बंगाल में खिलेगा कमल? रुझानों में भाजपा ने पार किया बहुमत का जादुई आंकड़ा, टीएमसी के गढ़ ढहे।

पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए हो रही मतगणना के शुरुआती चरणों ने ही चुनावी विश्लेषकों को चकित कर

May 4, 2026 - 12:32
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बंगाल में खिलेगा कमल? रुझानों में भाजपा ने पार किया बहुमत का जादुई आंकड़ा, टीएमसी के गढ़ ढहे।
बंगाल में खिलेगा कमल? रुझानों में भाजपा ने पार किया बहुमत का जादुई आंकड़ा, टीएमसी के गढ़ ढहे।
  • ममता बनर्जी के गढ़ में बड़ी सेंधमारी: भगवा लहर में बह गई सत्ताधारी पार्टी, बंगाल में सत्ता परिवर्तन के प्रबल संकेत

पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए हो रही मतगणना के शुरुआती चरणों ने ही चुनावी विश्लेषकों को चकित कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने रुझानों में निर्णायक बढ़त हासिल करते हुए बहुमत के लिए जरूरी 148 के आंकड़े को काफी पीछे छोड़ दिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, भाजपा फिलहाल 172 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस 112 सीटों के आसपास संघर्ष करती नजर आ रही है। यह पहली बार है जब बंगाल में भाजपा इतनी बड़ी और स्पष्ट बढ़त के साथ सत्ता की ओर बढ़ती दिख रही है। राज्य के विभिन्न मतगणना केंद्रों से आ रहे नतीजे यह संकेत दे रहे हैं कि जनता ने इस बार परिवर्तन के पक्ष में एकतरफा मतदान किया है। विशेष रूप से उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा की बढ़त इतनी अधिक है कि वहां टीएमसी के उम्मीदवारों के लिए वापसी करना लगभग असंभव होता जा रहा है। कोलकाता की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के बीच चल रही जंग ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। शुरुआती पांच राउंड की गिनती के बाद शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर लगभग 3,500 मतों की बढ़त बना ली है। हालांकि ममता बनर्जी ने कुछ राउंड में वापसी की कोशिश की, लेकिन शहरी मतदाताओं का झुकाव इस बार भाजपा की ओर स्पष्ट रूप से दिख रहा है। भवानीपुर के साथ-साथ कोलकाता की अन्य महत्वपूर्ण सीटों जैसे अलीपुर, टॉलीगंज और बेहाला में भी तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा के इस प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि उसका प्रभाव केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उसने शहरी मध्यमवर्ग के बीच भी अपनी पैठ गहरी कर ली है।

राज्य के जंगलमहल और उत्तर बंगाल के इलाकों में तो भगवा लहर ने तृणमूल कांग्रेस का पूरी तरह सफाया कर दिया है। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कोचबिहार और अलीपुरद्वार जैसे जिलों की लगभग सभी सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार हजारों मतों के अंतर से आगे चल रहे हैं। जंगलमहल के पुरुलिया, बांकुरा और झाड़ग्राम में भी भाजपा ने अपनी पिछली बढ़त को बरकरार रखते हुए टीएमसी के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है। इन क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों और स्थानीय निवासियों ने भ्रष्टाचार और स्थानीय स्तर पर व्याप्त विसंगतियों को मुद्दा बनाकर सत्ताधारी दल के खिलाफ वोट किया है। मतगणना के रुझान यह भी बताते हैं कि मतों का ध्रुवीकरण इस बार भाजपा के पक्ष में बहुत अधिक संगठित तरीके से हुआ है, जिससे तृणमूल कांग्रेस के समीकरण पूरी तरह बिगड़ गए हैं। दक्षिण 24 परगना और उत्तर 24 परगना, जो कभी तृणमूल कांग्रेस के लिए सत्ता की चाबी माने जाते थे, वहां भी इस बार परिणाम चौंकाने वाले आ रहे हैं। संदेशखाली और आरजी कर जैसी हालिया संवेदनशील घटनाओं का सीधा असर इन जिलों की सीटों पर देखने को मिल रहा है। महिला मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग, जो कभी ममता बनर्जी का सबसे मजबूत स्तंभ था, इस बार सुरक्षा और न्याय के मुद्दे पर भाजपा की ओर मुड़ता हुआ नजर आया है। उत्तर 24 परगना की बशीरहाट और बारासात जैसी सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों की बढ़त ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जमीनी स्तर पर असंतोष काफी गहरा था। टीएमसी के जो नेता पहले अजेय माने जाते थे, वे अब अपने ही निर्वाचन क्षेत्रों में तीसरे या चौथे राउंड की गिनती के बाद पिछड़ते जा रहे हैं।

मतगणना की प्रक्रिया के बीच तृणमूल कांग्रेस के मुख्यालयों में छाई खामोशी बहुत कुछ बयां कर रही है। राज्य भर में टीएमसी के कार्यकर्ताओं के बीच हताशा है, जबकि भाजपा समर्थकों ने 'जय श्री राम' के नारों के साथ सड़कों पर जश्न मनाना शुरू कर दिया है। हुगली और हावड़ा जैसे औद्योगिक जिलों में भी भाजपा ने अपनी स्थिति बहुत मजबूत की है। सिंगूर, जो कभी ममता बनर्जी के राजनीतिक उत्थान का केंद्र था, वहां भी भाजपा उम्मीदवार ने अच्छी बढ़त बनाई हुई है। यह रुझान दिखाते हैं कि बंगाल की जनता ने विकास और नई औद्योगिक नीति की उम्मीद में भाजपा के 'सोनार बांग्ला' के वादे पर भरोसा जताया है। वामपंथी दल और कांग्रेस इस चुनावी मुकाबले में कहीं भी प्रभावी भूमिका में नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे राज्य की राजनीति पूरी तरह दो-ध्रुवीय हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस चुनाव में जो रणनीतियां अपनाई थीं, उनका प्रतिफल अब ईवीएम के परिणामों के रूप में सामने आ रहा है। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ने का प्रयास भाजपा के लिए फलदायी रहा है। मत प्रतिशत के मामले में भी भाजपा ने इस बार तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी है और कई क्षेत्रों में उसे पछाड़ दिया है। यह चुनाव परिणाम न केवल बंगाल की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी भाजपा के लिए एक बड़ी नैतिक जीत बनकर उभरेंगे। शाम तक जैसे-जैसे अंतिम परिणामों की घोषणा होगी, भाजपा के बहुमत का आंकड़ा और भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जो राज्य में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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