CBI कोर्ट ने ED के पूर्व अधिकारी ललित बज़ाद को रिश्वत मामले में 3 साल की सजा और 5.5 लाख का जुर्माना लगाया

Bengaluru News: बेंगलुरु की एक विशेष CBI कोर्ट ने 25 जुलाई 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व अधिकारी ललित बज़ाद को रिश्वत लेने के मामले में तीन....

Jul 26, 2025 - 14:53
 0  120
CBI कोर्ट ने ED के पूर्व अधिकारी ललित बज़ाद को रिश्वत मामले में 3 साल की सजा और 5.5 लाख का जुर्माना लगाया

बेंगलुरु की एक विशेष CBI कोर्ट ने 25 जुलाई 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व अधिकारी ललित बज़ाद को रिश्वत लेने के मामले में तीन साल की जेल की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर 5.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। ललित बज़ाद पर आरोप था कि उन्होंने एक व्यवसायी से 5 लाख रुपये की रिश्वत माँगी और ली थी। इस मामले ने जांच एजेंसियों में भ्रष्टाचार के मुद्दे को फिर से सामने ला दिया है।

ललित बज़ाद, जो बेंगलुरु में ED के अधिकारी थे, ने 2021 में एक व्यवसायी से रिश्वत माँगी थी। वह उस समय सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (CGST) और सेंट्रल एक्साइज, चेन्नई से डेपुटेशन पर ED में काम कर रहे थे। CBI की जाँच के अनुसार, बज़ाद ने मुंबई की एक फाइनेंस कंपनी, अपोलो फिनवेस्ट के निदेशक मिखिल इन्नानी से 50 लाख रुपये की रिश्वत माँगी थी। यह माँग एक ऐसे मामले में थी, जिसमें चीनी मोबाइल ऐप्स से जुड़े त्वरित ऋण (इंस्टेंट लोन) की जाँच हो रही थी।

13 जनवरी 2021 को ED ने इस मामले में एक ECIR (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) दर्ज की थी। बज़ाद इस जाँच में डिप्टी डायरेक्टर मनोज मित्तल की मदद कर रहे थे। 2 फरवरी 2021 को मिखिल इन्नानी को ED कार्यालय में बुलाया गया। बज़ाद ने उनसे कहा कि अगर वह 50 लाख रुपये नहीं देंगे, तो उनकी कंपनी को अनावश्यक कानूनी कार्रवाई में फँसाया जाएगा, जिससे उनके व्यवसाय और प्रतिष्ठा को नुकसान होगा। बाद में यह राशि 5 लाख रुपये पर तय हुई, जिसे बज़ाद ने स्वीकार किया।

  • CBI की कार्रवाई

CBI को मिखिल इन्नानी की शिकायत मिली, जिसमें उन्होंने बज़ाद की रिश्वत माँगने की बात बताई। CBI ने एक जाल बिछाया और बज़ाद को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद, मार्च 2023 में CBI ने बज़ाद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 384 (उगाही) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 (रिश्वत लेना) के तहत आरोप तय किए।

CBI ने अपनी जाँच में पाया कि बज़ाद ने अपने पद का दुरुपयोग किया और व्यवसायी को डराकर रिश्वत माँगी। जाँच के दौरान CBI ने बज़ाद के कार्यालय और घर पर तलाशी ली, जिसमें कई सबूत मिले। 25 जुलाई 2025 को बेंगलुरु की विशेष CBI कोर्ट ने बज़ाद को दोषी पाया। कोर्ट ने उन्हें धारा 7 के तहत तीन साल की साधारण जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना, साथ ही धारा 384 के तहत एक साल की साधारण जेल और 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। दोनों सजाएँ एक साथ चलेंगी।

यह मामला चीनी मोबाइल ऐप्स से जुड़े त्वरित ऋण घोटाले से संबंधित था, जिसमें ED जाँच कर रही थी। इन ऐप्स पर लोगों को परेशान करने और गैरकानूनी तरीके से ऋण देने का आरोप था। मिखिल इन्नानी की कंपनी, अपोलो फिनवेस्ट, इस जाँच के दायरे में थी। बज़ाद ने इस जाँच का फायदा उठाकर इन्नानी को धमकाया और रिश्वत माँगी। CBI ने अपनी चार्जशीट में कहा कि बज़ाद ने इन्नानी को उनकी कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और प्रतिष्ठा को नुकसान की धमकी दी थी।

यह पहला मामला नहीं है, जब ED के कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। फरवरी 2021 में, बेंगलुरु में ED के एक मल्टी-टास्किंग स्टाफ को CBI ने गिरफ्तार किया था, जो एक व्यवसायी से 2 करोड़ रुपये की उगाही करने की कोशिश कर रहा था। उस कर्मचारी ने खुद को ED अधिकारी बताकर छापेमारी की धमकी दी थी।

ललित बज़ाद की सजा ने जांच एजेंसियों में भ्रष्टाचार के मुद्दे को फिर से उठाया है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस फैसले की तारीफ की। एक एक्स यूजर ने लिखा, “जिन्हें भ्रष्टाचार रोकना था, वे खुद इसमें शामिल पाए गए। यह सजा एक सख्त संदेश है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।”

कई लोगों ने यह भी कहा कि ED और CBI जैसी एजेंसियों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है। यह मामला दिखाता है कि भ्रष्टाचार केवल निचले स्तर पर ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों में भी हो सकता है। CBI ने कहा कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज करेगी।

विशेष CBI कोर्ट ने ललित बज़ाद को दोषी ठहराते हुए कहा कि उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और एक व्यवसायी को डराकर रिश्वत ली। कोर्ट ने उनके खिलाफ सबूतों को मजबूत माना, जिसमें CBI की जालसाजी और गवाहों के बयान शामिल थे। सजा के तहत बज़ाद को तीन साल की जेल और कुल 5.5 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। अगर वह जुर्माना नहीं भरते, तो उनकी सजा की अवधि बढ़ सकती है।

CBI भारत की प्रमुख जांच एजेंसी है, जिसे भ्रष्टाचार और बड़े अपराधों की जाँच का जिम्मा सौंपा गया है। यह 1941 में स्थापित स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) से शुरू हुई थी और 1963 में CBI के रूप में स्थापित हुई। इसका मुख्य काम भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध और गंभीर मामलों की जाँच करना है। इस मामले में CBI ने तेजी से कार्रवाई की और बज़ाद को रंगे हाथों पकड़ा, जिससे उसकी सजा सुनिश्चित हुई।

Also Read- राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला- बिहार में SIR को लेकर विवाद, कहा- ‘हम आपके पीछे पड़ेंगे।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।