Sambhal : सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित, शाही जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई पर ASI नहीं ले सकती फैसला
18 फरवरी 2026 को भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि पिछले वर्ष रमज़ान माह में ASI द्वारा शाही जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई कराई गई थी, लेकिन वर्षा और धूल-मिट्टी के कारण वह
Report : उवैस दानिश, सम्भल
शाही जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई को लेकर चल रहे विवाद में शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली की ओर से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) मेरठ सर्किल को पत्र भेजकर मस्जिद की रंगाई-पुताई व सजावट कराए जाने की मांग की गई है।
18 फरवरी 2026 को भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि पिछले वर्ष रमज़ान माह में ASI द्वारा शाही जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई कराई गई थी, लेकिन वर्षा और धूल-मिट्टी के कारण वह पूरी तरह खराब हो चुकी है।
इसी वजह से इस वर्ष भी रमज़ान से पहले मस्जिद की रंगाई-पुताई व सजावट कराना अत्यंत आवश्यक बताया गया है। पत्र में अधीक्षण पुरातत्वविद्, ASI मेरठ से निवेदन किया गया है कि धार्मिक महत्व और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्य कराने की कृपा की जाए।
वहीं इस पूरे मामले पर ASI की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट विष्णु कुमार शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ASI को पत्र अवश्य प्राप्त हुआ है और उस पर संज्ञान लिया जाएगा, लेकिन फिलहाल ASI अपने स्तर से कोई अनुमति नहीं दे सकती। उन्होंने बताया कि इससे पहले जो भी रंगाई-पुताई कराई गई थी, वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में हुई थी।
वर्तमान में मामला भारत का सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और कार्यवाही पर स्थगन भी लागू है। एडवोकेट शर्मा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट आदेश आने के बाद ही ASI इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय ले सकेगी। तब तक शाही जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई को लेकर यथास्थिति बनी रहेगी।
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