संसद परिसर में दिखी ऐतिहासिक एकजुटता: महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर पीएम मोदी और राहुल गांधी ने साथ अर्पित की पुष्पांजलि।

भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बेहद खास और यादगार पल का गवाह बना। महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं

Apr 11, 2026 - 14:10
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संसद परिसर में दिखी ऐतिहासिक एकजुटता: महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर पीएम मोदी और राहुल गांधी ने साथ अर्पित की पुष्पांजलि।
संसद परिसर में दिखी ऐतिहासिक एकजुटता: महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर पीएम मोदी और राहुल गांधी ने साथ अर्पित की पुष्पांजलि।
  • विचारधाराओं की जंग के बीच राष्ट्र नायकों के सम्मान में एक हुए दिग्गज: प्रेरणा स्थल पर प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता की मुलाकात ने खींचा सबका ध्यान
  • ज्योतिबा फुले की विरासत को नमन: संसद में जुटे पक्ष-विपक्ष के शीर्ष नेता, सामाजिक न्याय के पुरोधा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

आज 11 अप्रैल 2026 का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बेहद खास और यादगार पल का गवाह बना। महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के गौरवशाली अवसर पर संसद भवन परिसर के 'प्रेरणा स्थल' पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, जो अक्सर तीखी राजनीतिक बहसों और वैचारिक मतभेदों के लिए जाने जाते हैं, आज एक साथ महात्मा फुले की प्रतिमा के सामने नतमस्तक नजर आए। इस मुलाकात ने न केवल संसद के भीतर की कड़वाहट को कुछ पल के लिए शांत किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि राष्ट्र के नायकों का सम्मान किसी भी दलीय राजनीति से ऊपर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह ही प्रेरणा स्थल पहुंचे, जहाँ उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि महात्मा फुले का जीवन समानता, न्याय और शिक्षा के आदर्शों के लिए समर्पित था। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए फुले के योगदान को याद किया। पीएम ने सोशल मीडिया पर भी अपने संदेश में लिखा कि इस वर्ष हम उनकी 200वीं जन्मशती समारोह की शुरुआत कर रहे हैं, और उनके विचार हमें सामाजिक प्रगति की दिशा में निरंतर प्रेरित करते रहेंगे। उसी समय विपक्षी खेमे की ओर से राहुल गांधी भी श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे। प्रेरणा स्थल पर जब पीएम मोदी और राहुल गांधी का सामना हुआ, तो दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया। हालांकि यह एक औपचारिक मुलाकात थी, लेकिन जिस सौहार्दपूर्ण माहौल में दोनों ने साथ खड़े होकर पुष्पांजलि अर्पित की, उसने वहां मौजूद सभी सांसदों और मीडिया कर्मियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। राहुल गांधी ने भी महात्मा फुले को नमन करते हुए उन्हें सामाजिक न्याय का पथ-प्रदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि फुले जी ने शिक्षा को सशक्तिकरण का सबसे बड़ा हथियार बनाया था और आज भी उनकी शिक्षाएं प्रासंगिक हैं।

200वीं जयंती का विशेष महत्व

महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को हुआ था। वर्ष 2026 उनकी 200वीं जयंती के रूप में मनाई जा रही है। भारत सरकार ने इस वर्ष को विशेष समारोहों के साथ मनाने का निर्णय लिया है। महात्मा फुले ने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर भारत में महिला शिक्षा की नींव रखी थी और जातिगत भेदभाव के खिलाफ 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की थी। उनके इसी योगदान को सम्मान देने के लिए आज संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम बड़े नेता एकजुट हुए।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, अर्जुन राम मेघवाल और राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश समेत कई दिग्गज नेता भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान संसद परिसर का वातावरण राष्ट्रभक्ति और समाज सुधार के संकल्पों से ओतप्रोत नजर आया। पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने बारी-बारी से प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। कई मौकों पर नेताओं को आपस में छोटी-छोटी चर्चाएं करते हुए भी देखा गया, जो लोकतंत्र की जीवंतता का प्रतीक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे ऐतिहासिक अवसरों पर नेताओं की एकजुटता जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजती है।

महात्मा ज्योतिबा फुले की विरासत पर चर्चा करते हुए नेताओं ने उनके द्वारा लिखित पुस्तकों, विशेषकर 'गुलामगीरी' का उल्लेख किया, जिसने सदियों से दबे-कुचले लोगों को नई आवाज दी थी। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी सरकार फुले के सपनों को साकार करने के लिए 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर काम कर रही है। वहीं, राहुल गांधी ने वंचितों की आवाज उठाने के फुले के संकल्प को ही अपनी राजनीति का मुख्य आधार बताया। अलग-अलग विचारधाराओं के बावजूद, दोनों नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया कि महात्मा फुले जैसे महापुरुषों ने ही आधुनिक भारत की नींव रखी थी। संसद के प्रेरणा स्थल पर हुई इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। लोगों के लिए यह देखना काफी सुखद रहा कि देश के दो सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी एक साथ देश के महान सपूत को नमन कर रहे हैं। इस आयोजन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि चाहे संसद के भीतर कितनी भी बहस हो, लेकिन जब बात देश की संस्कृति और नायकों की आती है, तो भारत का नेतृत्व हमेशा एक स्वर में बोलता है। महात्मा फुले की 200वीं जयंती का यह वर्ष देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाएगा, जिसमें उनकी जीवनी और संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा।

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