उम्र के फासले को मात देकर जब पर्दे पर बनीं अपने से बड़ों की मां, टीवी की इस मशहूर अभिनेत्री ने बयां किया अपना दर्द

अपने फैसले का बचाव करते हुए और सच्चाई साझा करते हुए अभिनेत्री ने यह भी बताया कि कई बार आर्थिक सुरक्षा और निरंतरता बनाए रखने के लिए ऐसे समझौते करने पड़ते हैं। अभिनय के क्षेत्र में अनिश्चितता बहुत अधिक होती है, और जब एक बार आप किसी

May 8, 2026 - 06:37
 0  1
उम्र के फासले को मात देकर जब पर्दे पर बनीं अपने से बड़ों की मां, टीवी की इस मशहूर अभिनेत्री ने बयां किया अपना दर्द
उम्र के फासले को मात देकर जब पर्दे पर बनीं अपने से बड़ों की मां, टीवी की इस मशहूर अभिनेत्री ने बयां किया अपना दर्द

  • आकाशदीप सहगल और अभिनेत्री के बीच उम्र का बड़ा अंतर, ऑन-स्क्रीन मां का किरदार निभाने के पीछे की असल कहानी आई सामने
  • करियर के शुरुआती दौर में ही 'टाइपकास्ट' होने का खतरा, टीवी हसीना ने खुद बताया कि क्यों चुना था अपने से 8 साल बड़े अभिनेता की मां बनने का रास्ता

टेलीविजन इंडस्ट्री में अभिनय की दुनिया बाहर से जितनी चकाचौंध भरी दिखाई देती है, इसके पीछे के समीकरण उतने ही जटिल और चुनौतीपूर्ण होते हैं। अक्सर छोटे पर्दे पर अभिनेत्रियों को बहुत ही कम उम्र में ऐसे किरदार निभाने पड़ते हैं, जो उनकी वास्तविक आयु से कोसों दूर होते हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला तब चर्चा में आया जब एक मशहूर टीवी अभिनेत्री ने अपने से करीब 8 साल बड़े अभिनेता आकाशदीप सहगल की मां का किरदार निभाने का फैसला किया। इस खबर ने उस समय पूरी इंडस्ट्री और प्रशंसकों को हैरान कर दिया था। ग्लैमर की दुनिया में जहां हर कोई जवान और मुख्य भूमिका में दिखना चाहता है, वहां एक उभरती हुई अभिनेत्री द्वारा उम्रदराज किरदार को अपनाना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं था। इस फैसले के पीछे की सच्चाई और अभिनेत्री के अपने अनुभवों ने अब एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या अभिनेत्रियां वास्तव में अपनी मर्जी से ऐसे किरदार चुनती हैं या वे किसी अदृश्य दबाव का शिकार होती हैं। छोटे पर्दे के इतिहास के सबसे चर्चित धारावाहिकों में से एक 'क्योकि सास भी कभी बहू थी' के दौरान किरदारों की अदला-बदली और लीप (समय का अंतराल) की प्रक्रिया बहुत सामान्य थी। इसी शो के दौरान अभिनेत्री जया भट्टाचार्य को आकाशदीप सहगल की मां का किरदार निभाने का प्रस्ताव मिला था। दिलचस्प बात यह है कि जया और आकाशदीप के बीच की उम्र का अंतर वास्तव में जया के पक्ष में नहीं था, यानी आकाशदीप उनसे उम्र में काफी बड़े थे। टीवी की इस हसीना ने जब यह भूमिका स्वीकार की, तो उनके पेशेवर जीवन पर कई सवाल खड़े हुए। आमतौर पर यह माना जाता है कि एक बार अगर कोई अभिनेत्री मां या बुजुर्ग का किरदार निभा लेती है, तो उसे भविष्य में मुख्य नायिका के रोल मिलना बंद हो जाते हैं। जया भट्टाचार्य ने इस रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी, लेकिन इसके पीछे की परिस्थितियों और उनके संघर्ष को समझना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह मनोरंजन जगत की कड़वी सच्चाई को दर्शाता है।

अभिनय की दुनिया में पैर जमाने के लिए कई बार कलाकारों को अपनी पसंद और नापसंद को किनारे रखना पड़ता है। जया भट्टाचार्य ने इस बारे में बात करते हुए स्पष्ट किया है कि शुरुआती दौर में एक कलाकार के पास बहुत अधिक विकल्प नहीं होते। जब किसी बड़े बैनर और लोकप्रिय शो से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण किरदार सामने आता है, तो उसे ठुकराना करियर के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। अभिनेत्री ने यह स्वीकार किया कि आकाशदीप सहगल की मां बनने का फैसला उन्होंने बहुत सोच-समझकर लिया था, हालांकि इसके पीछे काम की कमी का डर या किसी प्रकार का 'करियर दबाव' प्रत्यक्ष रूप से नहीं था, बल्कि यह किरदार की गहराई और शो की लोकप्रियता से जुड़ा मामला था। उन्होंने महसूस किया कि एक कलाकार के रूप में उनकी पहचान उनके द्वारा निभाए गए कठिन और चुनौतीपूर्ण पात्रों से होनी चाहिए, न कि केवल उनकी उम्र या लुक के आधार पर। टेलीविजन जगत में 'जेनरेशन लीप' आने के बाद अक्सर अभिनेत्रियों को रातों-रात 20 साल बड़ी उम्र का दिखाया जाता है। कई अभिनेत्रियां इस डर से शो छोड़ देती हैं कि उन्हें 'मां' का टैग मिल जाएगा, लेकिन जया भट्टाचार्य उन चंद कलाकारों में शामिल रहीं जिन्होंने इस चुनौती को सहजता से स्वीकार किया और अपनी अभिनय क्षमता से उस किरदार को जीवंत बना दिया। इंडस्ट्री के भीतर काम करने के तरीके और कास्टिंग की प्रक्रिया अक्सर अभिनेत्रियों के लिए कठोर होती है। जब जया ने अपने से बड़े अभिनेता की मां बनने की चुनौती ली, तो उन्हें भी इस बात का अंदाजा था कि लोग उन्हें किस नजरिए से देखेंगे। उन्होंने बताया कि उस समय उनकी प्राथमिकता केवल काम करना और अपनी प्रतिभा को साबित करना था। टेलीविजन में अक्सर पटकथा की मांग ऐसी होती है कि युवा अभिनेत्रियों को भारी मेकअप और गहनों के साथ उम्रदराज दिखाया जाता है। जया के मामले में, उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया कि उनका किरदार कहानी को कैसे आगे ले जा रहा है। उन्होंने यह भी साझा किया कि हालांकि वह उम्र में छोटी थीं, लेकिन स्क्रीन पर उनके और आकाशदीप के बीच के दृश्य इतने प्रभावी थे कि दर्शकों ने कभी उनके वास्तविक आयु के अंतर को नोटिस नहीं किया। यह उनकी कलाकारी की जीत थी, लेकिन इसके साथ ही यह फिल्म और टीवी जगत में उम्र के प्रति भेदभाव को भी दर्शाता है।

अपने फैसले का बचाव करते हुए और सच्चाई साझा करते हुए अभिनेत्री ने यह भी बताया कि कई बार आर्थिक सुरक्षा और निरंतरता बनाए रखने के लिए ऐसे समझौते करने पड़ते हैं। अभिनय के क्षेत्र में अनिश्चितता बहुत अधिक होती है, और जब एक बार आप किसी बड़े शो का हिस्सा बन जाते हैं, तो वहां से मिलने वाली पहचान आपको आगे के लिए संबल देती है। हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया कि इस फैसले के बाद उन्हें लंबे समय तक केवल इसी तरह के 'कैरेक्टर रोल्स' ही ऑफर किए गए। यह टीवी इंडस्ट्री का एक ऐसा पहलू है जहां किसी की बहुमुखी प्रतिभा को देखने के बजाय उसे एक विशेष सांचे में ढालने की कोशिश की जाती है। जया ने साहसपूर्वक इस सांचे को तोड़ा और बाद में कई अलग-अलग तरह की भूमिकाएं भी निभाईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि एक सशक्त अभिनेत्री किसी भी आयु वर्ग के चरित्र में ढल सकती है। आकाशदीप सहगल के साथ उनके ऑन-स्क्रीन रिश्तों और ऑफ-स्क्रीन बॉन्डिंग ने भी काम को आसान बनाया। जया ने बताया कि सेट पर वे सभी सहकर्मी थे और उम्र का फासला कभी उनके पेशेवर व्यवहार के बीच नहीं आया। लेकिन, सार्वजनिक रूप से यह बात हमेशा चर्चा का विषय रही कि कैसे एक छोटी उम्र की लड़की ने बड़े अभिनेता की मां का रोल किया। इस खबर के माध्यम से अभिनेत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि किरदारों का चयन केवल व्यक्तिगत पसंद नहीं होता, बल्कि इसके पीछे कई व्यावसायिक कारण और भविष्य की संभावनाएं भी जुड़ी होती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि वे अपने उस फैसले से खुश हैं, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में नई अभिनेत्रियों को अपने करियर ग्राफ को लेकर अधिक सजग रहना चाहिए ताकि वे समय से पहले टाइपकास्ट न हो जाएं।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow