तमिलनाडु में विजय का महा-उदय: टीवीके की ऐतिहासिक बढ़त ने द्रविड़ राजनीति के किले को हिलाया।
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए जारी मतगणना के शुरुआती घंटों ने भारतीय राजनीति के फलक पर एक
- बंगाल में भाजपा की प्रचंड लहर: ममता बनर्जी के गढ़ में बड़ी सेंधमारी और सत्ता परिवर्तन के संकेत
- मतगणना के रुझानों में भारी उलटफेर: दक्षिण में अभिनेता विजय का जादू तो पूर्व में कमल का कमाल
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए जारी मतगणना के शुरुआती घंटों ने भारतीय राजनीति के फलक पर एक नई इबारत लिख दी है। तमिलनाडु की बात करें तो यहाँ की राजनीति में दशकों से चले आ रहे द्रविड़ पार्टियों के एकाधिकार को अभिनेता विजय की नई पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने जबरदस्त चुनौती दी है। सुबह 10:45 बजे तक के आधिकारिक रुझानों के अनुसार, टीवीके राज्य की 234 सीटों में से 98 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिसने राज्य के राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। यह प्रदर्शन किसी भी नई पार्टी के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि विजय की पार्टी ने न केवल ग्रामीण इलाकों में बल्कि द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के पारंपरिक शहरी गढ़ों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। शुरुआती रुझानों में टीवीके का सबसे बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरना इस बात का प्रमाण है कि राज्य की जनता अब एक वैकल्पिक नेतृत्व की ओर देख रही है।
पश्चिम बंगाल की स्थिति भी तमिलनाडु से कम चौंकाने वाली नहीं है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी ने अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शन की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। राज्य की 294 सीटों के लिए हो रही मतगणना में भाजपा बहुमत के जादुई आंकड़े 148 को पार करते हुए 170 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यह पहली बार है जब बंगाल में भाजपा इतनी निर्णायक स्थिति में नजर आ रही है। तृणमूल कांग्रेस, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से सत्ता पर काबिज है, इस बार काफी पीछे छूटती दिख रही है और उसके खाते में फिलहाल 110 के आसपास सीटें ही जाती नजर आ रही हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर उत्तर बंगाल और जंगलमहल में भाजपा की सुनामी देखी जा रही है, जहाँ विपक्षी उम्मीदवारों ने भारी मतों के अंतर से बढ़त हासिल की है। तमिलनाडु में सत्ताधारी गठबंधन के लिए परिणाम काफी निराशाजनक दिख रहे हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाला डीएमके गठबंधन (DMK+) महज 42 सीटों पर सिमटता हुआ दिख रहा है, जो उनकी पिछली जीत की तुलना में एक बड़ी गिरावट है। दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले एआईएडीएमके गठबंधन (AIADMK+) ने 67 सीटों पर बढ़त बनाकर अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की है, लेकिन वे भी टीवीके की लहर के सामने फीके पड़ते नजर आ रहे हैं। सबसे दिलचस्प मुकाबला कोलाथुर और तिरुचिरापल्ली पूर्वी जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों पर है। कोलाथुर में स्वयं मुख्यमंत्री स्टालिन कुछ राउंड की गिनती के बाद टीवीके उम्मीदवार से पीछे चल रहे हैं, जो इस चुनाव की सबसे बड़ी खबर बनकर उभरी है। वहीं तिरुचि ईस्ट से अभिनेता विजय खुद भारी मतों से बढ़त बनाए हुए हैं।
प्रमुख सीटों का ताजा हाल (सुबह 11:00 बजे तक)
भवानीपुर (बंगाल): भाजपा के शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से 1,500 से अधिक मतों से आगे चल रहे हैं।
कोलाथुर (तमिलनाडु): मुख्यमंत्री एमके स्टालिन टीवीके के उम्मीदवार वीएस बाबू से पिछड़ रहे हैं।
पाणिहाटी (बंगाल): आरजी कर पीड़िता की मां भाजपा के टिकट पर निर्णायक बढ़त बनाए हुए हैं।
तिरुचि ईस्ट (तमिलनाडु): टीवीके प्रमुख विजय अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से 5,000 वोटों से आगे।
बंगाल के चुनावी रुझानों में सबसे बड़ा मुद्दा 'सत्ता विरोधी लहर' और कानून-व्यवस्था बनकर उभरा है। भाजपा ने संदेशखाली और आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसी घटनाओं को केंद्र में रखकर जो अभियान चलाया था, वह मतदाताओं के बीच गहराई तक असर कर गया है। विशेष रूप से महिला मतदाताओं के बीच भाजपा की पैठ बढ़ी है, जिसका सीधा नुकसान तृणमूल कांग्रेस को उठाना पड़ा है। कई राउंड की गिनती के बाद यह स्पष्ट होता जा रहा है कि ग्रामीण बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस की पकड़ कमजोर हुई है। दक्षिण बंगाल के उन जिलों में भी जहाँ ममता बनर्जी का एकछत्र राज था, वहां भाजपा के उम्मीदवार कड़ी टक्कर दे रहे हैं। यदि यही रुझान अंतिम परिणामों में तब्दील होते हैं, तो यह बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होगी, जहाँ तीन दशक के वामपंथ और एक दशक के तृणमूल शासन के बाद पहली बार दक्षिणपंथी विचारधारा वाली सरकार बनेगी।
तमिलनाडु में टीवीके की बढ़त के पीछे युवाओं का भारी समर्थन और अभिनेता विजय की 'सिनेमाई करिश्मा' एक प्रमुख कारक रहा है। टीवीके ने अपने घोषणापत्र में जिन बदलावों का वादा किया था, उन्हें मतदाताओं ने हाथों-हाथ लिया है। राज्य के डेल्टा क्षेत्रों और कोंगु क्षेत्र में भी टीवीके ने एआईएडीएमके और डीएमके के समीकरणों को बिगाड़ दिया है। विजय की पार्टी ने सामाजिक कल्याण और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दों को जिस तरह से पेश किया, उसने पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को सबसे अधिक प्रभावित किया। यह चुनाव परिणाम यह भी दर्शाते हैं कि तमिलनाडु में अब पुरानी 'द्रविड़ विचारधारा' बनाम 'द्रविड़ विचारधारा' की लड़ाई के बजाय एक नई 'तमिल पहचान' और 'सुशासन' की मांग जोर पकड़ रही है। राजनीतिक परिदृश्य में बंगाल का चुनाव एक 'वैचारिक युद्ध' के रूप में देखा जा रहा था। भाजपा की बढ़त ने यह साबित कर दिया है कि राज्य में ध्रुवीकरण और स्थानीय मुद्दों के मेल ने काम किया है। ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय भवानीपुर सीट है, जहाँ वे खुद संघर्ष करती नजर आ रही हैं। इसके अलावा, उनके मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवारों से काफी पीछे चल रहे हैं। भाजपा के स्थानीय नेतृत्व ने जिस तरह से जमीनी स्तर पर बूथ प्रबंधन किया, उसने सत्ता पक्ष की मशीनरी को कड़ी चुनौती दी है। बंगाल के मध्यम वर्ग और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और औद्योगिक पिछड़ेपन को लेकर जो नाराजगी थी, वह आज मतपेटियों के जरिए बाहर निकलती दिख रही है।
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