Bahraich : रेशम विभाग ने शुरू किया रेशम मित्र पोर्टल, लाभार्थी ऐसे कर सकते हैं ऑनलाइन पंजीकरण

रेशम के प्रचार और शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान के लिए रेशम निदेशालय स्तर पर केंद्र ऑफ एक्सीलेंस बनाया जा रहा है। यह केंद्र केंद्रीय रेशम बोर्ड और राज्य सरकार के सहयोग से चले

Feb 13, 2026 - 23:47
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Bahraich : रेशम विभाग ने शुरू किया रेशम मित्र पोर्टल, लाभार्थी ऐसे कर सकते हैं ऑनलाइन पंजीकरण
Bahraich : रेशम विभाग ने शुरू किया रेशम मित्र पोर्टल, लाभार्थी ऐसे कर सकते हैं ऑनलाइन पंजीकरण

उत्तर प्रदेश में रेशम उत्पादन उभरता उद्योग बन रहा है

उत्तर प्रदेश में रेशम उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। यह तकनीकी आधार वाला क्षेत्र है जिसमें गरीब किसान, मजदूर और बड़े उद्यमी शामिल हैं। राज्य की जलवायु और भौगोलिक स्थिति रेशम उत्पादन के लिए बहुत अनुकूल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विभाग ने पारदर्शी व्यवस्था बनाने के लिए नई रणनीति अपनाई है।

रेशम विभाग ने रेशम मित्र पोर्टल शुरू किया है। इससे केंद्र और राज्य की योजनाओं के लाभार्थी ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। मार्केटिंग मॉड्यूल के तहत रेशम कोया उत्पादकों और किसानों को उचित मूल्य, समय पर बिक्री और पारदर्शी भुगतान मिल रहा है। ककून की गुणवत्ता के आधार पर न्यूनतम बिक्री मूल्य तय करने के लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिकों के साथ जिला स्तर पर समितियां बनाई जा रही हैं।

राजकीय रेशम फार्मों को बेहतर प्रबंधन के लिए फार्म मैनेजमेंट मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है। प्रदेश में बने ककून से रेशमी धागा यहीं तैयार हो और खपत भी यहीं हो इसके लिए मल्टीएंड रीलिंग इकाइयां स्थापित की जा रही हैं।

रेशम के प्रचार और शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान के लिए रेशम निदेशालय स्तर पर केंद्र ऑफ एक्सीलेंस बनाया जा रहा है। यह केंद्र केंद्रीय रेशम बोर्ड और राज्य सरकार के सहयोग से चलेगा। यहां सॉइल टू सिल्क प्रदर्शनी के साथ शोरूम भी होगा जहां शुद्ध रेशमी परिधान बिकेंगे। एनजीओ, एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों को रेशम उत्पादन से जोड़ने के प्रयास जारी हैं।

वन विभाग, पंचायती राज, सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई और ग्राम विकास विभाग के साथ एमओयू कर रेशम कृषि का विस्तार किया जा रहा है। पिछले नौ वर्षों में रेशम निर्यात 9.11 करोड़ रुपये से बढ़कर 251.65 करोड़ रुपये हो गया है। यह वृद्धि अन्य क्षेत्रों से सबसे ज्यादा है।

रेशम उद्योग कृषि आधारित कुटीर उद्योगों में प्रमुख है। उत्तर प्रदेश की उपजाऊ भूमि, जलवायु और जैव विविधता इसके लिए उपयुक्त है। यहां शहतूती, टसर और अरण्डी तीन प्रकार का रेशम उत्पादित होता है। 1987 में अलग रेशम निदेशालय बना और 1988 से लखनऊ में कार्य शुरू हुआ।

प्रदेश में 231 राजकीय रेशम फार्म हैं। वर्तमान उत्पादन से ज्यादा रेशम की मांग है। इसलिए उत्पादन, धागाकरण, बुनाई, डिजाइनिंग और निर्यात की बड़ी संभावनाएं हैं। उच्च गुणवत्ता के लिए उत्पादकों को सहयोग दिया जाता है। मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना 2025-26 से शुरू हुई है। इससे किसानों की निजी भूमि पर शहतूत वृक्षारोपण कर अतिरिक्त रेशम धागा उत्पादन होगा। यह विकास रोजगार बढ़ा रहा है और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।

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