बंगाल में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट, भाजपा ने दी तृणमूल कांग्रेस को जोरदार पटखनी।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की मतगणना की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। पिछले
- तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमाई चमक का जादू, अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके ने रचा इतिहास
- मतगणना के शुरुआती रुझानों ने सबको चौंकाया, दक्षिण में उदय तो पूर्व में भगवा लहर का बोलबाला
By Vijay Laxmi Singh (Editor- In- Chief)
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की मतगणना की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। पिछले कई दशकों से राज्य की राजनीति में अपना वर्चस्व रखने वाले क्षेत्रीय दलों को इस बार कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल करते हुए सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया है। राज्य की कुल 294 सीटों में से अधिकांश पर भाजपा के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि बंगाल की जनता ने इस बार बदलाव के पक्ष में मतदान किया है। मतों का यह अंतर इतना अधिक है कि कई क्षेत्रों में सत्तारूढ़ दल के दिग्गजों को भी अपनी सीट बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस चुनावी रण में भाजपा की रणनीति और उनके द्वारा उठाए गए स्थानीय मुद्दे जनता के बीच गहरे पैठ बनाने में सफल रहे हैं।
दक्षिण भारत के राजनीतिक परिदृश्य में इस बार एक नया अध्याय जुड़ता दिखाई दे रहा है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणामों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है क्योंकि यहाँ अभिनेता विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (टीवीके) ने अपने पहले ही चुनाव में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। रुझानों के अनुसार, टीवीके ने राज्य की 234 सीटों में से कई महत्वपूर्ण सीटों पर निर्णायक बढ़त बना ली है, जिससे वह किंगमेकर या मुख्य विजेता की भूमिका में नजर आ रही है। विजय की लोकप्रियता और उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों ने युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को बड़े पैमाने पर आकर्षित किया है। पारंपरिक रूप से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच बँटे रहने वाले तमिलनाडु में टीवीके का यह उभार राज्य की राजनीति में एक नया युग शुरू करने का संकेत दे रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव उनकी राजनीतिक यात्रा की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक साबित हो रहा है। भवानीपुर जैसी उनकी पारंपरिक सीट पर भी कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। राज्य के विभिन्न जिलों, विशेषकर उत्तर बंगाल और जंगलमहल क्षेत्र में भाजपा ने अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है। तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था के मुद्दों पर विपक्षी दलों ने जो घेराबंदी की थी, उसका असर अब परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भाजपा के कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है और वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में जश्न मनाना शुरू कर चुके हैं, जबकि सत्ता पक्ष के खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है। रुझान यह भी बताते हैं कि इस बार ग्रामीण मतदाताओं का झुकाव भी भाजपा की ओर अधिक रहा है।
चुनावी मैदान के महत्वपूर्ण आँकड़े
पश्चिम बंगाल: भाजपा को 150 से अधिक सीटों पर बढ़त, जबकि तृणमूल 100 के नीचे सिमटती दिख रही है।
तमिलनाडु: अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके 100 सीटों के जादुई आँकड़े के करीब, डीएमके गठबंधन को बड़ा नुकसान।
प्रमुख चेहरे: ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच कड़ी टक्कर, विजय अपने निर्वाचन क्षेत्र में भारी मतों से आगे।
तमिलनाडु में सत्ताधारी गठबंधन के लिए शुरुआती रुझान काफी निराशाजनक रहे हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाले गठबंधन को कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में टीवीके और एआईएडीएमके से कड़ी टक्कर मिल रही है। यहाँ का मुकाबला इस बार त्रिकोणीय हो गया है, जिसने चुनाव परिणामों को और अधिक रोमांचक बना दिया है। टीवीके की इस सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तमिलनाडु के लोग अब पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से इतर एक नया विकल्प खोज रहे हैं। विजय की रैलियों में उमड़ी भीड़ अब मतों में तब्दील होती दिख रही है। यदि यही रुझान अंतिम परिणामों में बदलते हैं, तो तमिलनाडु में दशकों पुराने गठबंधन और चुनावी रणनीतियाँ पूरी तरह से बदल सकती हैं।
बंगाल में भाजपा की इस बढ़त के पीछे संगठनात्मक मजबूती और गहन प्रचार अभियान को मुख्य कारण माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह से केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य में डेरा डाला था, उसका परिणाम अब ईवीएम खुलने के साथ नजर आ रहा है। कई सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेताओं का पिछड़ना पार्टी के भीतर भविष्य में होने वाले बड़े मंथन का संकेत दे रहा है। इसके साथ ही, इस चुनाव में महिलाओं के वोट बैंक में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जो पहले ममता बनर्जी का मजबूत पक्ष माना जाता था। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच हो रही मतगणना में हर राउंड के बाद भाजपा का पलड़ा भारी होता जा रहा है। तमिलनाडु की सीटों पर गौर करें तो विजय की पार्टी ने न केवल अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में बल्कि विपक्षी दलों के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में भी सेंध लगाई है। कोयंबटूर, मदुरै और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में टीवीके के उम्मीदवारों ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। एआईएडीएमके ने भी कुछ सीटों पर अपनी बढ़त बनाए रखी है, लेकिन मुख्य ध्यान विजय की पार्टी की ओर ही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या विजय आने वाले समय में राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में उभरेंगे। उनके समर्थकों में भारी जोश है और सड़कों पर उत्सव का माहौल देखा जा सकता है।
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