हमारे उम्मीदवारों पर हाथ उठाने वालों का हिसाब करेगी नई सरकार, पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन की हुंकार, असम के मुख्यमंत्री ने कहा।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के साथ ही सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। असम के मुख्यमंत्री
- बंगाल चुनाव के रण में हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा एलान, भाजपा की जीत का दावा और हिंसा करने वालों को सख्त चेतावनी
- चुनावी हिंसा पर हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा प्रहार, 'दौड़ा-दौड़ाकर मारेंगे' वाले बयान से सियासी गलियारों में मची भारी हलचल
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के साथ ही सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। असम के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता हिमंत बिस्वा सरma ने बंगाल की धरती से एक ऐसा बयान दिया है जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में दावा किया है कि इस बार बंगाल में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार आ रही है। उन्होंने चुनावी रैलियों में हो रही हिंसा और भाजपा उम्मीदवारों पर हो रहे हमलों को लेकर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि जिन लोगों ने हमारे कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों के साथ मारपीट की है, उन्हें भाजपा की सरकार आने के बाद बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कानून का राज स्थापित होने के बाद ऐसे उपद्रवियों को भागने की जगह नहीं मिलेगी और उन्हें उनके किए की सजा भुगतनी होगी।
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति वर्तमान में बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है, जहाँ पहले चरण के मतदान के दौरान भी कई स्थानों से हिंसा की खबरें सामने आई हैं। मुख्यमंत्री सरमा ने आरोप लगाया कि राज्य में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है और विपक्षी दलों के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उन घटनाओं का जिक्र किया जिनमें भाजपा उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के दौरान डराने और शारीरिक रूप से चोट पहुंचाने की कोशिश की गई। उनके अनुसार, यह हिंसा इस बात का प्रमाण है कि सत्ताधारी दल अपनी हार के डर से बौखला गया है। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की जनता अब डर के साये से बाहर निकल चुकी है और मतदान के माध्यम से इस आतंक का अंत करने के लिए तैयार है।
चुनावी रणनीतियों और राज्य के भविष्य पर चर्चा करते हुए असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल का विकास पिछले कई दशकों से बाधित है। उन्होंने पड़ोसी राज्य असम का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह वहां डबल इंजन की सरकार ने घुसपैठ और उग्रवाद जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाया है। उन्होंने बंगाल की जनता को आश्वासन दिया कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार ने केवल तुष्टिकरण की राजनीति की है, जिससे राज्य की मूल संस्कृति और सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा की सरकार बनते ही राज्य की कानून-व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन किया जाएगा और अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ पैदा किया जाएगा।
चुनावी हिंसा
बंगाल चुनाव के पहले चरण में 92 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया है, जो जनता की भारी भागीदारी को दर्शाता है। हालांकि, कूचबिहार और दक्षिण दिनाजपुर जैसे क्षेत्रों में उम्मीदवारों पर हमलों की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्वाचन आयोग ने इन मामलों में रिपोर्ट तलब की है, जबकि भाजपा ने इसे सत्ताधारी दल की सोची-समझी साजिश करार दिया है।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में विशेष समुदाय को खुश करने के लिए बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को आहत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भाषणों में अक्सर विशेष धार्मिक अभिवादन ही सुनाई देते हैं, जबकि 'जय श्री राम' जैसे नारों से उन्हें परहेज है। सरमा ने कहा कि बंगाल की धरती मां दुर्गा और मां काली की उपासना की भूमि है, और यहां किसी को भी अपनी आस्था प्रकट करने से रोका नहीं जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा के शासन में किसी भी खान-पान पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा, बल्कि उन लोगों पर नकेल कसी जाएगी जो गो-तस्करी और अन्य अवैध धंधों में संलिप्त हैं।
असम के मुख्यमंत्री ने बंगाल में गुंडाराज के अंत की समय सीमा तय करते हुए कहा कि मई की शुरुआत में जैसे ही चुनाव परिणाम आएंगे, अपराधियों के दिन गिनती के रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग आज सत्ता के संरक्षण में हिंसा फैला रहे हैं, उन्हें भविष्य में आत्मसमर्पण के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उनके अनुसार, भाजपा की सरकार प्रतिशोध की राजनीति नहीं बल्कि न्याय की राजनीति करेगी, जिसमें उन सभी लोगों को सजा मिलेगी जिन्होंने कानून को अपने हाथ में लिया है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे निडर होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करें और एक ऐसी सरकार चुनें जो उनकी सुरक्षा की गारंटी दे सके। उनके भाषणों ने विशेष रूप से उन कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है जो लंबे समय से राजनीतिक हिंसा का शिकार रहे हैं।
विदेशी घुसपैठ और नागरिकता के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल की जनसांख्यिकी को जानबूझकर बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के संसाधनों का उपयोग अवैध प्रवासियों के कल्याण के लिए किया जा रहा है, जबकि यहां के मूल निवासी गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। उन्होंने वादा किया कि भाजपा की सरकार आते ही राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर जैसी प्रक्रियाओं और सख्त सीमा प्रबंधन के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल को 'मिनी बांग्लादेश' बनने से रोकना भाजपा की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए कड़े से कड़े कदम उठाए जाएंगे।
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