60 की उम्र में मिलिंद सोमन का हैरतअंगेज कारनामा: यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया समंदर, बनाया नया कीर्तिमान।

भारतीय सिनेमा और मॉडलिंग जगत में फिटनेस के पर्याय माने जाने वाले मिलिंद सोमन ने एक बार फिर वह कर दिखाया है, जो किसी भी उम्र

May 7, 2026 - 16:13
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60 की उम्र में मिलिंद सोमन का हैरतअंगेज कारनामा: यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया समंदर, बनाया नया कीर्तिमान।
60 की उम्र में मिलिंद सोमन का हैरतअंगेज कारनामा: यूरोप से अफ्रीका तक तैरकर पार किया समंदर, बनाया नया कीर्तिमान।
  • जिब्राल्टर जलडमरूमध्य की लहरों पर मिली जीत: 'आयरनमैन' मिलिंद सोमन ने ओपन-वॉटर स्विमिंग में फिर साबित किया अपना लोहा।
  • उम्र महज एक संख्या: मिलिंद सोमन ने दो महाद्वीपों के बीच तैरकर दुनिया को किया दंग, फिटनेस की नई मिसाल पेश की।

भारतीय सिनेमा और मॉडलिंग जगत में फिटनेस के पर्याय माने जाने वाले मिलिंद सोमन ने एक बार फिर वह कर दिखाया है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए एक सपने जैसा होता है। 60 साल की उम्र में, जहां अधिकांश लोग शारीरिक सक्रियता कम कर देते हैं, वहीं मिलिंद सोमन ने अपनी सीमाओं को विस्तार देते हुए यूरोप और अफ्रीका महाद्वीप के बीच स्थित जिब्राल्टर जलडमरूमध्य (Strait of Gibraltar) को तैरकर पार किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण और व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। मिलिंद सोमन की इस सफलता ने न केवल उनके प्रशंसकों को गौरवान्वित किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर फिटनेस के प्रति एक सकारात्मक संदेश भी भेजा है। उनके द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह उनकी अब तक की सबसे कठिन और रोमांचक ओपन-वॉटर तैराकी प्रतियोगिताओं में से एक रही है। इस साहसिक यात्रा की शुरुआत स्पेन के दक्षिणी तट से हुई, जहां से मिलिंद ने मोरक्को की दिशा में तैरना शुरू किया। जिब्राल्टर जलडमरूमध्य की दूरी लगभग 15 से 16 किलोमीटर है, लेकिन समुद्र की लहरों के विपरीत बहाव, ठंडे पानी और तेज हवाओं के कारण यह दूरी और भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है। मिलिंद सोमन ने इस मिशन को पूरा करने के लिए अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति का भरपूर उपयोग किया। तैराकी के दौरान उन्हें बड़े जहाजों की आवाजाही और समुद्री जीवों की मौजूदगी जैसी बाधाओं का भी सामना करना पड़ा। यह उनके दृढ़ संकल्प का ही परिणाम था कि वे दो महाद्वीपों को जोड़ने वाले इस जल क्षेत्र को सफलतापूर्वक पार करने में कामयाब रहे। उनकी इस उपलब्धि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो उम्र शरीर की क्षमताओं को कभी सीमित नहीं कर सकती।

मिलिंद सोमन ने अपनी इस उपलब्धि का अनुभव सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि समुद्र के बीचों-बीच तैरना और एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंचना उनके लिए एक आध्यात्मिक अनुभव की तरह था। उन्होंने अपनी तैयारी के बारे में विस्तार से चर्चा की और बताया कि इसके लिए उन्होंने महीनों तक कठिन अभ्यास किया था। तैराकी के दौरान उनके साथ एक सुरक्षा नौका और प्रशिक्षकों की टीम भी मौजूद थी, जो उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए थे। मिलिंद ने बताया कि पानी का तापमान और अचानक बदलते मौसम ने कई बार उनकी सहनशक्ति की परीक्षा ली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। जैसे ही उन्होंने मोरक्को के तट को छुआ, यह उनके जीवन के सबसे सुखद क्षणों में से एक बन गया। यह समुद्री मार्ग भूमध्य सागर को अटलांटिक महासागर से जोड़ता है। यहां पानी की धाराएं बहुत ही अनिश्चित होती हैं और तापमान में अचानक गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, यह दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग लेन में से एक है, जिससे तैराकों के लिए सुरक्षा का जोखिम हमेशा बना रहता है। फिटनेस के प्रति मिलिंद सोमन का समर्पण सर्वविदित है। 2015 में उन्होंने स्विट्जरलैंड में आयोजित दुनिया की सबसे कठिन 'आयरनमैन ट्रायथलॉन' को पूरा किया था, जिसके बाद उन्हें 'आयरनमैन' का खिताब मिला। इसके बाद उन्होंने फ्लोरिडा में 'अल्ट्रामैन' रेस भी जीती, जिसमें तीन दिनों में 517 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। मिलिंद सोमन की जीवनशैली में दौड़ना, तैरना और स्वस्थ आहार का पालन करना अनिवार्य हिस्सा है। वे अक्सर नंगे पैर दौड़ने (Barefoot running) की वकालत करते हैं और युवाओं को जिम के कृत्रिम साधनों के बजाय प्राकृतिक व्यायाम की ओर प्रेरित करते हैं। यूरोप से अफ्रीका तक की यह तैराकी उनकी फिटनेस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है, जो उनके पिछले रिकॉर्ड्स में एक नया आयाम जोड़ता है।

मिलिंद की इस सफलता के पीछे उनकी पत्नी अंकिता कोंवर का भी निरंतर सहयोग रहा है। अंकिता ने इस चुनौतीपूर्ण मिशन के दौरान मिलिंद का उत्साहवर्धन किया और उनकी फिटनेस यात्रा के हर पड़ाव पर साथ रहीं। मिलिंद सोमन का मानना है कि मानव शरीर की क्षमताएं अनंत हैं और हम केवल अपनी मानसिक सोच के कारण ही खुद को कमजोर महसूस करते हैं। 60 साल की उम्र में उनकी टोन्ड बॉडी और स्टेमिना आज के 25 साल के युवाओं के लिए भी एक चुनौती है। वे नियमित रूप से अपनी कसरत के वीडियो साझा करते हैं ताकि लोग घर पर रहकर भी अपनी फिटनेस पर ध्यान दे सकें। उनकी इस नई उपलब्धि के बाद फिटनेस फ्रीक्स और एथलीट्स के बीच एक नई बहस छिड़ गई है कि उम्र के साथ प्रदर्शन में सुधार कैसे किया जाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मिलिंद सोमन की इस उपलब्धि को लेकर काफी चर्चा हो रही है। लोग उनकी इच्छाशक्ति और अनुशासन की मिसाल दे रहे हैं। मिलिंद ने बताया कि इस ओपन-वॉटर स्विम को पूरा करने का मुख्य उद्देश्य खुद को एक नई चुनौती देना था। वे हमेशा से मानते आए हैं कि कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर ही व्यक्ति अपनी वास्तविक ताकत को पहचान सकता है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा और जल प्रदूषण के प्रति भी जागरूकता फैलाने का प्रयास किया। मिलिंद के अनुसार, समंदर को करीब से महसूस करना और उसकी विशालता को चुनौती देना उन्हें और अधिक विनम्र बनाता है।

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