उत्तर प्रदेश में संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति के लिए डिजिटल एएमएस व्यवस्था 15 जून से अनिवार्य
इस नई डिजिटल प्रणाली को अटेंडेंस मैनेजमेंट सिस्टम (एएमएस) का नाम दिया गया है, जिसे विशेष रूप से स्वास्थ्य विभाग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, आगामी 15 जून से पूरे प्रदेश में इस व्यवस्था को अनिवार्य रू
- एनएचएम के तहत कार्यरत 3 लाख कर्मचारियों को समय पर ड्यूटी आने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का बड़ा निर्देश
- बायोमेट्रिक और जीपीएस आधारित प्रणाली से रुकेगी कागजी हेरफेर, सीधे राज्य मुख्यालय से होगी हाजिरी की निगरानी
उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत करीब तीन लाख संविदा स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से सरकार ने अब सभी कर्मचारियों की उपस्थिति को एक नई डिजिटल प्रणाली से जोड़ने का निर्णय लिया है। इस नए कदम के तहत सभी संविदाकर्मियों की दैनिक उपस्थिति अब अटेंडेंस मैनेजमेंट सिस्टम (एएमएस) के माध्यम से दर्ज की जाएगी, जिसे पूरी तरह से ऑनलाइन और जीपीएस आधारित बनाया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुदृढ़, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों, ब्लॉकों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात लगभग तीन लाख संविदा कर्मचारियों की दैनिक उपस्थिति को अब एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के दायरे में लाया जा रहा है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कागजी हाजिरी व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करना है, जिसमें अक्सर गड़बड़ी और समय की हेराफेरी की शिकायतें मिलती रहती थीं। इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल कर्मचारियों की कार्यस्थल पर उपस्थिति सुनिश्चित होगी, बल्कि ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सेवाओं के स्तर में भी व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
इस नई डिजिटल प्रणाली को अटेंडेंस मैनेजमेंट सिस्टम (एएमएस) का नाम दिया गया है, जिसे विशेष रूप से स्वास्थ्य विभाग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, आगामी 15 जून से पूरे प्रदेश में इस व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा। इस प्रणाली के तहत एनएचएम के सभी अधिकारियों, पैरामेडिकल स्टाफ, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (सीएचओ), एएनएम, स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन को रोज़ाना अपनी उपस्थिति इसी ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए दर्ज करनी होगी। इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से जियो-फेंसिंग और जीपीएस तकनीक पर आधारित है, जिससे कोई भी कर्मचारी अपने निर्धारित कार्यस्थल से बाहर रहकर गलत हाजिरी दर्ज नहीं कर सकेगा।
इस तकनीकी बदलाव को अमलीजामा पहनाने के लिए राज्य मुख्यालय स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा चुकी हैं और सभी जिला स्वास्थ्य समितियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं। डिजिटल उपस्थिति की इस व्यवस्था को सीधे कर्मचारियों के वेतन और मानदेय भुगतान से जोड़ा जा रहा है, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय विसंगति की संभावना खत्म हो जाएगी। पहले चरण में सभी कर्मचारियों का डेटा इस नए पोर्टल पर फीड किया जा रहा है, जिसमें उनकी वर्तमान तैनाती का स्थान, पदनाम और मोबाइल नंबर जैसी जानकारियां शामिल हैं। 15 जून की समयसीमा तय होने के कारण सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में इस व्यवस्था का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस कड़े कदम के पीछे विभाग का मुख्य उद्देश्य दूरदराज के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण आम जनता को होने वाली परेशानियों को दूर करना है। अक्सर ऐसी शिकायतें आती थीं कि कई कर्मचारी कागजों पर तो उपस्थित रहते थे, लेकिन वास्तविक रूप से वे अपने केंद्रों पर ड्यूटी के समय उपलब्ध नहीं होते थे। नई जीपीएस आधारित प्रणाली के चालू होने के बाद जैसे ही कोई कर्मचारी अपने केंद्र की परिधि के भीतर आकर मोबाइल ऐप पर अपनी उपस्थिति दर्ज करेगा, उसका सटीक स्थान और समय सीधे राज्य स्तरीय सर्वर पर दर्ज हो जाएगा। इससे कार्यस्थल से गायब रहने वाले या देरी से आने वाले कर्मचारियों पर स्वतः ही शिकंजा कस जाएगा और व्यवस्था में अनुशासन आएगा। 15 जून के बाद यदि कोई संविदा स्वास्थ्यकर्मी डिजिटल अटेंडेंस मैनेजमेंट सिस्टम पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करता है, तो उस दिन को अनाधिकृत अनुपस्थिति माना जाएगा। बिना पूर्व सूचना या उचित तकनीकी कारण के लगातार अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों का उस अवधि का मानदेय रोक दिया जाएगा, जिसके लिए पूरी तरह से कर्मचारी स्वयं जिम्मेदार होगा।
इस व्यवस्था के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासनिक हलकों में काफी गंभीरता देखी जा रही है क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं का सीधा संबंध आम नागरिकों के जीवन से है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इस प्रणाली के माध्यम से राज्य के स्वास्थ्य बजट का सही और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। संविदा पर काम करने वाले लाखों कर्मचारियों की हाजिरी की लाइव मॉनिटरिंग होने से स्वास्थ्य योजनाओं को धरातल पर उतारने में गति मिलेगी। इसके साथ ही, जो कर्मचारी पूरी ईमानदारी और समयबद्धता के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनके रिकॉर्ड को भी इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से एक सुरक्षित पहचान मिलेगी, जिससे उनके मूल्यांकन और नवीनीकरण की प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष हो जाएगी।
कर्मचारियों के स्तर पर इस नई प्रणाली को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या बनी रहती है। ग्रामीण और सुदूर अंचलों में तैनात एएनएम और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स का मानना है कि कई बार नेटवर्क न होने के कारण ऐप पर उपस्थिति दर्ज करने में तकनीकी बाधाएं आ सकती हैं, जिससे उनका मानदेय प्रभावित होने का डर रहेगा। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसी व्यावहारिक समस्याओं से निपटने के लिए ऐप में ऑफलाइन मोड या टाइम-स्टैम्प बैकअप जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं, ताकि किसी भी genuine कर्मचारी को कनेक्टिविटी की वजह से नुकसान न उठाना पड़े।
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