Delhi Blast : दिल्ली में तीन लोकेशन, सात डॉक्टरों का कनेक्शन,  रहस्यमय कार धमाके की जांच में नया मोड़

पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई में बड़ी चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। पहला, इन डॉक्टरों के सम्पर्क-विस्तार की परिधि अभी स्पष्ट नहीं है। दूसरा, यह नहीं पता

Nov 11, 2025 - 22:40
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Delhi Blast : दिल्ली में तीन लोकेशन, सात डॉक्टरों का कनेक्शन,  रहस्यमय कार धमाके की जांच में नया मोड़
Delhi Blast : दिल्ली में तीन लोकेशन, सात डॉक्टरों का कनेक्शन,  रहस्यमय कार धमाके की जांच में नया मोड़

नई दिल्ली : राजधानी की नजदीकी ‘पुरानी दिल्ली’ इलाके में हुए कार धमाके के मामले में अब ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जिनसे इसे केवल एक आम विस्फोट कहा नहीं जा सकता। घटना के बाद लगभग तीन अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई के सिलसिले और सात डॉक्टरों तक फैल रहे इन्वेस्टिगेशन ने राजनेताओं, सुरक्षा एजेंसियों और आम लोगों के लिए नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुंबई-दिल्ली के बीच कभी दिखने वाला यह पैटर्न अब राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक स्थल के पास देखने को मिला है। मामले की शुरुआत उस शाम हुई थी, जब एक सफेद रंग की कार अचानक लाल बत्ती पर रुकी और इसके कुछ ही देर बाद उसमें धमाका हुआ था धमाके ने आसपास की कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था और काफी संख्या में लोगों को घायल कर दिया गया था।

जांच में अब पता चला है कि:

  • धमाके के बाद जांच एजेंसियों ने तीन अलग-अलग लोकेशनों पर तलाशी एवं छापामार कार्रवाई की है। इनमें राजधानी दिल्ली के भीतर और उसके बाहरी इलाकों में शामिल हैं।

  • सात डॉक्टरों को इस संदर्भ में नामों या संदेह के घेरे में लिया गया है। उदाहरण के तौर पर Umar Mohammad नामक डॉक्टर को मुख्य संदिग्ध माना जा रहा है, जिसे डॉक्टरों के एक समूह से जुड़ा बताया गया है।

  • इन डॉक्टरों के नेटवर्क में संकेत मिल रहे हैं कि उन्होंने डिजिटल माध्यम (जैसे टेलीग्राम चैनल) के जरिए आपसी संपर्क और संभावित अन्य गतिविधियाँ साझा की थीं।

  • थानों, होटलों, अस्पतालों और अन्य ट्रांजिट प्वाइंट्स की निगरानी बढ़ाई गई है और विशेष रूप से उन स्थानों पर पुलिस-निगरानी दोगुनी कर दी गई है जहाँ इन डॉक्टरों की उपस्थिति की पुष्टि हुई है या जहाँ उनसे संबंधित उपकरण दर्ज हुए हैं।

  • धमाके की कार का सफर, पार्किंग और उसके बाद हुए विस्फोट की टाइमलाइन अब तक प्रमुख बिंदु बनी हुई है। सीसीटीवी फुटेज से निरीक्षण किया गया है कि कार ने दिल्ली की सीमाओं से प्रवेश किया, फिर कुछ समय के लिए पार्क की गई, और अंततः उस बत्ती पर रुककर विस्फोट हुआ।

घटना के बाद से सुरक्षा-चौकसी बढ़ा दी गई है। प्रमुख ऐतिहासिक स्थल, मेट्रो स्टेशन, बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर अतिरिक्त गश्त और वाहन जांच जारी है। इसी बीच सरकार ने कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे मामले की गांठ खोलने के लिए केंद्रीय एजेंसियाँ जुटी हैं।

फिलहाल जो जानकारी सार्वजनिक हुई है, वह इस प्रकार है :
इस धमाके को घटना स्थल से कुछ दूरी पर मौजूद तीन अलग-अलग स्थानों से जुड़े छापामार अभियानों से जोड़ा जा रहा है। इनमें एक स्थान वह है जहाँ कार पार्क की गई थी, दूसरा वह मार्ग जिसे कार ने तय किया था और तीसरा वह जगह जहाँ संदिग्धों का नेटवर्क सक्रिय पाया गया। इस प्रकार तीन “लोकेशन” का जिक्र सामने आया है।
सात डॉक्टरों का नाम अब तक मुख्य रूप से सामने आया है, जिनमें से कुछ को पहले ही हिरासत में लिया गया है या उनसे पूछताछ हो रही है। डॉक्टरों के इस समूह को ‘व्हाइट कॉलर मॉड्यूल’ के रूप में जांच एजेंसियों ने चिन्हित किया है।

इन बिंदुओं ने इस हमले को सिर्फ एक स्थानीय घटना से बढ़कर एक सुनियोजित साजिश के रूप में प्रस्तुत कर दिया है। हमलावरों ने लॉजिस्टिक यानी गाड़ी का चयन, पार्किंग-स्थान, समय, और संभवतः विस्फोटक व्यवस्था सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से किया हो सकता है। इसके चलते यह सवाल उठे हैं कि यह अकेला हमला था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है।

पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई में बड़ी चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। पहला, इन डॉक्टरों के सम्पर्क-विस्तार की परिधि अभी स्पष्ट नहीं है। दूसरा, यह नहीं पता कि किन-किन अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों या अन्य संस्थानों में ये डॉक्टर सक्रिय थे या उनकी भूमिका क्या-क्या थी। तीसरा, इस नेटवर्क में शामिल लोगों ने किस तरह से उपकरण-सामग्री इकठ्ठा की, गाड़ी कैसे प्राप्त की, पार्किंग व्यवस्था कैसे की, इन सबका पर्दाफाश अभी बाकी है।

आगे क्या होने वाला है? जांच एजेंसियाँ निम्नलिखित पर विशेष रूप से काम कर रही हैं : डॉक्टरों के मोबाइल और डिजिटल डाटा की जाँच, उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की पड़ताल, पार्क की गई कार और उसके रूट की ट्रैकिंग, घटनास्थल पर मिले विस्फोटक के प्रकार-प्रोफाइल की फोरेंसिक जाँच, और यदि यह पाया जाता है कि यह हमला आतंक-सृजित है, तो किस संगठन का हाथ है और उसने किन साधनों का उपयोग किया है।

साथ ही आम नागरिकों और पर्यटकों के लिए यह समय-बोधक है कि प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सामान्य से अधिक सतर्कता बरती जाए। सुरक्षा एजेंसियों ने राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर इलाकों को सील कर दिया है और चेतावनी जारी की है कि किसी भी संदिग्ध वस्तु, पैकेज या असामान्य व्यवहार को तुरंत पुलिस को सूचित करें।

इस पूरे घटनाक्रम से यह सुनिश्चित हो गया है कि राजधानी के भीतर इस तरह की घटना कहीं-ना-कहीं संदिग्ध नेटवर्क-सक्रियता को उजागर कर रही है। केवल दमाके का स्वरूप-दौरूस्त नहीं, बल्कि उसे अंजाम देने वालों का विश्लेषण-चैलेंज भी अधिक है। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ दिनों में सामने आए तथ्य, जैसे डॉक्टरों के पूछताछ के परिणाम, फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल ट्रेस आदि, इस साजिश को पूरी तरह समझने में मदद करेंगे।

अभी यह तय नहीं हुआ है कि इस हमले के पीछे किस संगठन का हाथ है, किन-किन डॉक्टरों ने किस भूमिका में काम किया, और यह नेटवर्क कितनी व्यापक था। लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि सिर्फ एक कार धमाका नहीं था बल्कि तीन-चार स्थानों और सात डॉक्टरों तक फैले एक जटिल मामले की शुरुआत थी। जांच-प्रक्रिया अभी जारी है और हर उपलब्ध सुराग को खंगालने का काम तेज किया गया है।

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