Sambhal : गोल्डन मिनट बचाएगा नवजात की जिंदगी - जिला अस्पताल सम्भल में नवजात शिशुओं को बचाने की विशेष ट्रेनिंग

एसएनसीयू (SNCU) में तैनात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दीप शिखा ने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद का पहला एक मिनट बेहद अहम होता है, जिसे “गोल्डन मिनट” कहा जाता है। यदि इस दौरान बच्चे की सांस शुरू नहीं हो पाती

May 10, 2026 - 21:36
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Sambhal : गोल्डन मिनट बचाएगा नवजात की जिंदगी - जिला अस्पताल सम्भल में नवजात शिशुओं को बचाने की विशेष ट्रेनिंग
Sambhal : गोल्डन मिनट बचाएगा नवजात की जिंदगी - जिला अस्पताल सम्भल में नवजात शिशुओं को बचाने की विशेष ट्रेनिंग

Report : उवैस दानिश, सम्भल

जिला अस्पताल सम्भल में नवजात शिशुओं की जान बचाने को लेकर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को “गोल्डन मिनट” के महत्व की ट्रेनिंग दी गई। यह ट्रेनिंग उस स्थिति से निपटने के लिए दी गई, जब जन्म के तुरंत बाद बच्चा सांस नहीं ले पाता।

एसएनसीयू (SNCU) में तैनात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दीप शिखा ने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद का पहला एक मिनट बेहद अहम होता है, जिसे “गोल्डन मिनट” कहा जाता है। यदि इस दौरान बच्चे की सांस शुरू नहीं हो पाती, तो उसकी जान जा सकती है या भविष्य में वह मानसिक और शारीरिक समस्याओं का शिकार हो सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए पूरे स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया कि ऐसी स्थिति में तुरंत कौन-कौन से कदम उठाने चाहिए। वहीं जिला चिकित्सालय सम्भल के सीएमएस डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्तर पर चल रहे “नियोनेटल रिससिटेशन” कार्यक्रम के तहत यह कार्यशाला आयोजित की गई है। इसमें एसएनसीयू, लेबर रूम स्टाफ, स्टाफ नर्स और सीएचओ सहित करीब 30 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग में यह भी सिखाया जा रहा है कि प्री-मैच्योर और सामान्य नवजात शिशुओं में क्या अंतर होता है और यदि बच्चा जन्म के बाद रो नहीं पाता, तो उस दौरान किस तरह की सावधानियां और उपचार जरूरी होते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की ट्रेनिंग नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने और बच्चों को स्वस्थ जीवन देने में बेहद कारगर साबित होगी।

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