अहमदाबाद, सूरत और राजकोट समेत पूरे राज्य में 72 घंटों से जारी है महा-अभियान, 362 अवैध बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार और हजारों रडार पर।
गुजरात में राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक अभूतपूर्व और अत्यंत व्यापक सुरक्षा अभियान
- गुजरात में घुसपैठियों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने खोला मोर्चा, ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के तहत शुरू हुआ अब तक का सबसे बड़ा तलाशी अभियान।
- साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मदद से तैयार हुआ टेलीकॉम डेटाबेस, फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेजों के जरिए छिपे घुसपैठियों की धड़पकड़ तेज।
गुजरात में राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक अभूतपूर्व और अत्यंत व्यापक सुरक्षा अभियान की शुरुआत की गई है। 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' नाम के इस विशेष अभियान को अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों, विशेषकर बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिह्नित कर उन्हें वापस भेजने के लिए तैयार किया गया है। राज्य के गृह विभाग की देखरेख में शुरू हुआ यह अभियान पिछले 72 घंटों से पूरे सूबे में अत्यंत तीव्र गति से चलाया जा रहा है। सुरक्षा बलों और पुलिस की विभिन्न शाखाओं ने एक साथ मिलकर राज्य के सभी प्रमुख शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और संवेदनशील बस्तियों में सघन छापेमारी की है। इस रणनीतिक कार्रवाई ने उन नेटवर्क को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है जो देश की सीमाओं को लांघकर अवैध रूप से भारत में दाखिल होते हैं और पहचान छिपाकर अलग-अलग राज्यों में बस जाते हैं।
इस वृहद अभियान की योजना बेहद गुप्त तरीके से उच्च स्तर पर तैयार की गई थी, जिसके क्रियान्वयन के लिए तकनीकी खुफिया जानकारी और जमीनी इनपुट्स का एक बेहतरीन संयोजन किया गया। राज्य पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के पहले चरण में ही 362 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को आधिकारिक तौर पर हिरासत में लिया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, लगभग 782 अन्य संदिग्ध विदेशी नागरिकों की नागरिकता और उनके पहचान पत्रों का गहन सत्यापन किया जा रहा है। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान कुल मिलाकर 6,200 से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों की पृष्ठभूमि और उनके भारत आगमन के तौर-तरीकों की जांच शुरू कर दी है। पकड़े गए लोगों में 103 पुरुष, 188 महिलाएं और 71 बच्चे शामिल हैं, जो बिना किसी वैध पासपोर्ट या वीजा के देश की सीमा के भीतर रह रहे थे।
इस मेगा सर्च ऑपरेशन के दौरान राज्य के सबसे बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र अहमदाबाद में सर्वाधिक कार्रवाई देखने को मिली है। अहमदाबाद शहर से ही अकेले 166 अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिया गया है, जबकि सूरत से 84 और सौराष्ट्र तथा कच्छ के सीमावर्ती क्षेत्रों से 51 लोगों को पकड़ा गया है। अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच, साइबर क्राइम ब्रांच, स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) और स्थानीय पुलिस थानों की लगभग 30 से अधिक विशेष टीमों को इस काम में लगाया गया है। सुरक्षा बलों ने शहर के नरोदा, दानिलिमडा, वटवा, वटवा जीआईडीसी, जुहापुरा और चंडोला झील के आसपास के इलाकों को पूरी तरह से घेरकर तलाशी ली। इन क्षेत्रों में पहले भी इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिलती रही हैं, जिसके बाद इस बार पूरी तैयारी के साथ लक्षित कार्रवाई की गई। इस बार का सुरक्षा अभियान केवल पारंपरिक छापेमारी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें आधुनिकतम तकनीक का उपयोग किया गया है। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मदद से राज्य के भीतर सक्रिय उन सभी मोबाइल नंबरों का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार किया गया, जिनसे लगातार बांग्लादेश के कोड वाले नंबरों पर बातचीत की जा रही थी। इस गहन टेलीकॉम विश्लेषण के माध्यम से पुलिस को उन संदिग्धों की सटीक लोकेशन और उनके स्थानीय मददगारों के नेटवर्क का पता लगाने में अभूतपूर्व सफलता मिली, जिसके आधार पर ही जमीनी स्तर पर एक साथ दबिश दी गई।
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक हैं क्योंकि इन घुसपैठियों ने भारत में लंबे समय तक बने रहने के लिए फर्जी दस्तावेजों का एक पूरा तंत्र विकसित कर लिया था। हिरासत में लिए गए कई व्यक्तियों के पास से वैध दिखने वाले आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और सिम कार्ड बरामद हुए हैं। पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इनमें से अधिकांश घुसपैठियों ने कई वर्ष पहले पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों के माध्यम से भारत की सीमा में प्रवेश किया था। वहां के स्थानीय एजेंटों और बिचौलियों की मदद से उन्होंने बेहद मामूली या जाली सरकारी दस्तावेजों के आधार पर पहले भारतीय पहचान पत्र बनवाए और फिर काम की तलाश में गुजरात के विभिन्न शहरों का रुख किया। पुलिस अब उन सभी बिचौलियों और सरकारी विभागों के संदिग्धों की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने इन अवैध नागरिकों के कागजात बनाने में मदद की थी।
इस व्यापक कार्रवाई के शुरू होते ही घुसपैठियों और उनके नेटवर्क के बीच भारी हड़कंप मच गया, जिसके चलते कई संदिग्धों ने राज्य से बाहर भागने की कोशिश भी की। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने इस स्थिति का पहले ही आकलन कर लिया था और शहरों में छापेमारी शुरू होने के साथ ही सभी निकास द्वारों पर कड़ा पहरा बैठा दिया गया था। राज्य के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों, अंतरराज्यीय बस टर्मिनलों, राष्ट्रीय राजमार्गों और जिला सीमाओं पर विशेष चौकियां स्थापित की गईं। इस सख्त नाकाबंदी का परिणाम यह रहा कि कम से कम 18 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को तब दबोच लिया गया जब वे बसों और ट्रेनों के जरिए गुजरात की सीमा से बाहर भागने की फिराक में थे। कच्छ पूर्व के गांधीधाम, अंजार, रापड़ और भचाऊ जैसे क्षेत्रों में भी टेक्सटाइल और casual labour (दिहाड़ी मजदूरी) के काम में लगे संदिग्धों को चिन्हित कर हिरासत में लिया गया है।
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