थरूर ने की पीएम मोदी और अमित शाह की तारीफ, कहा- उनकी चुनावी कुशलता से लेनी चाहिए सीख।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के हालिया नतीजों के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि
- बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत पर थरूर का बड़ा बयान, कांग्रेस को दी आत्मनिरीक्षण की नसीहत
- 'विरोधी भी अच्छा काम करें तो प्रशंसा होनी चाहिए', थरूर ने भाजपा के संगठन कौशल को सराहा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के हालिया नतीजों के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। अपनी ही पार्टी के भीतर अक्सर अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाने वाले थरूर ने भारतीय जनता पार्टी की चुनावी जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की कार्यशैली की जमकर सराहना की है। उन्होंने अपनी पार्टी को नसीहत देते हुए कहा कि विरोधियों की संगठनात्मक क्षमता और चुनावी रणनीति से सीखने में कोई बुराई नहीं है। उनके इस बयान ने एक बार फिर कांग्रेस के भीतर मंथन और रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों के परिणामों ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बंगाल में भाजपा द्वारा 200 से अधिक सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल करने के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने चुनावों को संचालित करने के मामले में "शानदार काम" किया है। थरूर ने उनके पेशेवर दृष्टिकोण और मजबूत संगठनात्मक ढांचे की सराहना करते हुए स्वीकार किया कि भाजपा चुनावी रण में अपनी पूरी ताकत और संसाधनों को झोंकने में बहुत निपुण है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस इन महत्वपूर्ण राज्यों में अपना वजूद बचाने के लिए संघर्ष कर रही है और पार्टी के भीतर भविष्य की राह को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
थरूर ने भाजपा की जीत का विश्लेषण करते हुए बताया कि उनकी सफलता के पीछे केवल प्रचार नहीं, बल्कि एक सूक्ष्म स्तर पर तैयार किया गया संगठन है। उन्होंने कहा कि भाजपा जिस तरह से पेशेवर रूप से संगठित है और जिस गंभीरता के साथ प्रत्येक चुनाव लड़ती है, वह सीखने योग्य है। उनके अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने प्रतिद्वंद्वी की ताकत को समझे और उससे प्रेरणा लेकर अपनी कमियों को दूर करे। थरूर का मानना है कि भाजपा ने बंगाल जैसे कठिन राज्य में अपनी पैठ जमाकर यह साबित किया है कि सही रणनीति और संसाधनों के उचित प्रबंधन से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। कांग्रेस नेता ने अपनी पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब कांग्रेस को "गंभीर आत्मनिरीक्षण" करने की आवश्यकता है। उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि जहाँ केरल में पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया और जीत हासिल की, वहीं अन्य राज्यों में वह पिछड़ गई। थरूर ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस केरल में सफल हो सकती है, तो वह अन्य राज्यों में वैसी ही एकजुटता और रणनीतिक कौशल क्यों नहीं दिखा पाती? उन्होंने नसीहत दी कि पार्टी को केवल आलोचना करने के बजाय अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर ध्यान देना चाहिए।
केरल बनाम अन्य राज्य - एक तुलनात्मक अध्ययन
शशि थरूर ने केरल चुनावों में कांग्रेस की जीत को एक मॉडल के रूप में पेश किया है। उनके अनुसार, केरल में पार्टी ने स्थानीय स्तर पर एकजुट होकर चुनाव लड़ा और सांसदों को भी विधानसभा चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाने की छूट दी। इसके विपरीत, बंगाल और असम में पार्टी के भीतर समन्वय की भारी कमी देखी गई। थरूर का तर्क है कि जब तक कांग्रेस क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट रणनीति के साथ नहीं उतरेगी, तब तक राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की संगठनात्मक मशीनरी का मुकाबला करना कठिन होगा। प्रशंसा के साथ-साथ थरूर ने एक चेतावनी भी साझा की। उन्होंने कहा कि हालांकि भाजपा चुनाव जीतने में माहिर है, लेकिन उनकी जीत का संदेश भारतीयों को एकजुट करने वाला होना चाहिए न कि उन्हें विभाजित करने वाला। उन्होंने उम्मीद जताई कि जीत के बाद सत्ता पक्ष देश के सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने पर ध्यान देगा। थरूर के इस संतुलित बयान को राजनीतिक हलकों में बहुत गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि वे भाजपा की वैचारिक विरोधी होने के बाद भी उनकी कार्यक्षमता का लोहा मान रहे हैं। यह दर्शाता है कि विपक्ष के भीतर एक वर्ग अब केवल अंधविरोध के बजाय रचनात्मक आलोचना और सीखने की प्रक्रिया पर जोर दे रहा है।
पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने यह भी दिखाया है कि वहां भाजपा का वोट शेयर बढ़कर करीब 46% तक पहुंच गया है, जो पार्टी की बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण है। थरूर ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई दल इतनी बड़ी बढ़त हासिल करता है, तो उसे केवल संयोग नहीं कहा जा सकता। इसके पीछे महीनों की कड़ी मेहनत और योजना शामिल होती है। उन्होंने अपनी पार्टी के नेतृत्व से अपील की कि वे पंजाब जैसे आगामी चुनावी राज्यों के लिए अभी से तैयारी शुरू करें और उन गलतियों को न दोहराएं जो बंगाल या अन्य पूर्ववर्ती चुनावों में हुई हैं। संजय राउत और ममता बनर्जी जैसे नेताओं द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों के बीच शशि थरूर का यह रुख थोड़ा अलग नजर आता है। जहां अन्य विपक्षी नेता हार का ठीकरा व्यवस्था पर फोड़ रहे हैं, वहीं थरूर इसे आंतरिक कमजोरी और संगठन की विफलता के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक कांग्रेस अपनी निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी नहीं लाएगी और नए विचारों को स्थान नहीं देगी, तब तक भाजपा की मजबूत चुनावी मशीनरी को रोकना असंभव होगा। उनकी यह नसीहत कांग्रेस के आगामी संगठनात्मक चुनावों और भविष्य की रणनीति के लिए एक आधार बन सकती है।
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