दिल्ली में अतिक्रमण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई, कई बहुमंजिला अवैध इमारतें जमींदोज
इस विशाल ध्वस्तीकरण अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है। इसके अतिरिक्त आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एम्बुलेंस
- उच्च न्यायालय के कड़े आदेश के बाद राजधानी के प्रमुख रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में गर्जा सरकारी बुलडोजर
- भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के बीच शुरू हुआ महा-अभियान, अवैध कब्जों को हटाने की समयसीमा समाप्त
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। दिल्ली के विभिन्न संवेनदशील और रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से खड़ी की गई बहुमंजिला इमारतों तथा सरकारी जमीनों पर किए गए कब्जों को हटाने के लिए भारी संख्या में बुलडोजर तैनात किए गए हैं। उच्च न्यायालय के सख्त आदेशों के बाद स्थानीय प्रशासन और विकास प्राधिकरणों ने संयुक्त रूप से इस अभियान को अंजाम देना शुरू किया है, जिसके तहत कई अवैध व्यावसायिक और आवासीय परिसरों को मलबे में तब्दील कर दिया गया है। इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक अमले में जहां मुस्तैदी देखी जा रही है, वहीं प्रभावित क्षेत्रों में भारी अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। देश की राजधानी के शालीमार बाग गांव और उसके आस-पास के क्षेत्रों में प्रशासनिक कार्रवाई के तहत रविवार तड़के से ही भारी संख्या में जेसीबी और बुलडोजर मशीनों को काम पर लगा दिया गया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा पहले ही अवैध संपत्तियों के मालिकों और निवासियों को जगह खाली करने के लिए कड़े नोटिस जारी किए गए थे, जिसकी समयसीमा समाप्त होते ही विभाग ने बिना किसी देरी के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी। इस बड़े स्तर के अभियान के चलते संबंधित क्षेत्रों को पूरी तरह से पुलिस छावनी में बदल दिया गया है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहे। मुख्य सड़कों के चौड़ीकरण और सरकारी जमीनों को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने के लिए सैकड़ों की तादाद में पक्के निर्माणों को ढहाने का काम निरंतर जारी है।
इस विशाल ध्वस्तीकरण अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है। इसके अतिरिक्त आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एम्बुलेंस और अग्निशमन दल की गाड़ियों को भी मौके पर मुस्तैद रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि उच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत यह कार्रवाई की जा रही है, जिसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन रिहायशी इलाकों में संकरी गलियों और सड़कों के किनारे अवैध रूप से बहुमंजिला ढांचों का निर्माण कर लिया गया था, वहां सुरक्षा घेरा बनाकर और बैरिकेडिंग करके बुलडोजर चलाए जा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में धूल और मलबे का गुबार देखा जा सकता है।
प्रशासनिक स्तर पर इस कार्रवाई की रूपरेखा काफी समय पहले ही तैयार कर ली गई थी और संबंधित भूखंडों की जियो-टैगिंग तथा पैमाइश भी पूरी की जा चुकी थी। जिन रिहायशी इमारतों को इस अभियान के तहत लक्षित किया गया है, वहां रहने वाले सैकड़ों परिवारों में पिछले कई दिनों से बेचैनी का माहौल था और लोग अपना कीमती सामान, घरेलू उपकरण तथा गाड़ियां ट्रकों और टेंपो में भरकर सुरक्षित स्थानों की ओर ले जाते नजर आए। कई लोगों ने खुद ही अपने मकानों के आगे के हिस्से को तोड़ना शुरू कर दिया था ताकि पूरी इमारत को जमींदोज होने से बचाया जा सके। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नक्शे और स्वीकृत मापदंडों के विपरीत किए गए किसी भी निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा और पूरी सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।
दक्षिण दिल्ली के मैदान गढ़ी और जैव विविधता पार्क के आस-पास के सुदूर क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर इसी तरह की कार्रवाई को अंजाम दिया गया है, जहां विकास प्राधिकरण ने बहुमूल्य सरकारी भूमि पर बने दर्जनों अवैध फार्महाउसों और पक्के परिसरों को ध्वस्त कर दिया है। वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में कई एकड़ वन भूमि को भू-माफियाओं के अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है, जिसे आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक उपयोग के लिए विकसित किया जाएगा। राजधानी के मुख्य जलभराव वाले क्षेत्रों और यमुना के डूब क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की अवैध कॉलोनियों और नए पक्के निर्माणों को लेकर कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जिससे आने वाले दिनों में बुलडोजर की कार्रवाई का दायरा और अधिक बढ़ने की संभावना है। दिल्ली विकास प्राधिकरण और नगर निगम द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, दिल्ली के किसी भी क्षेत्र में बिना स्वीकृत नक्शे या सरकारी जमीन पर किया गया कोई भी निर्माण पूरी तरह से अवैध माना जाएगा। ऐसे मामलों में बिना किसी पूर्व अतिरिक्त सूचना के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है, और इस प्रक्रिया में होने वाले खर्च की वसूली भी संबंधित संपत्ति धारक से ही की जाएगी।
इस कड़े कदम के कारण स्थानीय निवासियों को अत्यधिक व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि अचानक घर उजड़ने से कई परिवार किराए के मकानों में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। प्रभावित लोगों का तर्क है कि वे इन क्षेत्रों में पिछले कई दशकों से रह रहे हैं और उनके पास बिजली, पानी के कनेक्शन के साथ-साथ वैध पहचान पत्र भी मौजूद हैं। इसके बावजूद, बिना किसी वैकल्पिक आवास या उचित मुआवजे की व्यवस्था के इस तरह की अचानक कार्रवाई से उनके जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। विशेष रूप से दिहाड़ी मजदूर, रेहड़ी-पटरी वाले और मंडियों में काम करने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अचानक नए ठिकाने की तलाश करना और बच्चों की पढ़ाई को जारी रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
प्रशासनिक तंत्र इस कार्रवाई को शहरी नियोजन और भविष्य की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए अनिवार्य मान रहा है। लगातार बढ़ती जनसंख्या और अनियंत्रित निर्माण के कारण दिल्ली की सड़कों पर यातायात का दबाव अभूतपूर्व रूप से बढ़ गया है, जिसके समाधान के लिए सड़कों को चौड़ा करना और सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाना बेहद जरूरी हो गया था। इस अभियान के तहत न केवल रिहायशी मकानों को बल्कि उन व्यावसायिक दुकानों और गोदामों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जिन्होंने सार्वजनिक फुटपाथों और रास्तों को पूरी तरह से अवरुद्ध कर रखा था। अधिकारियों का दावा है कि इस सफाई अभियान के पूरा होने के बाद बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों में तेजी आएगी और आम जनता को जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।
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