Sambhal: 'पोस्टरों में झलकी संवेदना: बुजुर्गों के सम्मान और देखभाल का दिया गया संदेश'।
सम्भल के मौलाना आज़ाद कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन (CTE) में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यक्रम “वकार और देखभाल की तालीम”
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल के मौलाना आज़ाद कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन (CTE) में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यक्रम “वकार और देखभाल की तालीम” के तहत छात्रों ने समाज को एक अहम संदेश देने का प्रयास किया। इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने पोस्टर के माध्यम से बुजुर्गों की समस्याओं, खासकर अकेलेपन (लोनलीनेस), को प्रमुखता से उजागर किया।
सेकेंड सेमेस्टर की छात्रा फातिमा ज़हरा ने अपने पोस्टर में बुजुर्गों के अकेलेपन को दिखाते हुए कहा कि आज के समाज में बुजुर्ग अक्सर परिवार के बीच रहकर भी खुद को अकेला महसूस करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस समस्या के लिए किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है, बल्कि पूरे समाज को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा। वहीं छात्र बशार राही ने कहा कि हमें अपने बुजुर्गों को उनकी जिंदगी के आखिरी पड़ाव में सहारा देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बदलाव की शुरुआत खुद से और अपने घर से करनी चाहिए, तभी समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। बी.एड. छात्र मोहम्मद आकिल ने पोस्टर के जरिए शिक्षक की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज में जागरूकता फैलाकर लोगों को बुजुर्गों के प्रति जिम्मेदार बना सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जैसा व्यवहार हम अपने बुजुर्गों के साथ करेंगे, भविष्य में वैसा ही हमें भी मिलेगा। कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए छात्र मोहम्मद ओसामा ने बताया कि इसका उद्देश्य बुजुर्गों के प्रति सम्मान और देखभाल की भावना को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों के मार्गदर्शन, खासकर डॉ. पूजा त्यागी के प्रयासों से छात्रों ने प्रभावशाली पोस्टर तैयार किए हैं, जो समाज में पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी को कम करने का संदेश देते हैं। यह कार्यक्रम न सिर्फ छात्रों की रचनात्मकता को दर्शाता है, बल्कि समाज को एकजुट होकर बुजुर्गों के सम्मान और देखभाल के लिए प्रेरित भी करता है।
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