Politics News: भोपाल में ‘लव जिहाद’ पर बीजेपी सांसद आलोक शर्मा का विवादित बयान- मुस्लिम जिम ट्रेनरों की सूची तैयार, पुलिस को सौंपने की योजना.
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ‘लव जिहाद’ को लेकर एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। भोपाल से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद...
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ‘लव जिहाद’ को लेकर एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। भोपाल से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद आलोक शर्मा ने 1 जून, 2025 को ‘भोपाल विलीनीकरण दिवस’ समारोह के बाद एक विवादास्पद बयान दिया, जिसमें उन्होंने शहर के जिमों में कार्यरत मुस्लिम ट्रेनरों को निशाना बनाया। शर्मा ने कहा, “भोपाल में बहुत सारे जिम हैं जिनकी हम सूची बना रहे हैं, जिनमें ट्रेनर मुस्लिम हैं। महिलाओं को भी जिम ट्रेनर होना चाहिए। हम यह सूची आने वाले समय में पुलिस को देंगे। अब किसी को भी ‘लव जिहाद’ की इजाजत नहीं होगी।” यह बयान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा भोपाल के अयोध्या नगर इलाके में एक जिम में मुस्लिम ट्रेनरों की मौजूदगी पर आपत्ति जताने के बाद आया।
आलोक शर्मा का यह बयान हाल ही में भोपाल और इंदौर में कथित ‘लव जिहाद’ के मामलों के बाद आया है। मई 2025 में, भोपाल के एक निजी कॉलेज में कुछ मुस्लिम युवकों पर हिंदू छात्राओं को प्रेमजाल में फंसाकर दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगा था। इस मामले में एक आरोपी, फरहान, को पुलिस ने पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया था। मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा था, “जो लोग ऐसे काम करते हैं, उन्हें सड़क के बीच में गोली मार देनी चाहिए। लव जिहाद जैसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
इसी तरह, इंदौर में एक मुस्लिम जिम ट्रेनर पर एक शादीशुदा महिला के साथ संबंध बनाने और एक अन्य युवती से पहचान छिपाकर नजदीकियां बढ़ाने का मामला सामने आया था। इन घटनाओं ने दक्षिणपंथी संगठनों, विशेष रूप से बजरंग दल, को सक्रिय कर दिया, जिन्होंने भोपाल के अयोध्या नगर में एक जिम में पहुंचकर मुस्लिम ट्रेनरों की जानकारी मांगी। एक वायरल वीडियो में मध्य प्रदेश पुलिस के सब-इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा को यह कहते देखा गया कि “जिम में कोई भी मुस्लिम ट्रेनर या ग्राहक नहीं होना चाहिए।” इस बयान के बाद दिनेश शर्मा को लाइन अटैच कर दिया गया, और पुलिस ने इसे सामाजिक सौहार्द को खतरे में डालने वाला कदम बताया।
- आलोक शर्मा का बयान
1 जून, 2025 को ‘भोपाल विलीनीकरण दिवस’ के अवसर पर, आलोक शर्मा ने मीडिया से बातचीत में मुस्लिम जिम ट्रेनरों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि भोपाल में कई जिम हैं जहां मुस्लिम ट्रेनर काम करते हैं, और उनकी सूची तैयार की जा रही है। शर्मा ने यह भी सुझाव दिया कि महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए केवल महिला ट्रेनरों को नियुक्त करना चाहिए, ताकि ‘लव जिहाद’ को रोका जा सके। उन्होंने ‘लैंड जिहाद’ का भी जिक्र किया, दावा करते हुए कि कुछ लोग जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं, और प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई करेगा।
शर्मा ने अपने बयान में इंदौर का उदाहरण दिया, जहां कथित तौर पर मुस्लिम ट्रेनरों को जिम में काम करने से रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, “इंदौर ने ठीक निर्णय लिया है। हम पुलिस को सूची सौंपेंगे। सरकार अपना काम करेगी, हम अपना। किसी को लव जिहाद की अनुमति नहीं दी जाएगी।” यह बयान बजरंग दल के अभियान के बाद आया, जिसमें कार्यकर्ताओं ने जिम संचालकों को मुस्लिम ट्रेनरों को न रखने की चेतावनी दी थी।
- विपक्ष की प्रतिक्रिया
आलोक शर्मा के बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसे ‘सस्ती लोकप्रियता’ के लिए की गई बयानबाजी करार दिया और कहा, “लव जिहाद गलत है, लेकिन अपराधी का कोई धर्म नहीं होता। बेटी किसी की भी हो, वह हमारी बेटी है।” मसूद ने यह भी सवाल उठाया कि शर्मा को अपने बयानों से पहले आत्ममंथन करना चाहिए, विशेष रूप से उन बीजेपी नेताओं को, जिनके परिवार में अंतर-धार्मिक विवाह हुए हैं।
कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने शर्मा के बयान को ‘विभाजनकारी’ बताया और कहा, “जिम चलाना कोई अपराध नहीं है। ट्रेनरों की काउंसलिंग होनी चाहिए, न कि समुदाय विशेष को निशाना बनाया जाना चाहिए।” मसूद ने यह भी कहा कि दाढ़ी-टोपी पहनने वाले लोग देश की आजादी की लड़ाई में सबसे बड़े देशभक्त थे, और शर्मा का बयान सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाता है।
आलोक शर्मा का यह बयान मध्य प्रदेश में पहले से ही गर्म ‘लव जिहाद’ के मुद्दे को और हवा दे रहा है। सोशल मीडिया पर उनके समर्थन और विरोध में पोस्ट्स की बाढ़ आ गई है। एक एक्स पोस्ट में यूजर @TheBahubali_IND ने लिखा, “यदि कोई जिम है तो वहां बहनों का भी हिंदू ट्रेनर होना चाहिए। किसी भी तरह का जिहाद बख्शा नहीं जाएगा।” वहीं, कुछ यूजर्स ने इसे समुदाय विशेष के खिलाफ भेदभावपूर्ण कदम बताया।
यह विवाद केवल जिम ट्रेनरों तक सीमित नहीं रहा। शर्मा ने ‘लैंड जिहाद’ का जिक्र करते हुए भोपाल में हिंदू आबादी के पलायन और मुस्लिम आबादी के बढ़ने का दावा किया। उन्होंने कहा, “पुराने भोपाल में हिंदू आबादी घट रही है। लोग अपने मकान और दुकान बेचकर जा रहे हैं।” यह बयान सामाजिक तनाव को और बढ़ा सकता है, क्योंकि यह धार्मिक आधार पर विभाजन को प्रोत्साहित करता है।
सामाजिक रूप से, इस तरह के बयान समुदायों के बीच अविश्वास को बढ़ाते हैं। जिम ट्रेनरों जैसे पेशेवरों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाना न केवल उनके आजीविका के अधिकार को प्रभावित करता है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाता है। भोपाल में पहले से ही धार्मिक संवेदनशीलता के मामले सामने आते रहे हैं, और इस तरह के बयान स्थिति को और जटिल कर सकते हैं।
हालांकि यह बयान सड़क हादसे से सीधे तौर पर संबंधित नहीं है, लेकिन यह सामाजिक सुरक्षा और सामुदायिक तनाव के व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है। जिस तरह सड़क हादसों में लापरवाही जानलेवा हो सकती है, उसी तरह भड़काऊ बयान सामाजिक तनाव को बढ़ाकर हिंसा या अविश्वास का कारण बन सकते हैं। आलोक शर्मा का बयान सामाजिक सड़क पर एक ‘खतरनाक मोड़’ की तरह है, जो सावधानी न बरतने पर गंभीर परिणाम ला सकता है। आलोक शर्मा का मुस्लिम जिम ट्रेनरों की सूची बनाने और ‘लव जिहाद’ को रोकने का बयान मध्य प्रदेश की राजनीति और समाज में एक नया विवाद लेकर आया है।
मध्य प्रदेश में ‘लव जिहाद’ के खिलाफ 2021 में ‘धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम’ लागू किया गया था, जो अंतर-धार्मिक विवाहों में जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत सजा के प्रावधान कठोर हैं, और कई मामलों में इसका दुरुपयोग होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। शर्मा का मुस्लिम जिम ट्रेनरों की सूची बनाने और पुलिस को सौंपने का प्रस्ताव इस कानून के दायरे में आ सकता है, लेकिन यह संवैधानिक रूप से समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) और धार्मिक भेदभाव के खिलाफ संरक्षण (अनुच्छेद 15) का उल्लंघन भी हो सकता है।
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