स्विगी ने बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस- अब हर ऑर्डर पर देनी होगी 14 रुपये की फीस, त्योहारी सीजन में लागू हुआ बदलाव। 

Swiggy Platform: फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में 2 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की, जिसके बाद अब ग्राहकों को हर ऑर्डर पर 14 रुपये की फीस....

Aug 16, 2025 - 17:00
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स्विगी ने बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस- अब हर ऑर्डर पर देनी होगी 14 रुपये की फीस, त्योहारी सीजन में लागू हुआ बदलाव। 
स्विगी ने बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस- अब हर ऑर्डर पर देनी होगी 14 रुपये की फीस, त्योहारी सीजन में लागू हुआ बदलाव। 

फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में 2 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की, जिसके बाद अब ग्राहकों को हर ऑर्डर पर 14 रुपये की फीस देनी होगी। यह बदलाव कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में लागू किया गया है, जहां त्योहारी सीजन के दौरान ऑर्डर की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। कंपनी ने इस बढ़ोतरी का कारण त्योहारी मांग को बताया है, जिसके चलते वह अपनी लाभप्रदता को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। यह फीस, जो पहले 12 रुपये थी, अब 17% की वृद्धि के साथ 14 रुपये हो गई है। पिछले दो वर्षों में स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस में 600% की वृद्धि हुई है, जो अप्रैल 2023 में मात्र 2 रुपये थी। स्विगी ने यह फीस वृद्धि ऐसे समय में की है, जब कंपनी अपने वित्तीय नुकसान को कम करने की कोशिश कर रही है। जुलाई 2025 में कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए अपने वित्तीय परिणाम जारी किए, जिसमें 1,197 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया गया। यह घाटा पिछले वर्ष की समान तिमाही में 611 करोड़ रुपये था, यानी इसमें लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है। स्विगी की क्विक कॉमर्स सेवा, इंस्टामार्ट, इस घाटे का एक बड़ा कारण रही, क्योंकि कंपनी ने इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। हालांकि, कंपनी की परिचालन आय में 54% की वृद्धि हुई और यह 4,961 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस वित्तीय स्थिति के बीच, स्विगी ने प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर अपनी आय बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस की शुरुआत अप्रैल 2023 में 2 रुपये से हुई थी। इसके बाद, जुलाई 2024 में यह बढ़कर 6 रुपये, अक्टूबर 2024 में 10 रुपये, और अब अगस्त 2025 में 14 रुपये हो गई है। यह 600% की वृद्धि दर्शाता है, जो ग्राहकों के लिए खाना ऑर्डर करने की लागत को काफी बढ़ा रहा है। स्विगी प्रतिदिन 20 लाख से अधिक ऑर्डर डिलीवर करती है, और इस फीस वृद्धि से कंपनी को प्रतिदिन लगभग 2.8 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है। यह राशि सालाना आधार पर 33.6 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। कंपनी ने इस बढ़ोतरी पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव उच्च मांग वाले क्षेत्रों में लागू किया गया है और मांग कम होने पर फीस को वापस 12 रुपये किया जा सकता है।

स्विगी की इस रणनीति का अनुसरण उसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी जोमैटो भी कर रही है। जोमैटो ने भी पिछले दो वर्षों में अपनी प्लेटफॉर्म फीस में पांच बार वृद्धि की है, जो 400% की बढ़ोतरी दर्शाती है। वर्तमान में जोमैटो की फीस 10 रुपये (जीएसटी को छोड़कर) है। दोनों कंपनियां उच्च मांग वाले दिनों, जैसे त्योहारी सीजन या विशेष अवसरों पर फीस बढ़ाने का प्रयोग करती रही हैं। अगर इस दौरान ऑर्डर की मात्रा पर कोई असर नहीं पड़ता, तो वे नई फीस संरचना को बनाए रखती हैं। यह रणनीति दोनों कंपनियों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद करती है, लेकिन इससे ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इस फीस वृद्धि का असर रेस्तरां मालिकों पर भी पड़ रहा है। स्विगी और जोमैटो दोनों ही रेस्तरां से 16-35% तक कमीशन लेते हैं, जिसके कारण कई रेस्तरां मालिकों को अपने मेनू की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। कई सर्वेक्षणों के अनुसार, ऑनलाइन ऑर्डर की कीमतें रेस्तरां में खाने की तुलना में 50% तक अधिक हो सकती हैं। इससे ग्राहकों को न केवल प्लेटफॉर्म फीस, बल्कि बढ़ी हुई मेनू कीमतों का भी सामना करना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, एक सामान्य 500-600 रुपये के ऑर्डर पर अब ग्राहकों को 14 रुपये की प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी शुल्क, और जीएसटी देना पड़ता है, जिससे कुल लागत काफी बढ़ जाती है।

इस फीस वृद्धि की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर ग्राहकों की प्रतिक्रियाएं मिश्रित रही हैं। कुछ लोगों ने इसे सामान्य वृद्धि मानकर स्वीकार किया, जबकि अन्य ने स्विगी और जोमैटो की नीतियों की आलोचना की। एक एक्स पोस्ट में एक यूजर ने लिखा कि स्विगी की फीस वृद्धि से छोटे ऑर्डर करना अब महंगा हो गया है, और यह मध्यम वर्ग के लिए बोझ बन रहा है। एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि क्या यह अतिरिक्त आय डिलीवरी कर्मचारियों की स्थिति सुधारने के लिए उपयोग की जाएगी। कई लोगों ने शिकायत की कि स्विगी और जोमैटो बार-बार फीस बढ़ा रहे हैं, लेकिन डिलीवरी कर्मचारियों की कार्य स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है। डिलीवरी कर्मचारियों की स्थिति भी इस चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्विगी और जोमैटो पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि वे अपने डिलीवरी कर्मचारियों को उचित वेतन और सुविधाएं नहीं दे रहे। कई सर्वेक्षणों और मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि डिलीवरी कर्मचारियों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है, और उनकी आय अक्सर अस्थिर होती है। इस फीस वृद्धि के बावजूद, यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यह अतिरिक्त आय कर्मचारियों की स्थिति सुधारने के लिए उपयोग की जाएगी। स्विगी ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है, जिससे कई लोग निराश हैं। स्विगी की इस फीस वृद्धि का समय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह त्योहारी सीजन के दौरान लागू की गई है। स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, और जन्माष्टमी जैसे अवसरों पर लोग अधिक खाना ऑर्डर करते हैं, जिससे स्विगी और जोमैटो को अपनी आय बढ़ाने का मौका मिलता है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि केवल अस्थायी हो सकती है, और मांग कम होने पर फीस को वापस कम किया जा सकता है। फिर भी, पिछले अनुभवों को देखते हुए, दोनों कंपनियों ने अक्सर फीस बढ़ाने के बाद उसे बनाए रखा है, अगर ऑर्डर की मात्रा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।

इसके अलावा, स्विगी और जोमैटो को अब एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रैपिडो ने अपनी फूड डिलीवरी सेवा, ओनली, शुरू की है, जो बेंगलुरु के कुछ क्षेत्रों में उपलब्ध है। ओनली 8-15% की कमीशन दर लेता है, जो स्विगी और जोमैटो की तुलना में काफी कम है। इससे रेस्तरां मालिकों को राहत मिल सकती है, और ग्राहकों के लिए कीमतें भी कम हो सकती हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि स्विगी और जोमैटो इस नई प्रतिस्पर्धा का सामना कैसे करते हैं। स्विगी की इस फीस वृद्धि ने उपभोक्ताओं, रेस्तरां मालिकों, और डिलीवरी कर्मचारियों के बीच कई सवाल खड़े किए हैं। ग्राहकों के लिए खाना ऑर्डर करना अब और महंगा हो गया है, और यह मध्यम वर्ग के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। रेस्तरां मालिकों को भी अपनी कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं, जिससे ऑनलाइन ऑर्डर की लागत और बढ़ रही है। दूसरी ओर, डिलीवरी कर्मचारियों की स्थिति में सुधार की मांग बढ़ रही है। यह फीस वृद्धि स्विगी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसके साथ ही कंपनी को ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने और डिलीवरी कर्मचारियों की स्थिति सुधारने की दिशा में भी कदम उठाने होंगे।

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