Sambhal : स्कूल-कॉलेजों के आसपास ‘नशे’ पर सख्ती, 500 मीटर दायरे में बिक्री पर रोक का लोगों ने किया स्वागत

स्थानीय लोगों ने कहा कि बच्चों और युवाओं का मन अक्सर वही चीजें अपनाने की ओर जाता है, जो उन्हें रोज़मर्रा के माहौल में दिखाई देती हैं। ऐसे में स्कूल-कॉलेजों के आसपास सिगरेट, तंबाकू और शराब जैसी चीज़ों

May 10, 2026 - 21:40
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Sambhal : स्कूल-कॉलेजों के आसपास ‘नशे’ पर सख्ती, 500 मीटर दायरे में बिक्री पर रोक का लोगों ने किया स्वागत
Sambhal : स्कूल-कॉलेजों के आसपास ‘नशे’ पर सख्ती, 500 मीटर दायरे में बिक्री पर रोक का लोगों ने किया स्वागत

Report : उवैस दानिश, सम्भल

सरकार द्वारा स्कूलों और कॉलेजों के आसपास नशे से जुड़ी वस्तुओं की बिक्री पर प्रतिबंध का दायरा बढ़ाकर 500 मीटर किए जाने के फैसले का लोगों ने खुलकर समर्थन किया है। आम नागरिकों का कहना है कि यह कदम नई पीढ़ी को नशे की लत से बचाने और शिक्षा के बेहतर माहौल के लिए बेहद जरूरी है।

स्थानीय लोगों ने कहा कि बच्चों और युवाओं का मन अक्सर वही चीजें अपनाने की ओर जाता है, जो उन्हें रोज़मर्रा के माहौल में दिखाई देती हैं। ऐसे में स्कूल-कॉलेजों के आसपास सिगरेट, तंबाकू और शराब जैसी चीज़ों की दुकानों पर रोक लगाना सकारात्मक बदलाव लाएगा। जावेद कमाल ने सरकार के फैसले को “अच्छी पहल” बताते हुए कहा कि नशे को शिक्षा से जितना दूर रखा जाएगा, उतना ही समाज और शहर का विकास होगा।उन्होंने यह भी कहा कि यह दूरी 1000 मीटर तक होनी चाहिए थी। अजय कुमार शर्मा ने कहा कि युवावस्था में बच्चे जल्दी प्रभावित होते हैं। अगर उनके रास्ते में नशे से जुड़ी चीजें नहीं होंगी तो उनका ध्यान पढ़ाई और बेहतर भविष्य की ओर जाएगा। उन्होंने सरकार के इस निर्णय को “सोच-समझकर लिया गया सराहनीय कदम” बताया। ममता राधु ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि स्कूलों और कॉलेजों के बाहर ही नहीं, बल्कि पूरी तरह से ऐसी दुकानों को खत्म किया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि बच्चे जो देखते हैं, उसी की ओर आकर्षित होते हैं और इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और भविष्य पर पड़ता है। वहीं हरदीप सिंह ने इसे आने वाली पीढ़ी के हित में लिया गया बड़ा फैसला बताते हुए कहा कि लड़के-लड़कियों को नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार की इस सोच को ज़मीन पर सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि इस फैसले पर प्रभावी तरीके से अमल हुआ तो स्कूल-कॉलेजों का माहौल और अधिक सुरक्षित और सकारात्मक बनेगा, जिससे नई पीढ़ी का भविष्य बेहतर दिशा में आगे बढ़ सकेगा।

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