PM Modi Forgives Protesters: 'माफ करने' वाले बयान पर कांग्रेस का पलटवार, जयराम रमेश बोले- विक्टिम कार्ड खेल रहे पीएम
Jairam Ramesh Attacks PM Modi: प्रदर्शनकारियों को माफ करने वाले पीएम मोदी के बयान पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा तंज कसा है। जानें पूरी राजनीतिक रिपोर्ट।
- Jairam Ramesh Statement: पीएम मोदी के माफ करने वाले बयान पर भड़की कांग्रेस, जयराम रमेश ने कसा तीखा तंज
- 'पीएम मोदी को विक्टिम कार्ड खेलना बेहद पसंद...' प्रदर्शनकारियों को माफ करने के बयान पर जयराम रमेश का तीखा हमला
- PM Modi Protesters Row: प्रदर्शनकारियों को माफ करने वाले पीएम मोदी के बयान पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश का बड़ा हमला
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय से बयान जारी करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि खुद को 'नॉन-बायोलॉजिकल' बताने वाले प्रधानमंत्री को विक्टिम कार्ड खेलना बेहद पसंद है और प्रदर्शनकारी युवाओं को 'माफ करने' का उनका बयान आत्ममुग्धता की पराकाष्ठा है। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने कथित रूप से अपने और अपनी दिवंगत मां के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करने वाले प्रदर्शनकारियों के प्रति बड़प्पन दिखाते हुए उन्हें माफ करने की बात कही थी। इस बयान के सामने आने के बाद अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनके और उनकी दिवंगत माताजी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को 'माफ' करने से जुड़ा बयान दिया गया था। इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के इस रुख को राजनीतिक नाटक करार दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सहानुभूति हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
देश भर में विभिन्न मुद्दों पर चल रहे राजनीतिक और छात्र आंदोलनों के दौरान कुछ प्रदर्शनों में कथित तौर पर प्रधानमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ असंसदीय और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान उदार रवैया अपनाते हुए कहा था कि एक अभिभावक और राष्ट्र के सेवक के रूप में वे उन युवाओं को माफ करते हैं, जिन्होंने नादानी या बहकावे में आकर ऐसी बातें कहीं।
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे पीएम के विशाल हृदय और संयम का प्रतीक बताया। हालांकि, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे तुरंत राजनीतिक रंग देने का प्रयास करार दिया।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया और प्रेस मीडिया के माध्यम से कहा कि प्रधानमंत्री देश के युवाओं की जायज मांगों, जैसे रोजगार और परीक्षा में पारदर्शिता, का समाधान करने के बजाय खुद को पीड़ित के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने 'आत्ममुग्धता' दिखाते हुए युवाओं को माफ करने का दावा किया है, जबकि देश का युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा हमला बोलते हुए कहा:
"खुद को नॉन-बायोलॉजिकल बताने वाले प्रधानमंत्री को विक्टिम कार्ड खेलना बेहद पसंद है। युवाओं को 'माफ' करने की बात कहना उनकी आत्ममुग्धता की पराकाष्ठा को दर्शाता है। देश का युवा कोई दया की भीख नहीं मांग रहा, बल्कि वह अपने भविष्य, नौकरियों और अधिकारों के लिए सरकार से सवाल पूछ रहा है। सरकार को इन तीखे सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि विक्टिम कार्ड खेलकर सहानुभूति बटोरनी चाहिए।"
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ताओं ने जयराम रमेश के बयान का करारा जवाब दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि:
"विपक्ष लगातार राजनीति के स्तर को नीचे गिरा रहा है। प्रधानमंत्री और उनकी दिवंगत माताजी के लिए जिस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसे देश की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। प्रधानमंत्री ने फिर भी बड़प्पन दिखाते हुए युवाओं को क्षमा करने की बात कही, लेकिन कांग्रेस को इसमें भी राजनीति नजर आ रही है, जो उनकी हताशा को दर्शाती है।"
प्रधानमंत्री के बयान और उस पर कांग्रेस के पलटवार से देश के राजनीतिक माहौल में बयानबाजी और तेज हो गई है। आगामी चुनावों और राष्ट्रीय मुद्दों को देखते हुए दोनों ही प्रमुख दल युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जहां एक ओर भाजपा इसे प्रधानमंत्री के संवेदनशील और अभिभावक वाले रूप के तौर पर पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे युवाओं के वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति बता रहा है।
इस जुबानी जंग के आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक जारी रहने के आसार हैं। विपक्षी दल युवाओं और छात्रों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर अडिग हैं, जबकि सत्ता पक्ष मर्यादा और भाषाई शुचिता के मुद्दे पर विपक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में लाने का प्रयास कर रहा है।
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