ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर सीधा प्रहार, कहा- हमारी लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से थी।

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में 15 साल से चले आ रहे एक अध्याय का अंत

May 6, 2026 - 14:30
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ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर सीधा प्रहार, कहा- हमारी लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से थी।
ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर सीधा प्रहार, कहा- हमारी लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से थी।
  • 'मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, यह जनमत नहीं लूट है', बंगाल की हार पर ममता बनर्जी का तीखा पलटवार
  • चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों के गठबंधन ने लोकतंत्र को हराया, ममता बनर्जी के गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में 15 साल से चले आ रहे एक अध्याय का अंत कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत और तृणमूल कांग्रेस की अप्रत्याशित हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। कोलकाता में आयोजित एक उच्च-स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी की यह हार जनता के जनादेश के कारण नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का नतीजा है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस बार मुकाबला राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी से अधिक संवैधानिक संस्था के साथ था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के आधिकारिक परिणामों ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल किया है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस महज 80 सीटों पर सिमट गई है। इस ऐतिहासिक उलटफेर के बाद ममता बनर्जी ने मंगलवार को मीडिया को संबोधित करते हुए निर्वाचन आयोग को इस स्थिति के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अपने संबोधन में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि तृणमूल कांग्रेस को चुनावी मैदान में भाजपा ने नहीं हराया, बल्कि चुनाव आयोग के साथ मिलकर रची गई 'गंदी चाल' ने उन्हें सत्ता से दूर कर दिया। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि यह मुकाबला 'भाजपा बनाम टीएमसी' के बजाय 'निर्वाचन आयोग बनाम टीएमसी' में बदल गया था।

मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान अपनाए गए तरीकों पर कड़ा ऐतराज जताया और इसे भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का एक 'काला अध्याय' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष पुनरीक्षण के नाम पर करीब 90 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, जो उनकी पार्टी के कट्टर समर्थक माने जाते थे। ममता बनर्जी ने दावा किया कि यह एक ऐसी रणनीति थी जिसने मतदान शुरू होने से पहले ही नतीजों को एकतरफा कर दिया। उन्होंने कहा कि जब बड़ी संख्या में लोगों को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया जाए, तो उसे वास्तविक जनादेश नहीं माना जा सकता। मुख्यमंत्री के अनुसार, आयोग ने जानबूझकर ऐसी परिस्थितियों का निर्माण किया जिससे एक विशेष दल को अनुचित लाभ मिल सके। चुनाव के दौरान केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की भूमिका पर भी मुख्यमंत्री ने तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय बलों ने निष्पक्ष चुनाव कराने के बजाय मतदाताओं को डराने और धमकाने का काम किया। ममता बनर्जी ने दावा किया कि मतदान के दिन कई बूथों पर तृणमूल कांग्रेस के एजेंटों को प्रवेश करने से रोका गया और कई जगहों पर मतदाताओं को वापस घर भेज दिया गया। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा साझा करते हुए कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें शारीरिक रूप से भी प्रताड़ित किया गया, लेकिन उन्होंने जनता के लिए लड़ाई जारी रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा बलों का उपयोग एक हथियार की तरह करके लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करने का प्रयास किया गया है।

  • मतगणना प्रक्रिया पर संदेह के घेरे

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने मतगणना के दिन हुई कथित अनियमितताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 100 से अधिक सीटों पर मतों की गणना में धांधली की गई और विपक्षी उम्मीदवारों की जीत को जबरन हार में बदल दिया गया। उन्होंने दावा किया कि मतगणना केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों को बंद कर दिया गया था और उनके कार्यकर्ताओं को केंद्रों के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह 'सीटों की लूट' है जिसे वे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगी और इसके खिलाफ कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगी। अपनी हार और भवानीपुर सीट से खुद की पराजय के बावजूद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफे का सवाल ही पैदा नहीं होता क्योंकि उनकी सरकार के खिलाफ कोई जनआक्रोश नहीं था। उन्होंने तर्क दिया कि जब चुनाव ही धांधली के जरिए जीता गया हो, तो उस जीत को नैतिक मान्यता नहीं दी जा सकती। उन्होंने राज्यपाल के पास जाने के बजाय जनता के बीच जाने और सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का संकल्प लिया। उनके इस रुख से राज्य में एक संवैधानिक संकट की स्थिति बनती दिख रही है, क्योंकि तकनीकी रूप से नई विधानसभा के गठन के बाद उन्हें पद छोड़ना होगा।

ममता बनर्जी ने विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) के नेताओं के साथ भविष्य की रणनीति पर चर्चा करने की बात कही है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेतृत्व और अन्य क्षेत्रीय दलों के प्रमुखों ने उनसे संपर्क किया है और वे सभी इस चुनावी 'धांधली' के खिलाफ एक सुर में आवाज उठाएंगे। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य विपक्षी एकता को और मजबूत करना है ताकि भविष्य में संवैधानिक संस्थाओं को इस तरह से 'हाइजैक' करने से रोका जा सके। मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे हार से हताश न हों और 'शेरनी' की तरह फिर से वापसी करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने संकेत दिया कि यह लड़ाई अब केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक आंदोलन का रूप लेगी। निर्वाचन आयोग ने इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया है कि चुनाव पूरी तरह से नियमों के तहत और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुए हैं। दूसरी ओर, विजेता दल ने ममता बनर्जी के बयानों को 'हार की खीझ' बताया है। हालांकि, ममता बनर्जी अपने रुख पर अडिग हैं और उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र में मतों के मिलान और मतदाता सूचियों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। 15 साल की सत्ता के बाद मिली इस हार ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी मंथन का दौर शुरू कर दिया है, लेकिन ममता बनर्जी का सारा ध्यान फिलहाल बाहरी कारकों और व्यवस्था की खामियों को घेरने पर टिका है।

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