ब्यूरोक्रेसी छोड़ अब राजनीति के मैदान में उतरेंगे अलंकार अग्निहोत्री, 403 सीटों पर ताल ठोकने की तैयारी

उनके विरोध के मुख्य बिंदुओं में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ नए नियम और संत समाज के प्रति प्रशासन का व्यवहार प्रमुख रहे हैं। उन्होंने अपनी सेवा के दौरान ही कुछ ऐसे मुद्दों पर असहमति जताई थी, जिन्हें वे समाज के लिए हानिकारक मानते थे।

May 9, 2026 - 09:13
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ब्यूरोक्रेसी छोड़ अब राजनीति के मैदान में उतरेंगे अलंकार अग्निहोत्री, 403 सीटों पर ताल ठोकने की तैयारी
ब्यूरोक्रेसी छोड़ अब राजनीति के मैदान में उतरेंगे अलंकार अग्निहोत्री, 403 सीटों पर ताल ठोकने की तैयारी
  • उत्तर प्रदेश में नई सियासी हलचल, पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने किया राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा का गठन
  • इस्तीफा और निलंबन के बाद अब सीधे चुनावी समर में उतरे पूर्व पीसीएस अधिकारी, राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा का बजा डंका

उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक गलियारों से निकलकर राजनीति की मुख्यधारा में कदम रखने वाले पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने भविष्य की रणनीति को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने औपचारिक रूप से अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा' के गठन की घोषणा की है। फिरोजाबाद में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने इस नए संगठन के माध्यम से उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने का संकल्प लिया। प्रशासनिक सेवा के दौरान अपनी कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में रहने वाले इस पूर्व अधिकारी ने अब जनसेवा के लिए सीधे चुनावी राजनीति का मार्ग चुना है। उनकी यह घोषणा प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों में एक नया आयाम जोड़ती दिख रही है, क्योंकि एक पूर्व अधिकारी का इस तरह सीधे पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतरना बहुत कम देखा जाता है।

राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के गठन के साथ ही अलंकार अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी व्यापक योजना साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के पीछे उनका मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए एक नए विकल्प की आवश्यकता है। फिरोजाबाद की धरती से चुनावी हुंकार भरते हुए उन्होंने संकेत दिए कि उनका संगठन केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के हर कोने में जाकर जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा। सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय यह दर्शाता है कि वे अपनी पार्टी को एक बड़े विकल्प के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

गठबंधन की संभावनाओं पर बात करते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने काफी संतुलित रुख अपनाया है। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए किसी भी दल के साथ तुरंत हाथ मिलाने से परहेज किया है। उनका कहना है कि गठबंधन का निर्णय चुनाव के समय की परिस्थितियों, वोट बैंक की मजबूती और उस समय बनने वाले समीकरणों के आधार पर लिया जाएगा। उनका मानना है कि विचारधारा के स्तर पर जो दल उनके विजन के करीब होंगे, उनके साथ भविष्य में बातचीत के रास्ते खुले रखे जा सकते हैं। हालांकि, वर्तमान में उनका पूरा ध्यान संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर केंद्रित है, ताकि चुनाव के समय पार्टी एक निर्णायक भूमिका में खड़ी हो सके।

अलंकार अग्निहोत्री के इस राजनीतिक सफर की शुरुआत उनके प्रशासनिक पद से इस्तीफे के बाद हुई। जनवरी 2026 में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद पर रहते हुए उन्होंने अचानक अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को चौंका दिया था। उनके इस्तीफे के पीछे धार्मिक भावनाओं और कुछ विशेष कानूनों के प्रति उनके कड़े रुख को माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें अनुशासनहीनता के आधार पर निलंबित भी कर दिया था, लेकिन उन्होंने अपने स्टैंड पर कायम रहते हुए सरकारी सेवा के बजाय जनसेवा के लिए राजनीति को माध्यम बनाने का फैसला किया। उनका इस्तीफा न केवल प्रशासनिक गलियारों में बल्कि सार्वजनिक विमर्श का भी बड़ा विषय बना था।

पूर्व अधिकारी ने अपनी नई पारी की शुरुआत के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का भी सहारा लिया है। हाल ही में उन्होंने प्रयागराज में संगम तट पर स्थित लेटे हुए हनुमान मंदिर में दर्शन पूजन कर आशीर्वाद लिया और वहीं से अपनी राजनीतिक पारी की औपचारिक शुरुआत के संकेत दिए थे। वे खुद को एक ऐसे विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं जो व्यवस्था की खामियों को भीतर से देख चुका है और अब उसे बाहर से बदलने की इच्छा रखता है। उनके समर्थक उन्हें एक ईमानदार और दृढ़ निश्चयी व्यक्तित्व के रूप में देख रहे हैं, जो भ्रष्टाचार और प्रशासनिक शिथिलता के खिलाफ एक मजबूत आवाज बन सकते हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि, विशेषकर आईआईटी बीएचयू से इंजीनियरिंग और फिर पीसीएस में सफलता, युवाओं के बीच उनकी एक अलग छवि निर्मित कर रही है। उनके विरोध के मुख्य बिंदुओं में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ नए नियम और संत समाज के प्रति प्रशासन का व्यवहार प्रमुख रहे हैं। उन्होंने अपनी सेवा के दौरान ही कुछ ऐसे मुद्दों पर असहमति जताई थी, जिन्हें वे समाज के लिए हानिकारक मानते थे। विशेष रूप से उच्च शिक्षा में लागू किए गए कुछ हालिया प्रावधानों को उन्होंने जनविरोधी करार दिया था। इसके अलावा, प्रयागराज माघ मेले के दौरान संतों के साथ हुए व्यवहार और ब्राह्मण अस्मिता से जुड़े विषयों पर भी उन्होंने काफी मुखर होकर अपनी बात रखी थी। इन्हीं वैचारिक असहमतियों ने उन्हें अंततः नौकरी छोड़कर राजनीतिक दल गठित करने की ओर प्रेरित किया, ताकि वे इन मुद्दों को विधानसभा के भीतर मजबूती से उठा सकें।

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