'एक बार जो कह दिया, उससे पीछे नहीं हटता': जीत के बाद हिमंत बिस्वा सरमा की पवन खेड़ा को दोटूक।
असम विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक और लगातार तीसरी जीत के बाद मुख्यमंत्री हिमंत
- असम में हैट्रिक के बाद मुख्यमंत्री का दिखा आक्रामक तेवर, कानूनी लड़ाई जारी रखने का दिया स्पष्ट संकेत
- "चुनावी नतीजों ने बता दिया जनता किसके साथ", पवन खेड़ा मामले पर हिमंत बिस्वा सरमा का कड़ा रुख
असम विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक और लगातार तीसरी जीत के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर अपने पुराने तेवर में नजर आ रहे हैं। जीत की खुमारी के बीच उन्होंने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ चल रही कानूनी और राजनीतिक लड़ाई पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मुख्यमंत्री ने गुवाहाटी में मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि चुनावी जीत उनकी नीतियों और सच्चाई की जीत है। पवन खेड़ा का नाम लेते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी बातों और फैसलों पर अडिग रहने वाले व्यक्ति हैं। सरमा ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक जीवन में शुचिता और मर्यादा आवश्यक है, और जब किसी की व्यक्तिगत गरिमा या परिवार को बिना किसी आधार के निशाना बनाया जाता है, तो वे पीछे हटने वालों में से नहीं हैं।
पवन खेड़ा और हिमंत बिस्वा सरमा के बीच का यह विवाद उस समय और गहरा गया जब चुनाव प्रचार के दौरान कानूनी दांव-पेंच का सिलसिला तेज हुआ था। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पवन खेड़ा को मिली राहत के बावजूद मुख्यमंत्री के रुख में कोई नरमी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका अपना काम कर रही है और वे कानून का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक और नैतिक लड़ाई बदस्तूर जारी रहेगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि विपक्ष ने चुनाव जीतने के लिए व्यक्तिगत कीचड़ उछालने की जो कोशिश की थी, उसे असम की जनता ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनके अनुसार, एक बार जो उन्होंने कह दिया कि वे दोषियों को उनके किए की सजा दिलाकर रहेंगे, तो वे उस वादे से कभी पीछे नहीं हटेंगे। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में वे आरोप हैं जो पवन खेड़ा ने चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री के परिवार और उनकी पत्नी के खिलाफ लगाए थे। इन आरोपों के बाद असम में कई जगहों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को न केवल झूठा बताया बल्कि इसे असम की महिलाओं और अस्मिता का अपमान करार दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में प्रतिद्वंद्विता नीतियों पर होनी चाहिए, न कि परिवार के उन सदस्यों पर जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। सरमा ने अपनी जीत को उन सभी 'झूठे प्रचारों' का करारा जवाब बताया है जो विपक्ष द्वारा उनके खिलाफ रचे गए थे। उनका यह बयान यह भी दर्शाता है कि आने वाले दिनों में वे इस मामले को कानूनी रूप से और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाएंगे। असम की राजनीति में हिमंत बिस्वा सरमा को एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता है जो अपनी बात पर कायम रहते हैं और विरोधियों को उनके ही अंदाज में जवाब देते हैं। पवन खेड़ा के खिलाफ उनका यह ताजा बयान केवल एक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह उनके समर्थकों के लिए एक संदेश भी है कि सत्ता में वापसी के बाद उनकी प्राथमिकताएं और उनके सिद्धांत और भी अधिक स्पष्ट हो गए हैं।
चुनावी नतीजों के विश्लेषण के दौरान मुख्यमंत्री ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि जनता ने 'काम की राजनीति' को चुना है और 'नाम की राजनीति' या 'बदनाम करने की राजनीति' को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा जैसे नेताओं ने चुनाव को प्रभावित करने के लिए जो हथकंडे अपनाए, वे अंततः विफल साबित हुए। सरमा ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य हमेशा से असम का विकास रहा है, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि वे अपनी गरिमा के साथ कोई समझौता करेंगे। मुख्यमंत्री का कहना है कि वे किसी भी विवाद को अधूरा नहीं छोड़ते और पवन खेड़ा का मामला भी अपने तार्किक अंत तक पहुँचेगा। उनके इस दृढ़ संकल्प ने राज्य के राजनीतिक वातावरण को एक बार फिर गरमा दिया है।
राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान उनकी बढ़ती राजनीतिक शक्ति का प्रतीक है। असम में भाजपा की प्रचंड जीत ने उन्हें न केवल राज्य में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक कद्दावर नेता के रूप में स्थापित किया है। ऐसे में पवन खेड़ा के खिलाफ उनकी टिप्पणी यह संकेत देती है कि वे अब और भी अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखेंगे। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि वे एक 'जिम्मेदार सिपाही' की तरह काम करते हैं और जब वे किसी मुद्दे पर स्टैंड ले लेते हैं, तो उसे अंतिम परिणाम तक पहुँचाने की जिम्मेदारी भी उनकी ही होती है। इस बयान के बाद कांग्रेस खेमे में भी हलचल तेज हो गई है और आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच वाकयुद्ध और तेज होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने यह भी साझा किया कि चुनाव के दौरान उनके विरुद्ध जो भी षड्यंत्र रचे गए, वे अब एक-एक कर जनता के सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा को यह समझना चाहिए कि असम की धरती मर्यादा और सम्मान की धरती है। यहाँ किसी के परिवार पर लांछन लगाना और फिर राजनीतिक लाभ की उम्मीद करना बड़ी भूल है। सरमा ने अपने विजयी संबोधन को इस बात पर केंद्रित रखा कि उनकी 'हैट्रिक' जीत केवल सांख्यिकीय नहीं है, बल्कि यह वैचारिक भी है। उन्होंने अपने समर्थकों को आश्वस्त किया कि वे राज्य के हितों और अपनी व्यक्तिगत शुचिता की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने के लिए तैयार हैं, चाहे वह चुनावी मैदान हो या फिर अदालत का गलियारा।
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