हवाई सफर में रुकावट: फ्लाइट कैंसिल होने पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं और कानूनी अधिकारों की पूरी जानकारी।
आधुनिक युग में हवाई यात्रा समय की बचत और सुगमता का पर्याय बन चुकी है, लेकिन अक्सर तकनीकी खराबी, खराब मौसम या परिचालन
- एयरलाइंस की मनमानी पर लगाम: डीजीसीए के नए नियमों के तहत रिफंड, होटल स्टे और वैकल्पिक उड़ान के क्या हैं प्रावधान
- यात्री सतर्क, सफर सुखद: उड़ान रद्द होने या देरी की स्थिति में हर्जाना पाने की प्रक्रिया और एयरलाइंस की जिम्मेदारियां
आधुनिक युग में हवाई यात्रा समय की बचत और सुगमता का पर्याय बन चुकी है, लेकिन अक्सर तकनीकी खराबी, खराब मौसम या परिचालन संबंधी कारणों से फ्लाइट का कैंसिल होना यात्रियों के लिए बड़ी मानसिक और शारीरिक परेशानी का सबब बन जाता है। ऐसी स्थिति में अधिकांश यात्रियों को अपने उन कानूनी अधिकारों और सुविधाओं की जानकारी नहीं होती है, जो नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा उनके हितों की रक्षा के लिए निर्धारित किए गए हैं। जब भी कोई एयरलाइंस अपनी निर्धारित उड़ान को रद्द करती है, तो वह केवल एक टिकट रद्द नहीं करती, बल्कि यात्री की पूरी योजना को प्रभावित करती है। इसलिए, यह अनिवार्य हो जाता है कि प्रत्येक हवाई यात्री को उन प्रावधानों का ज्ञान हो जिनके तहत वह मुआवजे, वैकल्पिक व्यवस्था या पूर्ण रिफंड का हकदार बनता है। भारत में विमानन क्षेत्र के नियामक निकाय ने यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए कड़े चार्टर लागू किए हैं, जिनका पालन करना हर डोमेस्टिक और इंटरनेशनल एयरलाइंस के लिए अनिवार्य है।
यदि एयरलाइंस किसी उड़ान को रद्द करने का निर्णय उसकी निर्धारित रवानगी से काफी पहले लेती है, तो उसे यात्रियों को सूचित करने की एक निश्चित प्रक्रिया का पालन करना होता है। नियमों के अनुसार, यदि फ्लाइट कैंसिल होने की सूचना यात्री को उड़ान के समय से कम से कम दो सप्ताह पहले दी जाती है, तो एयरलाइंस को यात्री को वैकल्पिक उड़ान का विकल्प देना चाहिए या टिकट का पूरा पैसा वापस करना चाहिए। हालांकि, यदि सूचना उड़ान के समय से 24 घंटे पहले और दो सप्ताह के भीतर दी जाती है, तो एयरलाइंस को यात्री के लिए उसी दिन या उसके आसपास की किसी अन्य वैकल्पिक उड़ान की व्यवस्था करनी होगी। यदि यात्री उस वैकल्पिक व्यवस्था को स्वीकार नहीं करता है, तो वह टिकट की पूरी राशि के रिफंड का दावा कर सकता है। सूचना देने का माध्यम फोन कॉल, एसएमएस या ईमेल हो सकता है, इसलिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे बुकिंग के समय अपना सक्रिय संपर्क विवरण ही साझा करें।
सबसे जटिल स्थिति तब उत्पन्न होती है जब यात्री हवाई अड्डे पर पहुंच जाता है और उसे वहां पता चलता है कि उसकी फ्लाइट कैंसिल हो गई है। ऐसी परिस्थितियों में, एयरलाइंस की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। यदि एयरलाइंस यात्री को समय पर सूचित करने में विफल रहती है या उसे वैकल्पिक उड़ान देने में असमर्थ होती है, तो उसे आर्थिक मुआवजे का भुगतान करना पड़ता है। यह मुआवजा उड़ान की दूरी और देरी के समय पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए, एक घंटे से कम की ब्लॉक अवधि वाली उड़ानों के लिए मुआवजा अलग होता है और दो घंटे से अधिक वाली उड़ानों के लिए अलग। आमतौर पर, यह राशि 5,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये या टिकट की कीमत (जो भी कम हो) तक हो सकती है। इसके अतिरिक्त, यदि यात्री हवाई अड्डे पर फंसा हुआ है, तो एयरलाइंस को उसे मुफ्त भोजन और रिफ्रेशमेंट प्रदान करना होता है, ताकि उसे असुविधा कम हो। नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं (CAR) के अनुसार, यदि फ्लाइट कैंसिल होने के कारण यात्री को 24 घंटे से अधिक समय तक अगली उड़ान का इंतजार करना पड़ता है, तो एयरलाइंस को होटल में ठहरने की व्यवस्था और हवाई अड्डे से होटल तक आने-जाने का खर्च (ट्रांसफर) भी वहन करना होगा। यह सुविधा पूरी तरह से मुफ्त होती है और यात्री को इसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ता।
एयरलाइंस अक्सर 'असाधारण परिस्थितियों' का हवाला देकर मुआवजे से बचने की कोशिश करती हैं। नियमों में यह स्पष्ट है कि यदि उड़ान का कैंसिलेशन एयरलाइंस के नियंत्रण से बाहर के कारणों जैसे कि प्राकृतिक आपदा, खराब मौसम, नागरिक अशांति, युद्ध, हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध या हड़ताल के कारण होता है, तो एयरलाइंस मुआवजे के भुगतान के लिए बाध्य नहीं है। हालांकि, ऐसी स्थिति में भी एयरलाइंस को यात्रियों को रिफंड या अगली उपलब्ध उड़ान में सीट देने की सुविधा देनी ही होगी। तकनीकी खराबी को अक्सर एयरलाइंस असाधारण परिस्थिति बताने का प्रयास करती हैं, लेकिन नियामक संस्था इसे एयरलाइंस की परिचालन जिम्मेदारी मानती है। यदि रखरखाव की कमी के कारण उड़ान रद्द होती है, तो यात्री अपने अधिकारों के तहत सुविधाओं की मांग कर सकते हैं।
रिफंड की प्रक्रिया को लेकर भी यात्रियों के मन में अक्सर दुविधा रहती है। यदि कोई यात्री अपनी फ्लाइट कैंसिल होने पर रिफंड का विकल्प चुनता है, तो एयरलाइंस को भुगतान के उसी माध्यम से पैसा वापस करना होगा जिससे टिकट बुक किया गया था। यदि टिकट किसी ट्रैवल एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बुक किया गया है, तो रिफंड की जिम्मेदारी भी उसी मार्ग से पूरी की जाएगी। नकद भुगतान की स्थिति में रिफंड तत्काल होना चाहिए, जबकि क्रेडिट या डेबिट कार्ड से भुगतान की स्थिति में इसे 7 कार्य दिवसों के भीतर पूरा किया जाना अनिवार्य है। रिफंड में बेस फेयर के साथ-साथ सभी कर (Taxes) और यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) भी शामिल होती है। एयरलाइंस यात्री को 'क्रेडिट शेल' स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती; यह पूरी तरह से यात्री की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह रिफंड लेना चाहता है या क्रेडिट शेल।
यात्रियों को अपने अधिकारों का उपयोग करने के लिए जागरूक होना आवश्यक है। यदि हवाई अड्डे पर एयरलाइंस कर्मचारी सहयोग नहीं कर रहे हैं, तो यात्री को तुरंत संबंधित एयरलाइंस के नोडल अधिकारी या शिकायत सेल से संपर्क करना चाहिए। प्रत्येक एयरलाइंस की वेबसाइट पर उनके नोडल अधिकारियों और अपीलीय प्राधिकरणों की जानकारी उपलब्ध होती है। यदि एयरलाइंस स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो यात्री 'एयर सेवा' (AirSewa) पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यह भारत सरकार का एक केंद्रीकृत मंच है जहां विमानन संबंधी शिकायतों का निवारण किया जाता है। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एयरलाइंस को टैग करके अपनी समस्या साझा करना भी प्रभावी साबित होता है, क्योंकि आज के समय में कंपनियां अपनी डिजिटल प्रतिष्ठा को लेकर अत्यंत सजग रहती हैं।
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