पश्चिम बंगाल चुनाव में हिंसा पर कांग्रेस का कड़ा प्रहार: उदित राज ने चुनावी प्रक्रिया की शुचिता पर उठाए गंभीर सवाल।

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में चुनावी सरगर्मी एक बार फिर अपने चरम पर है, क्योंकि निर्वाचन आयोग ने धांधली

By INA News Desk
May 2, 2026 - 17:48
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पश्चिम बंगाल चुनाव में हिंसा पर कांग्रेस का कड़ा प्रहार: उदित राज ने चुनावी प्रक्रिया की शुचिता पर उठाए गंभीर सवाल।
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  • दक्षिण 24 परगना के 15 बूथों पर दोबारा मतदान: सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ता राजनीतिक टकराव और बिगड़ती कानून व्यवस्था
  • बंगाल की 'असाधारण' चुनावी संस्कृति में हिंसा का प्रवेश: टीएमसी और भाजपा की प्रतिद्वंद्विता के बीच पिसता आम मतदाता

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में चुनावी सरगर्मी एक बार फिर अपने चरम पर है, क्योंकि निर्वाचन आयोग ने धांधली और हिंसा की शिकायतों के बाद 2 मई को दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया है। इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उदित राज ने राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को बेहद चिंताजनक करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बंगाल का चुनाव अब एक 'असाधारण' श्रेणी में आ गया है, जहां लोकतंत्र के पर्व के साथ हिंसा का जुड़ना एक नियमित प्रक्रिया बन गई है। मगराहाट पश्चिम के 11 बूथों और डायमंड हारबर के 4 बूथों पर हो रहे इस पुनर्मतदान ने निर्वाचन आयोग की तैयारियों और राज्य सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। उदित राज का मानना है कि दोबारा मतदान होना लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है और यह चुनावी मशीनरी की विफलता को दर्शाता है।

राज्य में बढ़ती हिंसा के कारणों का विश्लेषण करते हुए कांग्रेस नेता ने सीधे तौर पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को निशाने पर लिया है। उनका कहना है कि जब से राज्य में टीएमसी की सरकार आई है, राजनीतिक हिंसा एक सामान्य परिपाटी बन गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस हिंसा की आग में घी डालने का काम भाजपा के आगमन ने किया है। उदित राज के अनुसार, इन दोनों दलों के बीच वर्चस्व की लड़ाई ने बंगाल की उस छवि को धूमिल कर दिया है, जिसे कभी इसकी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के लिए जाना जाता था। उनके अनुसार, पहले बंगाल को हिंसा के केंद्र के रूप में नहीं पहचाना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक रंजिशों ने जमीनी स्तर पर माहौल को पूरी तरह जहरीला बना दिया है। दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आने वाले मगराहाट पश्चिम और डायमंड हारबर विधानसभा क्षेत्रों में 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान व्यापक पैमाने पर अनियमितताओं की खबरें सामने आई थीं। निर्वाचन आयोग को मिली शिकायतों में ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़, मतदान केंद्रों पर कब्जा करने की कोशिश और मतदाताओं को डराने-धमकने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। विशेष रूप से कुछ बूथों पर ईवीएम के बटनों पर काली टेप या चिपचिपा पदार्थ लगाए जाने की बात भी सामने आई थी, ताकि मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट न दे सकें। इन विसंगतियों के आधार पर रिटर्निंग अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के बाद निर्वाचन आयोग ने पूर्व में हुए मतदान को शून्य घोषित कर दिया और 2 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक पुनर्मतदान का आदेश जारी किया। दक्षिण 24 परगना के कुल 15 मतदान केंद्रों पर दोबारा वोट डाले जा रहे हैं। इनमें मगराहाट पश्चिम के 11 और डायमंड हारबर के 4 बूथ शामिल हैं। सुरक्षा के लिहाज से इन क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किया गया है और सीसीटीवी कैमरों के जरिए मतदान की हर गतिविधि पर सीधी नजर रखी जा रही है।

उदित राज ने सुरक्षा प्रबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हालांकि प्रशासन ने अब कड़े इंतजाम किए हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि प्रारंभिक चरण में ऐसी चूक क्यों हुई जिससे दोबारा मतदान की नौबत आई। दोबारा मतदान का मतलब न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि यह मतदाताओं के विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है। कांग्रेस नेता का तर्क है कि यदि चुनाव के पहले चरण से ही निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाती, तो आम नागरिक बिना किसी भय के अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाते। बंगाल की वर्तमान स्थिति को उन्होंने एक ऐसी चुनौती बताया है जहां राजनीतिक दल नीतियों के बजाय बाहुबल के सहारे चुनाव जीतने की कोशिश कर रहे हैं, जो अंततः चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को ही कम कर रहा है। पश्चिम बंगाल के इस चुनावी रण में टीएमसी और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी काफी तेज हो गया है। जहां एक ओर भाजपा ने इन 15 बूथों पर धांधली का आरोप लगाते हुए पुनर्मतदान के निर्णय का स्वागत किया है, वहीं टीएमसी ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। टीएमसी का दावा है कि केंद्रीय बलों के साये में हो रहे इस चुनाव में जानबूझकर राज्य सरकार के कर्मचारियों को गणना और पर्यवेक्षण प्रक्रिया से दूर रखा जा रहा है। इस बीच, उदित राज ने इन दोनों बड़े खिलाड़ियों के टकराव के बीच बंगाल की जनता की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया है। उन्होंने चिंता जताई कि चुनावी हिंसा के कारण आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों में एक प्रकार का भय व्याप्त है कि मतदान केंद्रों पर जाना उनकी सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।

ऐतिहासिक रूप से बंगाल की राजनीति को समझने का प्रयास करते हुए उदित राज ने कहा कि इस राज्य का एक गौरवशाली अतीत रहा है, लेकिन वर्तमान नेतृत्व और प्रतिद्वंद्विता ने इसे रक्तपात के मैदान में बदल दिया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हिंसा केवल मतदान के दिन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि चुनाव पूर्व और चुनाव पश्चात भी जारी रहती है, जो कि लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। मगराहाट और डायमंड हारबर जैसे क्षेत्रों में दोबारा मतदान की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए प्रशासन ने इस बार ड्रोन सर्विलांस और माइक्रो-ऑब्जर्वर्स की सहायता ली है। उदित राज का मानना है कि जब तक राजनीतिक दलों की मानसिकता में बदलाव नहीं आएगा और वे लोकतंत्र को युद्ध के मैदान की तरह देखना बंद नहीं करेंगे, तब तक बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव का सपना अधूरा ही रहेगा। आने वाले दिनों में इस पुनर्मतदान के परिणाम और राज्य के अन्य हिस्सों में होने वाले चुनावी चरणों पर सबकी निगाहें टिकी हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी यदि आवश्यकता पड़ी तो सख्त कदम उठाए जाएंगे। उदित राज के बयान ने इस चुनावी विमर्श को नई दिशा दी है कि किस तरह बंगाल की चुनावी राजनीति में 'हिंसा' एक नया सामान्य (न्यू नॉर्मल) बनती जा रही है। 2 मई को हो रहा यह मतदान केवल 15 बूथों का मामला नहीं है, बल्कि यह निर्वाचन प्रणाली की उस अग्निपरीक्षा जैसा है जहां उसे खुद को निष्पक्ष और सुरक्षित साबित करना है। अंततः, बंगाल के मतदाताओं की सुरक्षा और उनके मत की पवित्रता बनाए रखना ही शासन और प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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