह रही कि यह हादसा रात के समय हुआ जब अधिकांश ग्राहक बाजार से जा चुके थे, जिसके कारण किसी भी तरह की जनहानि या किसी व्यक्ति के घायल होने की खबर सामने नहीं आई है। हालांकि, व्यावसायिक दृष्टिकोण से इस अग्निकांड ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है और बड़े पैमाने पर कीमती सामान जलकर पूरी तरह से राख हो गया है।

इस भीषण हादसे के समय और घटनाक्रम के बारे में विस्तृत विवरण देते हुए स्थानीय चश्मदीदों और पुलिस सूत्रों ने बताया कि आग लगने की यह घटना शुक्रवार की रात करीब 10 बजे के आसपास घटित हुई। उस समय दुकानदार अपनी-अपनी दुकानें बढ़ाकर घर जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी मार्केट के एक कोने से अचानक धुएं का एक बड़ा गुबार उठता हुआ दिखाई दिया। जब तक लोग कुछ समझ पाते और आग बुझाने के प्राथमिक इंतजामों का इस्तेमाल करते, तब तक सूखी लकड़ी, फोम, रेक्सिन, थिनर और पॉलिश जैसे अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थों की मौजूदगी के कारण आग ने बेहद आक्रामक रूप अख्तियार कर लिया। हवा की गति तेज होने की वजह से लपटें एक दुकान से दूसरी दुकान में बहुत तेजी से फैलती चली गईं और चंद मिनटों के भीतर ही कुल आठ बड़ी और मुख्य दुकानों को आग ने अपने क्रूर आगोश में ले लिया। शाहबेरी का यह इलाका अपनी घनी आबादी और अवैध रूप से विकसित व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यहाँ की सड़कों पर अक्सर अतिक्रमण रहता है और बिजली के तारों का जाल फैला हुआ है। दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ऐसी घनी और अनियोजित मार्केटों में आग लगने की स्थिति में दमकल की बड़ी गाड़ियों को मोड़ने और घटना की मुख्य जगह तक तुरंत पहुंचने में सबसे ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो एक बड़े जोखिम को जन्म देता है।

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जैसे ही बिसरख कोतवाली पुलिस और फायर ब्रिगेड के नियंत्रण कक्ष को इसकी सूचना मिली, वैसे ही मुख्य अग्निशमन अधिकारी के नेतृत्व में अलग-अलग फायर स्टेशनों से दमकल की गाड़ियों को तुरंत घटना स्थल की ओर रवाना किया गया। आग की गंभीरता को देखते हुए शुरुआत में भेजी गई गाड़ियां कम साबित हुईं, जिसके बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फेज-थ्री और इकोटेक सहित जिले के तमाम अन्य केंद्रों से बैकअप बुलाना पड़ा। कुल मिलाकर दमकल विभाग की 32 बड़ी गाड़ियों को इस ऑपरेशन में तैनात किया गया। अग्निशमन कर्मियों ने चारों तरफ से मोर्चा संभालते हुए पानी और केमिकल फोम की बौछारें शुरू कीं। लगभग एक घंटे की बेहद कठिन, जोखिम भरी और चौतरफा मशक्कत के बाद आखिरकार आग की मुख्य लपटों पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका।

दमकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति नियंत्रण में आने के बाद मीडिया को बताया कि आग पर काबू पाने के बाद भी कई घंटों तक कूलिंग का काम जारी रखा गया ताकि मलबे के नीचे दबी किसी चिंगारी से दोबारा आग भड़कने का खतरा न रहे। शुरुआती जांच और विजुअल साक्ष्यों के आधार पर इस बात की प्रबल आशंका जताई जा रही है कि आग की शुरुआत किसी एक दुकान में हुए बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण हुई होगी, जिसने बाद में पूरी मार्केट को अपनी चपेट में ले लिया। पुलिस और दमकल की संयुक्त तकनीकी टीम अब बिजली के बुनियादी ढांचे और दुकानों के भीतर सुरक्षा मानकों की गहनता से पड़ताल कर रही है। यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस पूरी मार्केट में सुरक्षा के आधुनिक उपकरणों और फायर एनओसी को लेकर हमेशा से ही सवाल उठते रहे हैं।

इस भीषण और विनाशकारी अग्निकांड के कारण शाहबेरी फर्नीचर मार्केट के व्यापारियों को जो आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, उसका आकलन करोड़ों रुपये में किया जा रहा है। जिन आठ दुकानों में आग पूरी तरह से फैली, उनके भीतर रखा हुआ प्रीमियम क्वालिटी का सोफा सेट, नक्काशीदार पलंग, डाइनिंग टेबल, कुर्सियां और बड़े पैमाने पर आयातित कच्ची लकड़ियां पूरी तरह से जलकर कोयला बन चुकी हैं। कई दुकानदारों ने रोते हुए बताया कि उन्होंने आगामी वैवाहिक सीजन की भारी मांग को पूरा करने के लिए ही कुछ दिनों पहले ही लाखों रुपये का नया माल और कच्चा मटेरियल बाजार से कर्ज लेकर मंगवाया था। इस हादसे ने न केवल उनका वर्तमान व्यवसाय नष्ट कर दिया है, बल्कि उनके सामने भविष्य में दोबारा खड़े होने और अपनी आजीविका चलाने का एक बहुत बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

स्थानीय बिसरख थाना पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें शनिवार की सुबह से ही घटना स्थल पर डटी हुई हैं और राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा नुकसान के वास्तविक आंकड़ों का जायजा लेने के लिए सर्वे किया जा रहा है। स्थानीय व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने सरकार और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस संकट की घड़ी में पीड़ित दुकानदारों को उचित आर्थिक मुआवजा और दोबारा व्यापार शुरू करने के लिए बैंकों से आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही, पुलिस सुरक्षा के दृष्टिकोण से मलबे वाले स्थान की घेराबंदी कर दी गई है ताकि कोई असामाजिक तत्व वहां अप्रिय स्थिति पैदा न कर सके और बिसरख कोतवाली पुलिस हर आने-जाने वाले पर नजर रख रही है।

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