Sitapur : गन्ने की फसल को टॉप बोरर कीट से बचाने के लिए चला जागरूकता अभियान, किसानों को मिले सुरक्षा के टिप्स
कार्यक्रम में गन्ना विकास अधिकारी अभिषेक प्रताप सिंह ने किसानों को बताया कि टॉप बोरर गन्ने की फसल को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला कीड़ा है। यह पौधों के ऊपरी हिस्से को खराब कर देता है जिससे गन्ने की पैदावार और उसकी मिठास दोनों कम हो जाती है। उन्होंने किसानों को अपने खेतों की लगातार देखभाल करने और
Report : संदीप चौरसिया INA NEWS सीतापुर
कमलापुर सीतापुर स्थित एन आर इन्फ्रा कान प्राइवेट लिमिटेड की कमलापुर यूनिट द्वारा गन्ना किसानों को टॉप बोरर कीट से बचाने के उद्देश्य से खैराबाद क्षेत्र में एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत किसानों को टॉप बोरर कीट की पहचान करने, उसके लक्षणों को समझने और वैज्ञानिक तरीकों से उस पर काबू पाने के उपायों की पूरी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में गन्ना विकास अधिकारी अभिषेक प्रताप सिंह ने किसानों को बताया कि टॉप बोरर गन्ने की फसल को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला कीड़ा है। यह पौधों के ऊपरी हिस्से को खराब कर देता है जिससे गन्ने की पैदावार और उसकी मिठास दोनों कम हो जाती है। उन्होंने किसानों को अपने खेतों की लगातार देखभाल करने और शुरुआत में ही इस कीट की पहचान कर कदम उठाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस कीट के असर से गन्ने की ऊपरी पत्तियां सूखने लगती हैं और पौधे का बढ़ना रुक जाता है। अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। इसके साथ ही किसानों को सही मात्रा में खाद डालने, समय पर सिंचाई करने और खेतों को साफ रखने के लिए भी कहा गया।
अभियान के दौरान फेरोमोन ट्रैप के इस्तेमाल और सही कीटनाशकों के वैज्ञानिक प्रयोग के बारे में भी अच्छे से समझाया गया। गन्ना पर्यवेक्षक विपनेश सिंह ने बताया कि फेरोमोन ट्रैप इस कीट की निगरानी और उसे खत्म करने में बहुत मददगार साबित हो रहे हैं। उन्होंने किसानों से खेती की नई तकनीकों को अपनाने की अपील की ताकि फसल सुरक्षित रहे और ज्यादा मुनाफा हो। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने गन्ने की खेती से जुड़ी अपनी अन्य दिक्कतों पर भी विशेषज्ञों से बातचीत की, जिनका मौके पर ही हल निकाला गया। किसानों ने इस आयोजन की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें इससे बहुत काम की जानकारियां मिली हैं। कंपनी के प्रतिनिधियों ने भरोसा दिया कि किसानों के फायदे के लिए आने वाले समय में भी ऐसे ट्रेनिंग कार्यक्रम लगातार चलाए जाते रहेंगे।
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