राज्यसभा के सफर में भी अभेद्य रहेगा सुरक्षा घेरा: नीतीश कुमार को मिलती रहेगी 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा।

बिहार की राजनीति में इन दिनों एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज है, क्योंकि राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार अब

Apr 2, 2026 - 13:28
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राज्यसभा के सफर में भी अभेद्य रहेगा सुरक्षा घेरा: नीतीश कुमार को मिलती रहेगी 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा।
राज्यसभा के सफर में भी अभेद्य रहेगा सुरक्षा घेरा: नीतीश कुमार को मिलती रहेगी 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा।
  • मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र के बाद भी नहीं घटेगा सुरक्षा का स्तर: गृह विभाग ने 'विशेष सुरक्षा अधिनियम' के तहत जारी किया आदेश
  • दिल्ली की राह और पटना का सुरक्षा कवच: 10 NSG कमांडो सहित 55 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रहेगी बरकरार

बिहार की राजनीति में इन दिनों एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज है, क्योंकि राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र, यानी राज्यसभा की ओर रुख कर रहे हैं। इस राजनीतिक संक्रमण काल के बीच बिहार सरकार के गृह विभाग ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधिकारिक आदेश जारी किया है, जिसने सुरक्षा गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। गृह विभाग की विशेष शाखा द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार, नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के उपरांत भी उनकी सुरक्षा के स्तर में कोई कटौती नहीं की जाएगी। उन्हें वर्तमान की भांति ही 'जेड प्लस' (Z+) श्रेणी की सर्वोच्च सुरक्षा प्रदान की जाती रहेगी। यह निर्णय उनकी संवेदनशीलता और उनके लंबे कार्यकाल के दौरान बने सुरक्षा जोखिमों के गहन विश्लेषण के बाद लिया गया है, ताकि पदमुक्त होने के बाद भी उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा अभेद्य बनी रहे।

आदेश के तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो नीतीश कुमार को यह सुरक्षा 'बिहार विशेष सुरक्षा दल अधिनियम-2000' (Bihar Special Security Group Act, 2000) के विशिष्ट प्रावधानों के तहत दी जा रही है। गृह विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के रूप में इस अधिनियम के तहत सुरक्षा के पात्र रहे हैं और उनकी वर्तमान राजनीतिक स्थिति तथा राज्यसभा में उनके निर्वाचन को देखते हुए इस सुरक्षा घेरे को निरंतर बनाए रखना अनिवार्य है। बिहार का यह कानून राज्य के मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्रियों को उनकी सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के आधार पर विशेष सुरक्षा दल (SSG) उपलब्ध कराने का अधिकार देता है। इसी कानूनी आधार का उपयोग करते हुए विभाग ने उनकी सुरक्षा समीक्षा की और निष्कर्ष निकाला कि भविष्य में भी उन्हें 'जेड प्लस' सुरक्षा घेरे में रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता होगी।

नीतीश कुमार का राज्यसभा के लिए निर्वाचित होना बिहार की क्षेत्रीय राजनीति से उनके राष्ट्रीय भूमिका में प्रवेश का संकेत है। बीते 16 मार्च 2026 को वे राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्विरोध चुने गए थे। संवैधानिक नियमों के अनुसार, संसद के किसी भी सदन का सदस्य चुने जाने के 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल की सदस्यता से त्यागपत्र देना अनिवार्य होता है। इसी क्रम में नीतीश कुमार ने 30 मार्च 2026 को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया था। अब निकट भविष्य में वे मुख्यमंत्री के पद से भी विधिवत त्यागपत्र देंगे और संभवतः 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। इस बदलाव के बावजूद, गृह विभाग का मानना है कि एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में उन पर संभावित खतरों को देखते हुए सुरक्षा कवच को कमजोर नहीं किया जा सकता। जेड प्लस सुरक्षा भारत में सुरक्षा का दूसरा सबसे उच्चतम स्तर है। नीतीश कुमार के सुरक्षा घेरे में लगभग 55 सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे, जिनमें 10 से अधिक नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के ब्लैक कैट कमांडो शामिल होंगे। इसके अलावा, उनकी सुरक्षा में स्थानीय पुलिस और विशेष सुरक्षा दल के जवान भी चौबीसों घंटे तैनात रहेंगे।

सुरक्षा की इस श्रेणी में न केवल कमांडो की तैनाती होती है, बल्कि तकनीकी सर्विलांस और एस्कॉर्ट वाहनों का एक बड़ा बेड़ा भी शामिल रहता है। नीतीश कुमार जब भी कहीं आवाजाही करेंगे, उनके काफिले में बुलेटप्रूफ गाड़ियां और जैमर वाहन साथ चलेंगे। गृह विभाग के आदेश में यह भी निहित है कि उनके आवास की सुरक्षा भी उसी तर्ज पर की जाएगी जैसे एक वर्तमान मुख्यमंत्री की होती है। इसमें प्रवेश द्वार पर सघन तलाशी, मेटल डिटेक्टर और सीसीटीवी कैमरों का जाल शामिल होगा। जानकारों का मानना है कि बिहार जैसे राज्य में, जहां राजनीतिक सरगर्मियां हमेशा चरम पर रहती हैं, एक कद्दावर नेता की सुरक्षा में कोई भी ढिलाई बरतना जोखिम भरा हो सकता है, यही कारण है कि उनके पद त्यागने से पहले ही सुरक्षा व्यवस्था को कानूनी रूप से पुख्ता कर दिया गया है।

राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो नीतीश कुमार के दिल्ली प्रस्थान के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। उनके उत्तराधिकारी के रूप में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य प्रमुख नेताओं के नामों की चर्चा जोरों पर है। हालांकि नीतीश कुमार अब दिल्ली में बैठकर राष्ट्रीय राजनीति की बिसात पर चालें चलेंगे, लेकिन बिहार में उनकी जड़ें और उनका प्रभाव कम नहीं होगा। सुरक्षा का यह 'जेड प्लस' कवर उन्हें न केवल बिहार में, बल्कि देश के किसी भी हिस्से में यात्रा करने पर उसी प्रोटोकॉल के साथ उपलब्ध कराया जाएगा। यह आदेश इस बात की पुष्टि करता है कि राज्य प्रशासन अपने पूर्व मुखिया की सुरक्षा और गरिमा को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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