हरिद्वार के सर्वानंद घाट पर पालतू कुत्ते को गंगा स्नान कराने पर भारी विवाद: आस्था और मर्यादा पर छिड़ी तीखी बहस।
उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा नदी की पवित्रता और घाटों की मर्यादा को लेकर एक बार फिर गंभीर विवाद खड़ा हो
- धर्मनगरी की पवित्रता से खिलवाड़ पर भड़के श्रद्धालु: गंगा के पावन तट पर महिला की हरकत से मर्यादा तार-तार
- सोशल मीडिया पर वायरल हुआ सर्वानंद घाट का वीडियो: पालतू पशु को पतित पावनी में नहलाने पर स्थानीय लोगों ने जताया कड़ा विरोध
उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा नदी की पवित्रता और घाटों की मर्यादा को लेकर एक बार फिर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। खड़खड़ी क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध सर्वानंद घाट पर उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक महिला अपने पालतू कुत्ते को लेकर गंगा में स्नान कराने पहुंच गई। हरिद्वार के इन घाटों को हिंदू धर्म में अत्यंत पूजनीय माना जाता है और यहाँ दूर-दराज से लोग डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करने आते हैं। ऐसे में महिला द्वारा अपने पालतू पशु को पवित्र जल में नहलाते देख वहां मौजूद अन्य श्रद्धालु और स्थानीय तीर्थ पुरोहित आक्रोशित हो उठे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला बिना किसी संकोच के कुत्ते को पानी में ले गई और उसे रगड़-रगड़ कर नहलाने लगी, जो धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध माना जाता है। जैसे ही महिला ने कुत्ते को गंगा की मुख्य धारा में उतारना शुरू किया, पास ही मौजूद लोगों ने उसे रोकने का प्रयास किया। देखते ही देखते शांत रहने वाला सर्वानंद घाट बहस और हंगामे के केंद्र में तब्दील हो गया। लोगों का तर्क था कि गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और यहाँ पशुओं को नहलाना न केवल धार्मिक अपमान है, बल्कि यह स्वच्छता के नियमों का भी उल्लंघन है। विरोध कर रहे लोगों ने महिला को समझाने की कोशिश की कि गंगा स्नान के लिए निश्चित मर्यादाएं और परंपराएं निर्धारित हैं। हालांकि, महिला अपनी बात पर अड़ी रही, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। वहां मौजूद यात्रियों ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया, जो अब इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।
विवाद बढ़ने पर घाट पर भारी भीड़ जमा हो गई और महिला तथा विरोध कर रहे लोगों के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। महिला का तर्क था कि वह अपने पालतू जानवर से प्रेम करती है और उसे गंगा में नहलाने में कुछ गलत नहीं लगता, जबकि स्थानीय लोगों ने इसे सनातन परंपराओं पर प्रहार बताया। स्थिति को बिगड़ता देख महिला के साथ आए उसके परिजनों ने हस्तक्षेप किया। परिजनों ने आसपास के लोगों के आक्रोश को भांपते हुए महिला को वहां से हटने के लिए मनाया। काफी देर तक चली इस जद्दोजहद के बाद, परिवार महिला और उसके पालतू कुत्ते को लेकर वहां से रवाना हो गया। इस घटना ने घाटों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और प्रशासन की सतर्कता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हरिद्वार नगर निगम और जिला प्रशासन ने गंगा के मुख्य घाटों पर पालतू पशुओं को नहलाने, कपड़े धोने और गंदगी फैलाने पर सख्त पाबंदी लगा रखी है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माने और दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है, ताकि नदी की निर्मलता और धार्मिक गरिमा बनी रहे, इस घटना का वीडियो जैसे ही विभिन्न डिजिटल मंचों पर प्रसारित हुआ, लोगों ने इसे आस्था के साथ खिलवाड़ करार दिया। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि महिला किस तरह अन्य श्रद्धालुओं की मौजूदगी में अपने कुत्ते को नहला रही है। प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद इस तरह की लापरवाही सामने आने से तीर्थ पुरोहितों में गहरा रोष है। पुरोहितों का कहना है कि हरिद्वार के घाटों पर हर की पैड़ी के समान ही नियमों का पालन होना चाहिए। यदि इसी तरह लोग अपनी मनमानी करते रहे, तो घाटों की पवित्रता को सुरक्षित रखना असंभव हो जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर से घाटों पर सख्त निगरानी तंत्र की आवश्यकता को बल दिया है ताकि आने वाले समय में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।
धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो हरिद्वार के सप्त ऋषि क्षेत्र और सर्वानंद घाट का विशेष महत्व है। यहाँ बड़ी संख्या में साधु-संत और गृहस्थ जन ध्यान और तर्पण के लिए आते हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बाहरी क्षेत्रों से आने वाले कुछ पर्यटक स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान नहीं करते, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ता है। गंगा को मां मानने वाले भक्तों के लिए यह दृश्य अत्यंत पीड़ादायक था। लोगों का मानना है कि पालतू पशुओं के प्रति प्रेम एक निजी विषय हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर इसे थोपना उचित नहीं है। इस विवाद के बाद अब स्थानीय संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि घाटों के प्रवेश द्वारों पर स्पष्ट सूचना पट्ट लगाए जाएं जिनमें वर्जित कार्यों का उल्लेख हो। कानूनी तौर पर भी गंगा के जल को प्रदूषित करना और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना अपराध की श्रेणी में आता है। उत्तराखंड पुलिस और 'मर्यादा' अभियान के तहत समय-समय पर घाटों पर चेकिंग अभियान चलाया जाता है, लेकिन सर्वानंद घाट जैसे कुछ कम भीड़ वाले क्षेत्रों में लोग नियमों की धज्जियां उड़ाते पाए जाते हैं। स्थानीय प्रशासन ने इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच की बात कही है। यदि महिला की पहचान हो जाती है, तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने और धर्मनगरी की मर्यादा सुनिश्चित करने के लिए वे पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और गश्त बढ़ाई जा रही है।
What's Your Reaction?









