मालवीय नगर अग्निकांड में 21 मासूम जिंदगियों की मौत के बाद जागा प्रशासन, आज से एक महीने तक पूरी दिल्ली में चलाया जाएगा सघन चेकिंग और सीलिंग अभियान।
दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक अवैध होटलनुमा इमारत में भड़की भीषण आग की त्रासदी ने पूरी राजधानी
- होटल, लॉज, कोचिंग सेंटर और नर्सिंग होम की कमियों पर तुरंत कटेगी बिजली, उल्लंघन पर होगी एफआईआर, बड़े हादसे के बाद जागा प्रशासन
- राजधानी दिल्ली में व्यावसायिक और आवासीय कमर्शियल इमारतों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सुरक्षा अभियान, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों पर गिरेगी गाज।
दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक अवैध होटलनुमा इमारत में भड़की भीषण आग की त्रासदी ने पूरी राजधानी को हिलाकर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 17 विदेशी नागरिकों सहित कुल 21 लोगों की असमय मौत हो गई, जिसके बाद दिल्ली के प्रशासनिक और शासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। इस भयावह घटना से सबक लेते हुए प्रशासन ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राजधानी दिल्ली में आज से सभी प्रकार के होटलों, लॉज, गेस्ट हाउस, नर्सिंग होम, कोचिंग सेंटरों और अन्य संवेदनशील व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बड़े पैमाने पर फायर सेफ्टी (अग्नि सुरक्षा) ऑडिट और सघन जांच अभियान शुरू किया जा रहा है। शासन के उच्च स्तर पर बुलाई गई एक आपातकालीन और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि नियमों की अनदेखी करके इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को अब बख्शा नहीं जाएगा।
यह विशेष सुरक्षा अभियान आज से शुरू होकर अगले एक महीने तक पूरी दिल्ली के सभी जिलों में एक साथ और बेहद आक्रामक तरीके से चलाया जाएगा। इस अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए गृह विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जबकि मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर इसकी सीधी निगरानी करेंगे। जिला स्तर पर विशेष संयुक्त निरीक्षण टीमों का गठन किया गया है, जिनमें जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ दिल्ली पुलिस, नगर निगम (एमसीडी), दमकल विभाग (डीएफएस) और विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारी शामिल हैं। यह टीमें बिना किसी पूर्व सूचना के चिन्हित किए गए व्यावसायिक क्षेत्रों और इमारतों में अचानक पहुंचेंगी और वहां मौजूद अग्नि सुरक्षा के इंतजामों की जमीनी हकीकत को परखेंगी। यदि जांच के दौरान किसी भी इमारत में नियमों का थोड़ा सा भी उल्लंघन पाया जाता है, तो वहां तत्काल प्रभाव से कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, इस अभियान के दौरान सबसे पहला और कड़ा प्रहार उन होटल और गेस्ट हाउस पर होगा जो स्वीकृत क्षमता से अधिक कमरे बनाकर धड़ल्ले से व्यापार कर रहे हैं। मालवीय नगर के हादसे में यह बात सामने आई थी कि बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) योजना के तहत केवल 6 कमरों की अनुमति होने के बावजूद वहां 25 से अधिक कमरे संचालित किए जा रहे थे। इसलिए, अब दिल्ली में पंजीकृत सभी 702 बीएंडबी संपत्तियों और अन्य होटलों के कमरों की भौतिक रूप से गिनती की जाएगी। स्वीकृत सीमा से अधिक पाए जाने वाले सभी कमरों को तुरंत सील कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, यदि किसी भी संस्थान में अग्नि सुरक्षा की कमियां पाई जाती हैं, तो बिजली विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना किसी देरी के उस परिसर का विद्युत कनेक्शन काट दें ताकि कोई बड़ा हादसा होने से पहले ही उसे रोका जा सके।
चोक पॉइंट्स और रास्तों का होगा सर्वे
इस महा-अभियान के तहत दमकल विभाग और भूमि प्रबंधन एजेंसियां संयुक्त रूप से दिल्ली के तंग और भीड़भाड़ वाले इलाकों में एक विशेष 'एक्सेसिबिलिटी सर्वे' (पहुंच मार्ग सर्वेक्षण) भी करेंगी। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य उन चोक पॉइंट्स, संकरी गलियों और अवैध अतिक्रमणों की पहचान करना है, जो किसी आपातकालीन स्थिति में दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचने से रोकते हैं। इन बाधाओं को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाएगा और जहां रास्ते चौड़े करना संभव नहीं होगा, वहां वैकल्पिक अग्निशमन व्यवस्थाएं तैयार की जाएंगी।
जांच टीमों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे केवल कागजी दस्तावेजों या फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) को देखकर संतुष्ट न हों, बल्कि मौके पर मौजूद उपकरणों की कार्यक्षमता की भी बारीकी से जांच करें। प्रत्येक इमारत में लगे स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म, पानी के टैंक, हाइड्रेंट और पोर्टेबल अग्निशामक यंत्रों का लाइव टेस्ट लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इमारतों के स्थापत्य ढांचे (आर्किटेक्चरल लेआउट) की भी जांच होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए कम से कम दो रास्ते उपलब्ध हों। ऐसी इमारतें जहां खिड़कियों को स्थाई रूप से लोहे की ग्रिल या शीशों से सील कर दिया गया है और वेंटिलेशन का कोई जरिया नहीं छोड़ा गया है, उनके खिलाफ सबसे सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी क्योंकि ऐसी बनावट आग लगने पर गैस चैंबर का रूप ले लेती है।
इस बार का सुरक्षा अभियान केवल पारंपरिक व्यावसायिक क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें उन क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है जहां युवाओं और मरीजों की भारी तादाद मौजूद रहती है। दिल्ली के विभिन्न कोनों में चल रहे सैकड़ों नर्सिंग होम और कोचिंग सेंटरों को भी इस बार रडार पर लिया गया है। अक्सर देखा गया है कि संकरी इमारतों में बिना उचित निकास व्यवस्था के सैकड़ों छात्र एक साथ बैठकर पढ़ाई करते हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़े खतरे को आमंत्रण देता है। इसी तरह, कई छोटे नर्सिंग होम भी संकरी गलियों में बहुमंजिला इमारतों के भीतर बिना किसी वेंटिलेशन या स्मोक डिटेक्टर के संचालित हो रहे हैं। संयुक्त जांच दल इन सभी शिक्षण और चिकित्सा संस्थानों के परिसरों का दौरा करके वहां की कमियों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे और असुरक्षित पाए जाने वाले संस्थानों को तुरंत बंद करने का आदेश जारी करेंगे।
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