असम में 'हिमंता मैजिक' बरकरार: बीजेपी नीत गठबंधन की प्रचंड जीत के साथ सत्ता की हैट्रिक।
असम के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन
- मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का ऐतिहासिक नेतृत्व, विपक्ष के 'महागठबंधन' को पछाड़कर रचा नया कीर्तिमान
- विकास और पहचान की राजनीति की बड़ी जीत, लगातार तीसरी बार असम में खिलेगा कमल
असम के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने राज्य विधानसभा चुनाव 2026 में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम आंकड़ों के अनुसार, असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन ने 100 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इस जीत के साथ ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की सत्ता में अपनी हैट्रिक पूरी कर ली है। यह जीत केवल सीटों के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की जनता द्वारा पिछले एक दशक में किए गए बुनियादी ढांचागत विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रयासों पर मुहर लगाने जैसा है। विपक्षी खेमे द्वारा बनाए गए विभिन्न जातीय और धार्मिक गठबंधनों के बावजूद, सत्ताधारी दल ने अपने मत प्रतिशत में भी भारी वृद्धि दर्ज की है।
इस चुनावी समर में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बार फिर खुद को राज्य के सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित किया है। अपनी पारंपरिक सीट जालुकबारी से रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल करते हुए उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी रणनीतियों ने न केवल शहरी बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी गहरा प्रभाव छोड़ा है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने 'विकसित असम' के साथ-साथ 'स्वदेशी पहचान' के मुद्दों को जिस तरह से संतुलित किया, उसने मतदाताओं के बीच एक मजबूत भरोसा पैदा किया। मुख्यमंत्री के रूप में उनके पिछले कार्यकाल में कानून-व्यवस्था, घुसपैठ पर नियंत्रण और प्रशासनिक सुधारों ने इस जीत की नींव तैयार की थी। यह परिणाम उनकी व्यक्तिगत छवि और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के सफल समन्वय का सीधा परिणाम है।
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो भाजपा ने इस चुनाव में अपनी रणनीति में क्षेत्रीय दलों को उचित सम्मान देकर एक मजबूत गठबंधन तैयार किया था। असम गण परिषद (AGP) और बोडो पीपुल्स फ्रंट (BPF) जैसे सहयोगियों के साथ मिलकर पार्टी ने राज्य के हर भौगोलिक हिस्से तक अपनी पहुँच बनाई। जहां एक ओर ऊपरी असम में चाय बागान श्रमिकों का समर्थन मिला, वहीं दूसरी ओर निचले असम और बराक घाटी में भी पार्टी ने अपनी पकड़ मजबूत की। सीटों के बंटवारे से लेकर उम्मीदवारों के चयन तक, हर स्तर पर बरती गई सूक्ष्म सावधानी ने विपक्षी गठबंधन के सामने एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी जिसे भेद पाना उनके लिए नामुमकिन साबित हुआ। सहयोगियों का स्ट्राइक रेट भी इस बार काफी बेहतर रहा, जिससे गठबंधन का कुल आंकड़ा बहुमत के जादुई आंकड़े से कहीं आगे निकल गया। असम में यह पहली बार है कि किसी गैर-कांग्रेसी सरकार ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की है। 2016 से शुरू हुआ भाजपा का यह सफर 2021 और अब 2026 के ऐतिहासिक नतीजों के साथ एक नई ऊंचाई पर पहुँच गया है। यह जीत पूर्वोत्तर भारत में भाजपा के बढ़ते प्रभाव और स्थायी राजनीतिक आधार को और अधिक मजबूती प्रदान करती है। विपक्ष के लिए ये नतीजे आत्ममंथन का विषय हैं, क्योंकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस बार काफी उम्मीदें लगा रखी थीं। राज्य कांग्रेस के प्रमुख चेहरों को अपनी सीटों पर ही कड़ा संघर्ष करना पड़ा और कई दिग्गजों को हार का स्वाद चखना पड़ा। अल्पसंख्यक मतों के बंटवारे और क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल की कमी ने विपक्ष की राह और कठिन बना दी। मतदान के रुझान बताते हैं कि जनता ने खंडित जनादेश के बजाय एक स्थिर और मजबूत सरकार को प्राथमिकता दी है। विपक्षी खेमे द्वारा उठाए गए बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दे भाजपा के 'सशक्त असम' के विमर्श के सामने फीके पड़ गए। इस चुनाव ने यह भी सिद्ध कर दिया कि केवल सत्ता विरोधी लहर के भरोसे चुनाव नहीं जीते जा सकते, बल्कि एक ठोस वैकल्पिक विजन की आवश्यकता होती है।
चुनावी अभियान के दौरान जिस तरह से डिजिटल माध्यमों और जमीनी रैलियों का मिश्रण किया गया, उसने युवाओं और महिला मतदाताओं को काफी आकर्षित किया। विशेष रूप से महिलाओं के लिए चलाई गई आर्थिक सहायता योजनाओं ने सत्ताधारी दल के पक्ष में एक बड़ा 'साइलेंट वोटर' बैंक तैयार किया। कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर उग्रवाद की समाप्ति और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाली ने मध्यम वर्ग के बीच सुरक्षा की भावना को प्रबल किया। मुख्यमंत्री ने अपनी रैलियों में बार-बार राज्य को देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल करने का जो लक्ष्य रखा, उसने लोगों को एक भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण प्रदान किया। मतदान केंद्रों पर उमड़ी भारी भीड़ और विशेष रूप से पहली बार मतदान करने वाले युवाओं का उत्साह भाजपा की इस बड़ी जीत का प्रमुख कारक बना। प्रशासनिक स्तर पर देखें तो इस जीत के बाद अब सरकार के सामने नई चुनौतियां और जिम्मेदारियां भी होंगी। ब्रह्मपुत्र की बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान, रोजगार के नए अवसरों का सृजन और औद्योगिक विकास की गति को बनाए रखना मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल होगा। शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों के बीच राजनीतिक हलकों में मंत्रिमंडल के गठन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसमें नए और अनुभवी चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी।
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