सीबीआई का बड़ा एक्शन: डिप्टी कमिश्नर को सीबीआई ने ट्रैप लगाकर4 लाख रुपये की रिश्वत लेते दबोचा।

राजधानी दिल्ली के नागरिक निकाय में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका प्रमाण मंगलवार को तब मिला जब सीबीआई की टीम ने एक

Mar 31, 2026 - 14:49
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सीबीआई का बड़ा एक्शन: डिप्टी कमिश्नर को सीबीआई ने ट्रैप लगाकर4 लाख रुपये की रिश्वत लेते दबोचा।
सीबीआई का बड़ा एक्शन: डिप्टी कमिश्नर को सीबीआई ने ट्रैप लगाकर4 लाख रुपये की रिश्वत लेते दबोचा।
  • रिश्वतखोरी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: 4 लाख रुपये के लेनदेन मामले में फंसे एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारी, छापेमारी में मिले अहम दस्तावेज

राजधानी दिल्ली के नागरिक निकाय में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका प्रमाण मंगलवार को तब मिला जब सीबीआई की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाया। जांच एजेंसी ने दिल्ली नगर निगम के शाहदरा उत्तरी क्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर, लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक कुमार मिश्रा को 4 लाख रुपये की कथित रिश्वत स्वीकार करते हुए गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी उस समय की गई जब अधिकारी एक शिकायतकर्ता से अवैध रूप से धन प्राप्त कर रहे थे। इस ऑपरेशन की सफलता के बाद सीबीआई की विभिन्न टीमों ने आरोपी अधिकारी के कार्यालय और निवास स्थान सहित कई ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है, ताकि भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क की गहराई का पता लगाया जा सके।

मामले की विस्तृत जानकारी के अनुसार, इस भ्रष्टाचार के खेल में केवल डिप्टी कमिश्नर ही नहीं, बल्कि विभाग के अन्य कर्मचारी भी शामिल थे। सीबीआई ने अभिषेक कुमार मिश्रा के साथ-साथ एमसीडी के एक अकाउंट ऑफिसर दिव्यांशु गौतम को भी हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि इस रिश्वत की मांग एक लाइसेंस इंस्पेक्टर से की गई थी। जब इस अवैध मांग की जानकारी जांच एजेंसी तक पहुंची, तो उन्होंने तथ्यों का सत्यापन किया और एक सुनियोजित 'ट्रैप' ऑपरेशन को अंजाम दिया। जैसे ही पैसे का लेनदेन हुआ, वहां पहले से मौजूद सीबीआई के अधिकारियों ने दोनों को दबोच लिया। यह कार्रवाई दर्शाती है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारी भी किस प्रकार जांच एजेंसियों की रडार पर हैं।

भ्रष्टाचार का यह मामला लाइसेंस जारी करने या उससे संबंधित किसी प्रशासनिक फाइल को क्लीयर करने के बदले में रिश्वत की मांग से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि सीबीआई ने अभी तक विस्तृत विवरण साझा नहीं किया है, लेकिन प्राथमिक रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि आरोपी अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए शिकायतकर्ता पर दबाव बनाया था। गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपियों को सीबीआई मुख्यालय ले जाया गया, जहां उनसे लंबी पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारी यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या इस तरह के लेनदेन पहले भी हुए हैं और क्या इस वसूली रैकेट में एमसीडी के कुछ और बड़े नाम या बिचौलिए भी शामिल हैं।

गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई छापेमारी में सीबीआई को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। अधिकारियों के आवासों से नकदी और बेनामी संपत्तियों से जुड़े कागजात मिलने की भी खबरें आ रही हैं, जिनका अभी आधिकारिक मिलान किया जाना बाकी है। जांच एजेंसी का मानना है कि यह केवल एक बार का मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित तरीके से चलाए जा रहे भ्रष्टाचार का हिस्सा हो सकता है। बरामद किए गए दस्तावेजों की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पिछले कुछ महीनों में शाहदरा नॉर्थ जोन में कौन-कौन से महत्वपूर्ण टेंडर और लाइसेंस जारी किए गए और क्या उनमें भी इसी तरह की वित्तीय अनियमितताएं बरती गई थीं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त निगरानी

पिछले कुछ महीनों में दिल्ली के विभिन्न विभागों में सीबीआई और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की सक्रियता बढ़ी है। एमसीडी जैसे विभाग, जो सीधे जनता से जुड़े कार्यों का संचालन करते हैं, वहां इस तरह की गिरफ्तारियां यह संदेश देती हैं कि प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किसी भी स्तर के अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के अधिकारी की गिरफ्तारी इस दिशा में एक बड़ी चेतावनी है।

इस घटना ने दिल्ली नगर निगम की छवि पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निगम के भीतर पहले भी कई बार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन एक डिप्टी कमिश्नर स्तर के अधिकारी का सीधे तौर पर रिश्वत लेते पकड़ा जाना व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। निगम प्रशासन ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए अपनी आंतरिक सतर्कता इकाई को भी सतर्क कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि आरोपी अधिकारियों को जल्द ही सेवा से निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके साथ ही, उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए सभी प्रमुख निर्णयों की समीक्षा करने की भी योजना बनाई जा रही है ताकि अन्य संभावित घोटालों का पता लगाया जा सके। कानूनी प्रक्रिया के तहत, गिरफ्तार किए गए दोनों अधिकारियों को बुधवार को दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा। जांच एजेंसी अदालत से उनकी कस्टोडियल रिमांड की मांग करेगी ताकि उन्हें आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जा सके और रिश्वत की इस राशि के अंतिम गंतव्य का पता लगाया जा सके। सीबीआई इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या रिश्वत की मांग करने के लिए किसी निजी व्यक्ति या बिचौलिए का सहारा लिया गया था। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि जांच का दायरा अब शाहदरा जोन के अन्य विभागों तक भी फैल रहा है।

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