Gonda : गोंडा के युवा वैज्ञानिक ने वैश्विक मंच पर बनाई पहचान, दुनिया के शीर्ष पांच प्रतिशत वैज्ञानिकों में हुए शामिल

डॉक्टर दिनेश कुमार विश्वकर्मा को इससे पहले वैश्विक स्तर पर सम्मानित हाइड्रोलॉजिकल साइंसेज जर्नल रिवीवर अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है, जो उस समय पूरी दुनिया में केवल चार वैज्ञानिकों को दिया गया था। गोंडा जैसे छोटे क्षेत्र से निकलकर वैश्विक पटल पर छा जाने वाले इस युवा वै

May 27, 2026 - 00:00
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Gonda : गोंडा के युवा वैज्ञानिक ने वैश्विक मंच पर बनाई पहचान, दुनिया के शीर्ष पांच प्रतिशत वैज्ञानिकों में हुए शामिल
Gonda : गोंडा के युवा वैज्ञानिक ने वैश्विक मंच पर बनाई पहचान, दुनिया के शीर्ष पांच प्रतिशत वैज्ञानिकों में हुए शामिल

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के बेलसर क्षेत्र के अंतर्गत बरसरा गांव के रहने वाले युवा वैज्ञानिक डॉक्टर दिनेश कुमार विश्वकर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। उन्होंने विश्व के शीर्ष पांच प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में अपना स्थान सुरक्षित कर देश का गौरव बढ़ाया है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले डॉक्टर दिनेश कुमार विश्वकर्मा इस समय देहरादून की ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। जल संसाधन, जलवायु परिवर्तन, सिंचाई प्रबंधन और भूजल विज्ञान के क्षेत्र में किए गए उनके उत्कृष्ट शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली है। अब तक उनके ८६ शोध-पत्र विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं और गूगल स्कॉलर पर उनके कार्यों को ३,७८७ से अधिक बार संदर्भ के रूप में उपयोग किया जा चुका है। उनके शोध की उच्च गुणवत्ता का अंदाजा उनके ३३ एच-इंडेक्स और ६२ आई१०-इंडेक्स से आसानी से लगाया जा सकता है।

डॉक्टर दिनेश कुमार विश्वकर्मा को इससे पहले वैश्विक स्तर पर सम्मानित हाइड्रोलॉजिकल साइंसेज जर्नल रिवीवर अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है, जो उस समय पूरी दुनिया में केवल चार वैज्ञानिकों को दिया गया था। गोंडा जैसे छोटे क्षेत्र से निकलकर वैश्विक पटल पर छा जाने वाले इस युवा वैज्ञानिक की सफलता आज के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक बन गई है। उनका आगामी उद्देश्य दुनिया के बेहतरीन संस्थानों में जाकर पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च करना और जल संसाधन व कृषि क्षेत्र से जुड़ी बड़ी समस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजना है। उनका मानना है कि विज्ञान और शिक्षा के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है, इसलिए उनका शोध हमेशा किसानों और ग्रामीण जनता के हित के लिए समर्पित रहेगा। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके गृह जनपद गोंडा सहित पूरे राज्य में अत्यंत हर्ष और गर्व का माहौल है।

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