जनमत का अपमान हुआ तो खाली हो जाएंगी विधानसभा की सीटें, विजय ने 'द्रविड़ किलों' को हिलाकर रख दिया

तमिलनाडु में दशकों से सत्ता का हस्तांतरण केवल दो पार्टियों के बीच होता रहा है, लेकिन विजय की 'तमिलगा वेट्री कज़गम' ने इस चक्र को पूरी तरह तोड़ दिया है। मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में विजय को मिले व्यापक जनसमर्थन के बाद, अब पार्टी

May 8, 2026 - 06:52
 0  3
जनमत का अपमान हुआ तो खाली हो जाएंगी विधानसभा की सीटें, विजय ने 'द्रविड़ किलों' को हिलाकर रख दिया
जनमत का अपमान हुआ तो खाली हो जाएंगी विधानसभा की सीटें, विजय ने 'द्रविड़ किलों' को हिलाकर रख दिया
  • तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल: अभिनेता विजय की पार्टी TVK का बड़ा फैसला, इस्तीफे की चेतावनी से सन्नाटा
  • लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, DMK-AIADMK की मिलीभगत पर TVK का कड़ा प्रहार

तमिलनाडु की राजनीतिक सरजमीं पर मई 2026 की यह तपिश केवल मौसम की नहीं, बल्कि सत्ता के संघर्ष और लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर छिड़ी एक नई जंग की है। अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) ने राज्य के राजनीतिक इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और साहसी कदम उठाने का ऐलान किया है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में टीवीके ने 234 में से 108 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सभी राजनीतिक पंडितों को गलत साबित कर दिया है। हालांकि, बहुमत के 118 के जादुई आंकड़े से कुछ ही कदम दूर रहने के कारण, अब राज्य में 'हंग असेंबली' (त्रिशंकु विधानसभा) की स्थिति बनी हुई है। इस बीच, टीवीके नेतृत्व ने एक कड़ा और अभूतपूर्व अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा है कि यदि पुरानी द्रविड़ पार्टियों ने जनादेश को दरकिनार कर सत्ता हथियाने की कोशिश की, तो उनके सभी विधायक सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। इस विवाद की जड़ें उन गोपनीय बैठकों में छिपी हैं, जिन्होंने राज्य की राजनीति में संदेह के बीज बो दिए हैं। दरअसल, चुनाव परिणामों के बाद एमके स्टालिन की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और ई पलानीस्वामी की ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच दो महत्वपूर्ण दौर की वार्ता हुई है। ये दोनों पार्टियां दशकों से एक-दूसरे की कट्टर विरोधी रही हैं, लेकिन टीवीके की अप्रत्याशित सफलता ने इन चिर-प्रतिद्वंदियों को एक मेज पर बैठने के लिए मजबूर कर दिया है। विजय की पार्टी का मानना है कि ये बैठकें राज्य की जनता द्वारा दिए गए 'बदलाव के वोट' को कुचलने की एक साजिश है। टीवीके को संदेह है कि डीएमके (59 सीटें) और एआईएडीएमके (47 सीटें) मिलकर एक ऐसा गठबंधन बनाने की फिराक में हैं, जिससे सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद टीवीके को विपक्ष में बैठने पर मजबूर किया जा सके।

टीवीके का रुख इस बार बेहद आक्रामक है, और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल सत्ता के लिए समझौता नहीं करेंगे। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि तमिलनाडु की जनता ने द्रविड़ पार्टियों के एकाधिकार को समाप्त करने के लिए वोट दिया है, न कि उन्हें पिछले दरवाजे से गठबंधन कर सरकार बनाने के लिए। यदि राज्यपाल द्वारा सबसे बड़ी पार्टी को दरकिनार किया जाता है और डीएमके या एआईएडीएमके में से कोई भी सरकार बनाने का दावा पेश करता है, तो टीवीके के सभी 108 निर्वाचित विधायक तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे देंगे। इस कदम का अर्थ यह होगा कि राज्य में एक बार फिर संवैधानिक संकट खड़ा हो जाएगा और जल्द ही दोबारा चुनाव कराने की स्थिति बन सकती है। यह चेतावनी उन पारंपरिक पार्टियों के लिए एक सीधा संदेश है जो जोड़-तोड़ की राजनीति में माहिर मानी जाती हैं। वर्तमान में तमिलनाडु विधानसभा की स्थिति कुछ इस प्रकार है: टीवीके (108), डीएमके (59), एआईएडीएमके (47), कांग्रेस (05) और अन्य। बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। हालांकि कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का वादा किया है, लेकिन फिर भी वे बहुमत से 5 सीटें दूर हैं। ऐसे में डीएमके और एआईएडीएमके का संभावित गठबंधन ही विजय के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। तमिलनाडु में दशकों से सत्ता का हस्तांतरण केवल दो पार्टियों के बीच होता रहा है, लेकिन विजय की 'तमिलगा वेट्री कज़गम' ने इस चक्र को पूरी तरह तोड़ दिया है। मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में विजय को मिले व्यापक जनसमर्थन के बाद, अब पार्टी का मानना है कि वे नैतिक रूप से सरकार बनाने के हकदार हैं। टीवीके के रणनीतिकारों का तर्क है कि जब जनता ने दो बड़ी पार्टियों को नकार दिया है, तो वे अनैतिक गठबंधन के जरिए राज्य पर शासन कैसे कर सकते हैं। इस्तीफे की यह चेतावनी न केवल एक राजनीतिक दांव है, बल्कि यह जनता के बीच अपनी छवि को 'सिद्धांतवादी' बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति भी है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि विजय अपनी पहली ही सियासी पारी में झुकने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुनने को तैयार हैं।

दूसरी ओर, डीएमके और एआईएडीएमके की ओर से आ रही प्रतिक्रियाएं संभली हुई हैं, लेकिन उनके भीतर टीवीके के उभार को लेकर भारी बेचैनी है। एमके स्टालिन की हार और एआईएडीएमके का तीसरे नंबर पर खिसकना यह दर्शाता है कि राज्य के युवा और शहरी मतदाता अब द्रविड़ विचारधारा के पारंपरिक स्वरूप से आगे निकलना चाहते हैं। यदि टीवीके के विधायक इस्तीफा देते हैं, तो इससे राज्य में जो वैक्यूम पैदा होगा, वह द्रविड़ आंदोलन की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाएगा। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या बीजेपी जैसी पार्टियां पर्दे के पीछे से इन द्रविड़ दलों को एक साथ लाने की कोशिश कर रही हैं ताकि कांग्रेस समर्थित टीवीके को सत्ता से दूर रखा जा सके। टीवीके ने इस 'अदृश्य मिलीभगत' को लोकतंत्र के लिए काला धब्बा करार दिया है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, राज्यपाल को सबसे पहले सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए। हालांकि, राज्यपाल को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि प्रस्तावित सरकार स्थिर हो। टीवीके के पास बहुमत साबित करने के लिए आवश्यक 118 विधायकों का लिखित समर्थन अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है, जिसका लाभ उठाकर विपक्षी खेमा अपनी चालें चल रहा है। विजय ने अपने विधायकों के साथ हुई बैठक में यह शपथ ली है कि वे जनता के विश्वास को किसी भी सूरत में बिकने नहीं देंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि राजनीति उनके लिए सेवा का माध्यम है, न कि सत्ता की लालसा। इस्तीफे की धमकी ने अब राज्यपाल के विवेक और आने वाले दिनों में होने वाली राजनीतिक उठापटक पर पूरे देश की नजरें टिका दी हैं।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow