झारखंड के चतरा में शर्मसार हुई मानवता: आवासीय विद्यालय की तीसरी कक्षा की छात्रा मिली गर्भवती, 50 वर्षीय शिक्षक पर दुष्कर्म का आरोप।

झारखंड के चतरा जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जिसने समाज के विश्वास और सुरक्षा के

Apr 11, 2026 - 14:05
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झारखंड के चतरा में शर्मसार हुई मानवता: आवासीय विद्यालय की तीसरी कक्षा की छात्रा मिली गर्भवती, 50 वर्षीय शिक्षक पर दुष्कर्म का आरोप।
झारखंड के चतरा में शर्मसार हुई मानवता: आवासीय विद्यालय की तीसरी कक्षा की छात्रा मिली गर्भवती, 50 वर्षीय शिक्षक पर दुष्कर्म का आरोप।
  • गुरु-शिष्य परंपरा को कलंकित करने वाली खौफनाक वारदात: मासूम आदिवासी बच्ची के साथ स्कूल में हुआ घिनौना कृत्य, आरोपी गिरफ्तार
  • चतरा जिले में भारी आक्रोश: आवासीय बालिका विद्यालय के शिक्षक ने मासूम को बनाया हवस का शिकार, प्रशासनिक जांच के घेरे में पूरा संस्थान

झारखंड के चतरा जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जिसने समाज के विश्वास और सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। यहाँ एक अनुसूचित जनजाति आवासीय बालिका प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाली मात्र तीसरी कक्षा की छात्रा के गर्भवती होने की पुष्टि हुई है। यह घिनौना मामला तब प्रकाश में आया जब छात्रा की शारीरिक स्थिति में बदलाव महसूस होने पर उसे स्वास्थ्य जांच के लिए ले जाया गया। चिकित्सा रिपोर्ट में जब बच्ची के गर्भवती होने की बात सामने आई, तो न केवल उसके परिजन बल्कि पूरा जिला प्रशासन सन्न रह गया। एक शिक्षण संस्थान, जिसे बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है, वहां इस तरह की बर्बरता का होना राज्य की शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षा ऑडिट पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

पीड़ित मासूम बच्ची ने अपनी आपबीती सुनाते हुए स्कूल के ही एक शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा ने बताया कि विद्यालय में पदस्थ 50 वर्षीय शिक्षक शंकर प्रसाद ने उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया। आरोपी ने अपनी उम्र और पद की गरिमा का तनिक भी ख्याल नहीं रखा और एक अबोध बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया। बच्ची ने डर के मारे लंबे समय तक यह बात किसी को नहीं बताई थी, क्योंकि आरोपी ने उसे डराया-धमकाया था। आवासीय विद्यालय होने के कारण बच्ची वहीं रहती थी, जिससे आरोपी को इस कुकृत्य को अंजाम देने और उसे दबाने का मौका मिला। मासूम के साथ हुई इस दरिंदगी ने यह सिद्ध कर दिया है कि रक्षक ही भक्षक बन चुका है। इस घटना के बाद से पूरे चतरा जिले में उबाल है और स्थानीय लोग सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए संचालित इस आवासीय विद्यालय में सुरक्षा मानकों की भारी कमी देखी गई है। यह एक बड़ा सवाल है कि महीनों से चल रहे इस शोषण की भनक विद्यालय की महिला वार्डन, अन्य शिक्षकों या प्रबंधन को क्यों नहीं लगी। नियमानुसार, बालिका आवासीय विद्यालयों में पुरुष शिक्षकों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी होनी चाहिए, लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रखकर एक अपराधी को मासूम के जीवन के साथ खेलने की खुली छूट मिली हुई थी। प्रशासनिक टीम ने स्कूल पहुंचकर दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया है और वहां तैनात अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पोक्सो एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक शंकर प्रसाद को हिरासत में ले लिया है। उस पर भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पीड़ित बच्ची को उचित मनोवैज्ञानिक परामर्श और चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए ताकि वह इस सदमे से बाहर आ सके।

आरोपी शिक्षक की उम्र 50 वर्ष है, जो पीड़ित बच्ची के दादा की उम्र के बराबर है। समाज में शिक्षक को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन शंकर प्रसाद जैसे लोगों की करतूत ने इस पवित्र रिश्ते को अपवित्र कर दिया है। अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्यालय के प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिला कल्याण पदाधिकारी ने कहा है कि यदि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो स्कूल की मान्यता रद्द करने और संबंधित अधिकारियों को बर्खास्त करने की कार्रवाई की जाएगी। बच्ची की पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसे एक सुरक्षित केंद्र में स्थानांतरित कर दिया गया है।

झारखंड में आवासीय विद्यालयों की स्थिति पहले भी चर्चा का विषय रही है, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और जिले के पुलिस अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने मांग की है कि ऐसे विद्यालयों में केवल महिला शिक्षकों और कर्मचारियों की ही नियुक्ति होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य मासूम को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या आरोपी ने किसी अन्य बच्ची के साथ भी इस तरह का व्यवहार किया है। पीड़ित बच्ची का स्वास्थ्य इस समय नाजुक बना हुआ है और उसे बेहतर इलाज के लिए रिम्स रांची भेजने की तैयारी चल रही है। यह मामला न केवल एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि एक सामाजिक विफलता भी है जहाँ एक छोटी सी बच्ची अपने ही विद्यालय में सुरक्षित नहीं रह सकी। चतरा की सड़कों पर हो रहे प्रदर्शनों में लोगों ने आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की है। सरकार ने भी आश्वासन दिया है कि इस मामले में त्वरित सुनवाई (Fast Track Trial) सुनिश्चित की जाएगी ताकि अपराधी को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके। समाज अब इस बात का इंतजार कर रहा है कि कब उस मासूम को न्याय मिलेगा जिसके बचपन को एक दरिंदे ने कुचल दिया है।

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