दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे को हाई-टेक बनाने की ऐतिहासिक पहल, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गवर्नेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप-लर्निंग को शामिल करने का खाका खींचा
देश की राजधानी दिल्ली के प्रशासनिक और शासकीय ढांचे को पूरी तरह से आधुनिक, जन-अनुकूल और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने
- 'मेरा भारत, मेरा योगदान' अभियान के तहत बदलेगी देश की राजधानी की प्रशासनिक व्यवस्था, जनसेवाओं को पारदर्शी और त्वरित बनाने पर दिया विशेष जोर
- सरकारी फाइलों के निपटारे से लेकर नागरिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तक में होगा आधुनिक तकनीक का उपयोग, दिल्ली बनेगी देश का पहला डिजिटल प्रशासनिक मॉडल
देश की राजधानी दिल्ली के प्रशासनिक और शासकीय ढांचे को पूरी तरह से आधुनिक, जन-अनुकूल और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और दूरगामी योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली सरकार के प्रशासनिक तंत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय बैठक में शासन व्यवस्था के भीतर डीप-लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के समावेश पर सबसे ज्यादा बल दिया है। सरकार के इस कदम को 'मेरा भारत, मेरा योगदान' राष्ट्रीय अभियान के एक महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसका मूल उद्देश्य प्रत्येक नागरिक की सरकारी तंत्र में भागीदारी सुनिश्चित करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मानवीय त्रुटियों से मुक्त बनाना है। मुख्यमंत्री के इस नए दृष्टिकोण से न केवल दिल्ली के सचिवालय से लेकर स्थानीय निकायों तक के कामकाज की गति कई गुना बढ़ जाएगी, बल्कि यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी डिजिटल गवर्नेंस का एक अनूठा और अनुकरणीय मॉडल स्थापित करेगा।
प्रशासनिक ढांचे को मॉडर्न बनाने की इस व्यापक कार्ययोजना के तहत दिल्ली सरकार अपने विभिन्न विभागों में वर्षों से चली आ रही पारंपरिक और सुस्त कागजी कार्यप्रणाली को पूरी तरह से समाप्त करने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, डीप-लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करके सरकारी फाइलों के विश्लेषण, वर्गीकरण और उनके त्वरित निस्तारण की एक ऐसी स्वचालित प्रणाली विकसित की जाएगी जो बिना किसी मानवीय पक्षपात या देरी के काम करेगी। इस तकनीक की मदद से स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी सरकारी योजनाओं का डेटा रीयल-टाइम में विश्लेषित किया जा सकेगा, जिससे नीतियों के निर्धारण और उनके क्रियान्वयन में लगने वाला समय बेहद कम हो जाएगा। इस पूरी कवायद का सीधा असर दिल्ली की आम जनता पर पड़ेगा, जिन्हें अब अपने बुनियादी प्रमाण पत्रों, पेंशन, और व्यावसायिक स्वीकृतियों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और सभी सेवाएं एक क्लिक पर पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होंगी। डीप-लर्निंग मशीन लर्निंग का ही एक अत्याधुनिक रूप है जो मानव मस्तिष्क के न्यूरल नेटवर्क की तर्ज पर काम करता है। जब इसे प्रशासनिक डेटा और पब्लिक गवर्नेंस के साथ जोड़ा जाता है, तो यह प्रणाली पिछले अनुभवों और करोड़ों की संख्या में मौजूद सरकारी दस्तावेजों का विश्लेषण करके भविष्य की नागरिक आवश्यकताओं का सटीक पूर्वानुमान लगाने में सक्षम हो जाती है। इससे आपदा प्रबंधन, ट्रैफिक कंट्रोल और वित्तीय बजट के आवंटन जैसे जटिल कार्यों को बेहद सटीकता के साथ अंजाम दिया जा सकता है।
इस डिजिटल बदलाव की दिशा में 'मेरा भारत, मेरा योगदान' अभियान के तहत दिल्ली सरकार एक विशेष नागरिक भागीदारी मंच (सिटिजन एंगेजमेंट पोर्टल) भी विकसित कर रही है, जहां दिल्ली का कोई भी निवासी शहर के विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए सीधे अपने रचनात्मक सुझाव साझा कर सकेगा। डीप-लर्निंग टूल्स इन हजारों-लाखों सुझावों को उनके महत्व और प्रासंगिकता के आधार पर स्वतः वर्गीकृत करेंगे, जिससे नीति निर्माताओं को जनता की वास्तविक जरूरतों को समझने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस बात को विशेष रूप से सामने रखा है कि राष्ट्र निर्माण में जब तक प्रत्येक नागरिक का सक्रिय योगदान और अत्याधुनिक तकनीक का सही संमिश्रण नहीं होगा, तब तक एक आदर्श और विकसित व्यवस्था की कल्पना करना असंभव है। इस अभियान के जरिए युवाओं और तकनीकी विशेषज्ञों को भी सरकार के साथ मिलकर काम करने और विभिन्न सार्वजनिक समस्याओं के लिए कोडिंग और सॉफ्टवेयर आधारित समाधान विकसित करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए दिल्ली सरकार अपने मौजूदा अधिकारियों और कर्मचारियों के तकनीकी कौशल को उन्नत करने के लिए एक बहुत बड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। इसके तहत प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से लेकर निचले स्तर के कर्मचारियों को डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई-संचालित गवर्नेंस टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे नई प्रणाली के साथ आसानी से तालमेल बिठा सकें। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण का मतलब केवल नए कंप्यूटर लगाना नहीं है, बल्कि पूरी प्रशासनिक सोच को डेटा-संचालित और परिणाम-उन्मुख बनाना है। इसके लिए दिल्ली के विभिन्न विभागों के मुख्य सूचना अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में डीप-लर्निंग प्रणालियों के एकीकरण की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपें।
सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं के क्षेत्र में भी इस डीप-लर्निंग तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की रूपरेखा तैयार की गई है। दिल्ली के व्यस्ततम चौराहों, सार्वजनिक स्थानों और संवेदनशील इलाकों में लगे हजारों सीसीटीवी कैमरों को एक केंद्रीय डीप-लर्निंग इंजनों से जोड़ा जाएगा जो संदिग्ध गतिविधियों, ट्रैफिक जाम और लावारिस वस्तुओं की पहचान पलक झपकते ही कर लेंगे और तुरंत स्थानीय नियंत्रण कक्ष को अलर्ट भेजेंगे। इसके अतिरिक्त, दिल्ली की सड़कों पर होने वाले जलभराव, गड्ढों और कचरे के ढेरों की तस्वीरें यदि कोई नागरिक ऐप पर अपलोड करता है, तो एआई सिस्टम बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के संबंधित विभाग के कनिष्ठ अभियंता को काम सौंपकर उसकी समय सीमा निर्धारित कर देगा। इस अभूतपूर्व ऑटोमेशन से जवाबदेही तय होगी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी।
वित्तीय प्रबंधन और राजस्व संग्रह के मामले में भी दिल्ली सरकार इस आधुनिक तकनीक के जरिए एक बड़ा सुधार देखने की उम्मीद कर रही है। डीप-लर्निंग सिस्टम का उपयोग टैक्स चोरी को पकड़ने, सरकारी संपत्तियों के अवैध कब्जों को सैटेलाइट इमेजरी के जरिए चिन्हित करने और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं में होने वाले वित्तीय रिसाव (लीकेज) को रोकने के लिए किया जाएगा। बजट निर्माण की प्रक्रिया में भी यह तकनीक पिछले कई वर्षों के खर्चों और उनके सामाजिक प्रभावों का मूल्यांकन करके यह बताएगी कि किस क्षेत्र या योजना को कितने फंड की वास्तविक आवश्यकता है। इससे जनता के टैक्स के पैसे का एक-एक रुपया पूरी तरह से सही जगह और पूरी ईमानदारी के साथ खर्च किया जा सकेगा, जिससे दिल्ली की आर्थिक स्थिति और वित्तीय अनुशासन को और अधिक मजबूती मिलेगी।
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